बीरेंद्र कुमार झा
सीनेट सदस्य अनवर उल हक काकड़ को पाकिस्तान में आगामी चुनाव होने तक के लिए देश का कार्यवाहक प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है।प्रधानमंत्री कार्यालय के एक बयान के मुताबिक वर्तमान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और भंग की जा चुकी नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता राजा रियाद अहमद के बीच विचार विमर्श के अंतिम दिन काकड़ के नाम पर सहमति बनी। बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता ने संयुक्त रूप से काकड़ को कार्यवाहक प्रधानमंत्री नियुक्त करने की सलाह पर हस्ताक्षर किए और उसे राष्ट्रपति को भेज दिया। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए रियाज ने कहा कि हमने तय किया है की अंतरिम प्रधानमंत्री एक छोटे प्रांत से होगा। काकड़ जल्दी ही प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे और अंतरिम अवधि के दौरान देश के शासन की कमान संभालने के लिए अपना मंत्रिमंडल चुनेंगे।
कौन है अनवर उल हक
अनवर उल हक काकड़ ब्लूचिस्तान प्रांत के एक पख्तून हैं और वह ब्लूचिस्तान आवामी पार्टी के सदस्य हैं।यह पार्टी देश के शक्तिशाली प्रतिष्ठान सेना के करीब मानी जाती है। काकड़ 2018 में सीनेट (पाकिस्तानी संसद के उच्च सदन ) के लिए चुने गए थे और वह एक बहुत सक्रिय राजनेता रहे हैं। उच्च सदन में आने से पहले वे ब्लूचिस्तान प्रांतीय सरकार के प्रवक्ता भी रह चुके हैं।काकड़ ने राजनीति विज्ञान और समाजशास्त्र की डिग्री हासिल की है और वे ब्लूचिस्तान विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं।
कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनने के बाद अनवर उल हक की पहली प्रतिक्रिया
अपनी पहली प्रतिक्रिया में अनवर उल हक काकड़ ने ट्वीट किया कि अल्लाह का शुक्रगुजार हूं, जिन्होंने पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में राष्ट्र की सेवा करने का मुझे अवसर दिया। इंशा अल्लाह अपना सर्वश्रेष्ठ दूंगा,जो पाकिस्तान के हित में होगा।
विपक्ष के नेता रियाज की अनवर की नियुक्ति पर प्रतिक्रिया
मीडिया से बात करते हुए विपक्ष के नेता रियाज ने कहा कि हमने फैसला किया कि कार्यवाहक प्रधानमंत्री एक छोटे प्रांत से होंगे। उन्होंने कहा कि काकड़ के नाम का सुझाव उन्होंने ही दिया जिसे मंजूर कर लिया गया।राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने संविधान के अनुच्छेद 224 (1A) के तहत कार्यवाहक प्रधानमंत्री के तौर पर काकड़ की नियुक्ति की मंजूरी दी। शहबाज ने परामर्श प्रक्रिया के दौरान सहयोग और पिछले 16 महीने के दौरान विपक्ष के शानदार नेतृत्व को लेकर रियाज का शुक्रिया अदा किया।
पाकिस्तान में 90 दिनों के अंदर होगा आम चुनाव
देश में आम चुनाव 90 दिनों के भीतर होने की उम्मीद है, लेकिन अगर निर्वाचन आयोग नई जनगणना के आधार पर परिसीमन करता है तो इसमें अधिक समय लग सकता है।
10 अगस्त को पाकिस्तान में भंग हुआ था नेशनल असेंबली
गौरतलब है कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने नेशनल असेंबली को इसकी निर्धारित अवधि से 3 दिन पहले ही औपचारिक रूप से भंग कर दिया था।इसके बाद इस साल के अंत में आम चुनाव होने तक देश चलाने के लिए कार्यवाहक प्रधानमंत्री की तलाश हो रही थी। राष्ट्रपति अल्वी ने निवर्तमान प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की सिफारिश पर बुधवार को नेशनल असेंबली को भंग कर दिया। इससे मौजूदा सरकार का कार्यकाल निर्धारित अवधि से 3 दिन पहले ही समाप्त हो गया।
अनुच्छेद 58 के तहत नेशनल असेंबली किया गया भंग
राष्ट्रपति कार्यालय प्रेसीडेंशियल पैलेस द्वारा जारी नेशनल असेंबली को भंग करने संबंधी अधिसूचना में कहा गया है कि नेशनल असेंबली को संविधान के अनुच्छेद 58 के तहत बंद कर दिया गया है।अनुच्छेद 58 के अनुसार राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सिफारिश के 48 घंटे के भीतर असेंबली को भंग करने में विफल रहते हैं तो यह स्वतः ही भंग हो जाती है।
कार्यवाहक प्रधानमंत्री के लिए प्रस्तावित नाम
पाक मीडिया के अनुसार कार्यवाहक प्रधानमंत्री पद के लिए अनवर उल हक काकड़ के अलावा 3 अन्य नाम प्रस्तावित किए गए थे जिनमें पूर्व राजनयिक जलील अब्बास जिलानी और पाकिस्तान के पूर्व मुख्य न्यायाधीश सैयद हुसैन जिलानी जो पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी से संबंधित हैं शामिल थे। इसके अलावा मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट पाकिस्तान द्वारा सिंध के गवर्नर कामरान किशोरी के नाम का भी प्रस्ताव रखा गया था।
नेशनल असेंबली भंग होने के 3 दिन के अंदर कार्यवाहक पीएम का नाम तय नहीं होता तो क्या होता
नेशनल असेंबली में अगर 3 दिनों के अंदर किसी नाम पर सहमति नहीं हो पाती तो मामला नेशनल असेंबली के अध्यक्ष द्वारा गठित एक समिति को भेजा जाता जिसे 3 दिन के भीतर अंतरिम प्रधानमंत्री का नाम तय करना होता। अगर समिति निर्धारित अवधि के भीतर निर्णय लेने में समर्थ नहीं होती तो प्रस्तावित नाम पाकिस्तान निर्वाचन आयोग को भेज दिए जाते ।इसके बाद आयोग विपक्ष और सरकार द्वारा प्रस्तावित नामों पर विचार करता।
पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के जेल जाने के बाद नेशनल असेंबली भंग किया गया
नेशनल असेंबली को भंग करने का कदम ऐसे वक्त उठाया गया,जब पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान भ्रष्टाचार मामले में मिली सजा को पलटने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। इमरान खान को 2018 2022 तक प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान अवैध रूप से सरकारी उपहार भेजने के लिए तोशाखाना भ्रष्टाचार मामले में गत शनिवार को इस्लामाबाद की निचली अदालत ने 3 साल की सजा सुनाई थी। बाद में उन्हें पुलिस ने उनके लाहौर स्थित आवास से गिरफ्तार कर लिया था। इमरान वर्तमान में अटक जेल में बंद है। उन्होंने मंगलवार को इस्लामाबाद हाई कोर्ट में अपने वकीलों के माध्यम से की आज का दायर कर मामले में अपना दोस्त सिद्धि और 3 साल की जेल की सजा को चुनौती दी है।

