तेजस्वी का ‘बिहार अधिकार यात्रा’, सीट शेयरिंग का दबाव या राहुल गांधी से डर

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तेजस्वी यादव की ‘बिहार अधिकार यात्रा’ शुरू होने से पहले ही एक स्लोगन ने सियासी बवाल मचा दिया है। यह स्लोगन सीधे तौर पर राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ पर तंज प्रतीत हो रहाहै। सवाल है कि क्या यह महागठबंधन की अंदरूनी कलह का संकेत है?

‘भीड़ भी हमारी थी, झंडा उठाने वाला भी हमारा था, बस भ्रम और अहम तुम्हारा था।जहानाबाद में आरजेडी के सीएम फेस तेजस्वी यादव के ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के शुरू होने पर यह स्लोगन खूब वायरल हो रहे हैं। क्या ये स्लोगन हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘वोटर अधिकार यात्रा’ पर तंज तो नहीं है? अगर यह स्लोगन राहुल गांधी के लिए है तो यह महागठबंधन के भीतर की कलह को अब सड़क पर ले आया है।तेजस्वी यादव मंगलवार से 10 जिलों की यात्रा पर निकले हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि तेजस्वी यादव ने जहानाबाद, नालंदा, पटना, बेगूसराय, खगड़िया, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, समस्तीपुर और वैशाली को ही यात्रा के लिए क्यों चुना? क्या राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ जिन जिलों से नहीं गुजरी थी, तेजस्वी उन जिलों को ‘बिहार अधिकार यात्रा’ से कवर कर रहे हैं? क्या राहुल गांधी की लोकप्रियता से डर गए तेजस्वी? या फिर तेजस्वी यादव की बिहार चुनाव 2025 को लेकर कुछ और रणनीति है?

तेजस्वी ने अपनी यात्रा के लिए जिन 10 जिलों को चुना है, उनकी सूची भी राजनीतिक विश्लेषकों को हैरान कर रही है। ये जिले हैं जहानाबाद, नालंदा, पटना, बेगूसराय, खगड़िया, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, समस्तीपुर और वैशाली.तेजस्वी ने जिन जिलों को चुना है, वह कोई संयोग नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। राहुल गांधी की यात्राके बाद कांग्रेस ने महागठबंधन में ज्यादा सीटों की मांग करना शुरू कर दिया है। तेजस्वी इन 10 जिलों में अपनी ताकत दिखाकर कांग्रेस को यह संदेश देना चाहते हैं कि असली जनाधार आरजेडी के पास है और सीटों का बंटवारा उनकी शर्तों पर ही होगा।

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