आखिर शरद पवार ने जेड प्लस सिक्योरिटी लेने से इंकार क्यों कर दिया ?

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न्यूज़ डेस्क 
केंद्र सरकार ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार को जेड सिक्योरिटी मुहैया मुहैया करने का निर्णय लिया था लेकिन शारद पवार ने इसे मना कर दिया है। पवार ने कहा है कि पहले वह देखेंगे कि उनके खिलाफ किस प्रकार का थ्रेट परसेप्शन है और इसके बाद वह फैसला लेंगे कि उन्हें सुरक्षा लेनी है या नहीं।

बता दें कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार इससे पहले भी केंद्र से मिली सुरक्षा को लेकर उदासीनता व्यक्त कर चुके हैं। कुछ दिनों पहले उन्होंने केंद्र से मिली सुरक्षा को लेकर कहा था कि जेड प्लस सिक्योरिटी उनके बारे में प्रामाणिक जानकारी प्राप्त करने का एक तरीका हो सकता है। 

बता दें कि सरकार को जब किसी वीआईपी के लिए खुफिया विभाग से थ्रेट की जानकारी प्राप्त होती है तो थ्रेट की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्रालय उस वीआईपी को सुरक्षा प्रदान करती है।  यह थ्रेट के हिसाब से Y, Z या Z+ किसी भी कैटेगरी कि सिक्योरिटी हो सकती है। सुरक्षा मिलने के बाद वीआईपी चाहे तो कोई वैलिड कारण बताते हुए सुरक्षा वापस कर सकता है। 

बता दें कि  2014 में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश पी. सतशिवम को रिटायरमेंट के बाद वीआईपी सुरक्षा देने का निर्णय किया गया। लेकिन उन्होंने सुरक्षा लेने से यह कहते हुए मना कर दिया कि उनके घर में सुरक्षाकर्मियों के लिए कोई विशेष स्थान नहीं है, क्योंकि उनका घर छोटा है। हालांकि, इसके बाद भी खतरे का आंकलन करते हुए सरकार चाहे तो एक जवान को वीआईपी की सुरक्षा में लगा सकती है। 

जेड प्लस कैटगरी में 10 से अधिक एनएसजी कमांडो होते हैं।  इसके अलावा घर की सुरक्षा के लिये अतिरिक्त सीआरपीएफ के जवान और स्थानीय पुलिसकर्मी होते हैं। कुल सुरक्षाकर्मियों की संख्या की बात करें तो जेड प्लस सिक्योरिटी में कुल 36 सुरक्षाकर्मी एक वीआईपी की सिक्योरिटी में लगे होते हैं। 

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