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महाराष्ट्र की इस चुनावी महाभारत में बाजी एनडीए मारेगा या लगेगी इंडिया गठबंधन के हाथ

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2014 और 2019 में महाराष्ट्र में हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना गठबंधन का चुनावी घोड़ा पूरे महाराष्ट्र में सरपट दौड़ता हुआ इस गठबंधन को न सिर्फ लोकसभा बल्कि विधानसभा में भी बहुमत तक ले गया था।हालांकि विधान सभा में मिली जीत को तत्कालीन शिव सेना और बीजेपी गठबंधन बरकरार नहीं रख सका, उल्टे इस जीत ने इस गठबंधन में ही दरार उत्पन्न कर दिया।दोनो ही घटक दल शिवसेना और बीजेपी सत्ताशीर्ष पर अपने – अपने नेताओं को बैठाने के चक्कर में अलग होगए।तभी बीजेपी ने पर्दे के पीछे से एक खेल खेला और एनसीपी को दो फाड़ कर दिया और देवेंद्र फडणवीस ने अजीत पवार के सहयोग से मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली।हालांकि अजीत पवार का यह सहयोग बीजेपी को ज्यादा मदद नहीं पहुंचा पाया, क्योंकि तब शरद पवार का एनसीपी में काफी वर्चस्व था जिस कारण एनसीपी के अन्य बागी विधायकों के साथ-साथ अजीत पवार को भी वापस तत्कालीन एनसीपी खेमे में लौटना पड़ा था। वहीं दूसरी तरफ बीजेपी से गठबंधन तोड़ने के बाद मुख्यमंत्री बनने की सालसा लिए हुए उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ गठबंधन का सत्ता संभाल ली।हालांकि उन्हें भी बिना 5 वर्ष पूरा किए ही मुख्यमंत्री की अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी, क्योंकि बीजेपी ने एक बड़ा खेल खेलते हुए न सिर्फ उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाकर शिवसेना के ही एक दूसरे छत्रप एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठा दिया,बल्कि शिवसेना का असली हकदार भी एकनाथ शिंदे को ही बना दिया ।इसकी थोड़ी दिनों के बाद बीजेपी ने महाराष्ट्र की राजनीति में तीसरा खेल खेलकर एनसीपी को भी तोड़ दिया और अपने गठबंधन में मिला लिया। अब एनसीपी भी शरद पवार के हाथ से निकलकर अजीत पवार की हाथ में जाती दिख रही है। कुल मिलाकर महाराष्ट्र की स्थिति ऐसी बनी है की इस चुनावी समर में एनडीए और इंडिया दोनों ही गठबंधनों में शिवसेना और एनसीपी शामिल है। इस चुनाव में बाजी एनडीए मार ले जाएगा या यह इंडिया गठबंधन के हाथ लगेगी, इसका तो फैसला होगा ही इस बात का भी फैसला होगा कि जनता की नजर में असली शिवसेना और असली एनसीपी कौन सी है ।

पूर्व के चुनावी डेटा का रुझान

वैसे तो इस साल के चुनाव में कौन जीतेगा और किसे पराजय मिलेगी, यह मतदाताओं के वर्तमान मूड पर निर्भर करेगा,लेकिन मतदाताओं का यह मूड बहुत हदतक पिछले चुनाव के आंकड़ों के आधार पर भी जाना जा सकता है।पिछले चुनावों के परिणाम को अगर देखें तो महाराष्ट्र में बीजेपी की अच्छी पकड़ रही है।महाराष्ट्र की 48 सीटों में से बीजेपी गठबंधन ने 2009 के चुनाव में भी जब कि देश भर में उसकी हार हुई थी ,तब भी महाराष्ट्र में 20 सीटों पर जीत दर्ज किया था। वहीं 2019 के चुनाव में बीजेपी और शिवसेना गठबंधन का वोट शेयर 50 प्रतिशत के पार पहुंच गया और इस गठबंधन को 41 सीटों पर जीत मिली थी।

2004 के चुनाव का चुनावी परिणाम

2004 के चुनाव में बीजेपी को 13 सीट, शिवसेना जो बीजेपी के साथ थी, उसे 12 सीटों पर जीत मिली थी।कांग्रेस को 13 और एनसीपी को 9 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं अगर वोट शेयर की बात करें तो बीजेपी और शिवसेना गठबंधन के हिस्से 42.7 प्रतिशत वोट शेयर था।दूसरी तरफ एनसीपी और कांग्रेस गठबंधन के हिस्से 42.1 प्रतिशत वोट शेयर रहा था।

