ना इंडिया में नजर आए और ना ही एनडीए में शामिल हुए अब कहां जाएंगे यह बड़े दल

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बीरेंद्र कुमार झा

दक्षिण में बेंगलुरु और उत्तर में दिल्ली दोनों ही महानगरों में कल बड़ा सियासी मेरा लगा जहां 60 से ज्यादा दलों ने शिरकत की। सभी का मकसद 2024 लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करना था और इसी के तहत रणनीति तैयार की जा रही थी।लेकिन कई बड़े राजनीतिक दल ऐसे भी थे जो न दिल्ली में नजर आए और न ही बेंगलुरु में नजर आए।

एनडीए बनाम इंडिया

मंगलवार को जारी बैठक के दौरान विपक्ष ने इंडिया यानी इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इंक्लूसिव एलायंस नाम पर मुहर लगा दी।बेंगलुरु में आयोजित इस बैठक में विपक्षी के करीब 26 दल शामिल हुए ।इस बात की अटकल लगाई जा रही है कि विपक्ष कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को गठबंधन का मुखिया बनाने की योजना बना रहा है। दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में जुटे नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस ने इसके साथ 38 दलों के होने का दावा किया है।खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मीटिंग में शामिल थे।

यह दल रहे गायब

जनता दल सेकुलर

2006 में यह दल बीजेपी के साथ रहकर सरकार में शामिल था। वहीं 2018 में कांग्रेस के साथ गठबंधन से सरकार बनाई और मुख्य मंत्री पद भी हासिल किया। माना जा रहा है कि 2023 में मिली करारी हार के बाद यह दल बीजेपी के साथ गठबंधन पर विचार कर सकती है।लेकिन अब तक किसी ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है मंगलवार को हुई बैठक से भी जेडीएस गायब रही।

शिरोमणि अकाली दल

इस बात की अटकल लगाई जा रही थी कि शिरोमणि अकाली दल की एनडीए में वापसी हो सकती है।लेकिन मंगलवार को दिल्ली में आयोजित एन डी ए की बैठक में इस पार्टी की गैरमौजूदगी ने इस अटकल पर विराम लगा दिया। हालांकि अकाली दल बेंगलुरु में विपक्ष के साथ भी नजर नहीं आया। कहा जा रहा है कि इसकी बड़ी वजह पंजाब की राजनीति हो सकती है, जहां पार्टी अपने धुर विरोधियों आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के साथ नजर आना नहीं चाहती है। अब वापस हो चुके तीन कृषि कानून के चलते शिरोमणि अकाली दल ने एनडीए से दूरी बना ली थी।

बहुजन समाज पार्टी

कभी उत्तर प्रदेश की राजनीति में दबदबा रखने वाली बहुजन समाज पार्टी के कुछ समय से लगातार कांग्रेस समेत कई दलों को घेर रही है साथी बहुजन समाज पार्टी बीजेपी की का भी विरोध कर रही है ।यह दल ना तो बेंगलुरु और ना ही दिल्ली की बैठक में नजर आया।

बीजू जनता दल

उड़ीसा में सत्तारूढ़ बीजू जनता दल से विपक्ष ने नाता जोड़ने की अपील की थी।लेकिन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने विपक्षी मोर्चे का साथ देने से इनकार कर दिया था। पार्टी का कहना है कि क्षेत्रीय दल होने के नाते हमारी अपनी नीतियां हैं। इसमें अधिकांश उड़ीसा के हित से जुड़ी हुई है।हम संसद में मुद्दों के आधार पर समर्थन देते हैं।

भारत राष्ट्र समिति

कभी विपक्षी एकता तैयार करने में सबसे आगे नजर आ रही थी। उस दौरान कहा जा रहा था कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर गैर बीजेपी और गैर कांग्रेसी गठबंधन तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं ।विपक्षी या एनडीए की बैठक से दूर होने की वजह भी कांग्रेस और बीजेपी हो सकती है।दरअसल बीजेपी लगातार दक्षिण में विस्तार की कोशिश में है और तेलंगाना को अगला पड़ाव मान रही है।वहीं राज्य में कांग्रेस भी भारत राष्ट्र समिति की धुर विरोधी है ।राहुल गांधी भी कई मौके पर भारत राष्ट्र समिति को घेर चुके हैं।

वाईएसआरसीपी

युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी यानी (YSRCP) के मुखिया वाईएस जगन मोहन रेड्डी किसी भी बैठक में नजर नहीं।आए वर्ष 2010 में वे कांग्रेस से अलग हो गए थे। इधर केंद्र में बीजेपी की नीतियों का समर्थन करने के बावजूद वाईएसआरसीपी ने आंध्र प्रदेश में बीजेपी से दूरी बना रखी है।

इंडियन नेशनल लोकदल

इंडियन नेशनल लोकदल को लेकर खबर है कि यह पार्टी हरियाणा में बीजेपी और कांग्रेस के खिलाफ तीसरा मोर्चा तैयार करने की कोशिश में है। हालांकि पार्टी पहले दो मौकों पर एनडीए का हिस्सा रह चुकी है।

ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन

हैदराबाद में सात विधायक और लोकसभा में एक सांसद वाली ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने भी दोनों में से किसी बैठक में हिस्सा नहीं लिया।फिलहाल यह दल बीजेपी और कांग्रेस दोनों पर ही निशाना साधाती नजर आ रही है।

ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट

असम में बड़े स्तर पर मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट बीजेपी की नीतियों की विरोधी रही है, लेकिन पार्टी विपक्ष की बैठक में भी शामिल नहीं रही ।माना जा रहा है कि इसकी वजह कांग्रेस से दूरी भी हो सकती है। 2021 में साथ में विधानसभा चुनाव लड़ने के बाद से ही दोनों दलों में तल्खी का दौर जारी है।

 

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