बीरेंद्र कुमार झा
तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक (AIDMK )और भारतीय जनता पार्टी (BJP)का गठबंधन टूट चुका है। इसकी जड़ में है एक पूर्व आईपीएस अधिकारी, जिसे बीजेपी वहां पर अपना मुख्य चेहरा मानती है। यह बीजेपी के तमिलनाडु प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई।आईएडीएम के ने एनडीए गठबंधन से दूरी को लेकर संकेत दिए हैं कि अन्नामलाई ने उनके नेताओं का अपमान किया है। इन नेताओं में तमिलनाडु के पहले मुख्यमंत्री अन्नादुरई और जयललिता जैसे बड़े नाम शामिल है।एआईडीएमके नेअन्नामलाई के इस रवैए को लेकर बी जेपीपी के शीर्ष नेतृत्व से शिकायत भी की थी, लेकिन कोई एक्शन नहीं हुआ। नतीजा एआईडीएमके ने बीजेपी से नाता तोड़ते हुए यह ऐलान कर डाला कि अभी नहीं तो कभी नहीं। अब सवाल उठता है कि आखिर कौन है अन्नामलाई जिसे बीजेपी इस तरह से सपोर्ट कर रही है और क्या है इसके पीछे की वजह ?
कौन है के अन्नामलाई
के अन्नामलाई का जन्म 1984 में तमिलनाडु के करूर जिला में छोटापट्टी गांव में हुआ था। उन्होंने कोयंबटूर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। इसके बाद आईआईएम लखनऊ से एमबीए किया था। जून 2019 में जब अन्नासवामी ने आईपीएस की नौकरी छोड़ी थी,तब वह बेंगलुरु साउथ के डिप्टी पुलिस कमिश्नर थे।अपने सख्त मिजाज और ईमानदार छवि के चलते तमिलनाडु में उसकी पहचान सिंघम जैसी रही है। बीजेपी ज्वाइन करने के करीब साल भर बाद जुलाई 2021 में अन्नास्वामी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बन गए।अन्नामलाई वेल्लाला गोंडर जाति से आते हैं। तमिलनाडु के चुनाव में यह जाति काफी रणनीतिक महत्व रखती है।अन्नामलाई के जरिए बीजेपी इस वोट बैंक पर फोकस करना चाहती है।खास बात यह भी है कि अन्नामलाई उसी जाति से आते हैं जिस जाति से पलानीस्वामी आते हैं। बीजेपी इस पुर्व आईपीएस के जरिए पलानीस्वामी के वोट बैंक में सेंध लगाना चाहती है। बीजेपी अन्नामलाई की तेज तर्रार छवि का फायदा तमिलनाडु में अपने सियासी पकड़ को मजबूत बनाने में कर रही है।