2009 में एनडीए को उठाना पड़ा था नुकसान

2009 के चुनाव में देश भर में कांग्रेस गठबंधन को जीत मिली थी।महाराष्ट्र में भी एनडीए को 5 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा था।तब महाराष्ट्र में बीजेपी को 9 सीटों पर जीत मिली थी जबकि शिवसेना के हाथ 11 सीटें आयी थी।कांग्रेस और एनसीपी गठबंधन को 25 सीटों पर जीत मिली थी ।कांग्रेस को 17 और एनसीपी को 8 सीटों पर मिली थी जीत।अगर वोट परसेंट की बात करें तो एनडीए गठबंधन को 35.2 प्रतिशत वोट मिले थे।दूसरी तरफ कांग्रेस गठबंधन के मत प्रतिशत में भी गिरावट देखने को मिली थी,लेकिन इसके बावजूद इसकी सीट में बढ़ोतरी हुई थी।तब कांग्रेस गठबंधन को 39.9 प्रतिशत वोट मिले थे।

2014 में एनडीए ने वोट और सीट दोनों में मारी बाजी

महाराष्ट्र में 2014 के चुनाव में एनडीए को बंपर जीत मिली थी।एनडीए का वोट शेयर 2009 के लगभग 35 प्रतिशत से बढ़कर 2014 में 47.9 प्रतिशत तक पहुंच गया।बात अगर सीटों की करें तो इस चुनाव में एनडीए को 48 में से 41 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं इस चुनाव में कांग्रेस को महज 1 सीट और एनसीपी को 4 सीटों पर ही जीत मिल सकी थी।इस तरह वहां कांग्रेस को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा था।

2019 के चुनाव में एनडीए का वोट प्रतिशत 50 % पार

महाराष्ट्रव में 2019 के चुनाव में भी बीजेपी को बंपर जीत मिली थी। पहली बार एनडीए का वोट शेयर 50 परसेंट के पार पहुंच गया था। तब एनडीए गठबंधन को लगभग 51 परसेंट वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस गठबंधन का वोट शेयर घटकर मात्र 31.8 प्रतिशत पर रह गया था।कांग्रेस को 16.3 प्रतिशत वोट मिले वहीं एनसीपी को 15.5 प्रतिशत वोट मिले थे।

2009 की तुलना में एनडीए ने 2019 के चुनाव में लगाया 15 प्रतिशत से भी अधिक वोट का छलांग

महाराष्ट्र में 2009 के चुनाव में कांग्रेस गठबंधन को जहां 39.9 प्रतिशत वोट मिले थे और एनडीए को महज 35 प्रतिशत वोट मिले थे,वहीं 2019 के चुनाव में एनडीए का 50 के पार पहुंच गया। वहीं कांग्रेस गठबंधन का वोट शेयर घटकर मात्र 30 प्रतिशत के आसपास रह गया।कांग्रेस और एनसीपी के वोट और सीट दोनों ही तेजी से कम हुए।

पीएम मोदी हैं इस बार के बड़े फैक्टर

पुराने डेटा से यह स्पष्ट है कि बीजेपी और शिवसेना गठबंधन की जीत में भी बीजेपी का बड़ा योगदान रहा है।शिवसेना का भी ग्राफ तब ही बढ़ा है जब बीजेपी मजबूत हुई है।2014 में मोदी के चुनावी परिदृश्य में आने के बाद से बीजेपी और शिव सेना दोनो महाराष्ट्र में तेजी से मजबूत हुई है।शिवसेना में विभाजन के बाद यह बात बेहद अहम है कि शिवसेना के वोटर्स अब किधर जाएंगे। वहीं एनसीपी के वोटर्स को लेकर भी अंतिम समय तक कुछ भी कहना बहुत कठिन है।हालांकि इस चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीजेपी के लिए 370 और एनडीए 400 पार का नारा देकर बीजेपी के साथ ही अपने गठबंधन के सहयोगियों को भी जिताने की बात करते हैं। इस सिलसिला में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद और इनके अलावा बीजेपी के शीर्ष नेता भी महाराष्ट्र में लगातार आकर अपने गठबंधन के सहयोगियों के साथ मिलकर चुनावी रैली कर महाराष्ट्र में जीत का रास्ता तैयार करने में जुट गए हैं।

बेहद रोचक होगा महाराष्ट्र के लोकसभा का यह चुनाव

महाराष्ट्र की राजनीति में यह चुनाव पिछले 3-4 दशक के बाद बेहद रोचक चुनाव हो सकता है। शरद पवार और बाल ठाकरे महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय तक एक छत्र राज करते रहे थे। बाल ठाकरे और शरद पवार की विरासत पर कब्जे को लेकर एकनाथ शिंदे, उद्धव ठाकरे, अजित पवार और सुप्रिया श्रीनेत के बीच कड़ी टक्कर होगी। यह चुनाव एनडीए या इंडिया गठबंधन में से किसी एक की जीत और किसी एक की हार तो तय करेगा ही।इस जीत और हार से बढ़कर यह महाराष्ट्र की राजनीतिक विरासत की लड़ाई को भी बहुत हद तक तय कर देगा।

 

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