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राहुल गांधी अब जेल जाएंगे या हाईकोर्ट से मिलेगी उन्हें बेल,क्या बहाल होगी उनकी सांसदी ?

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बीरेंद्र कुमार झा

20 अप्रैल की सुबह करीब सवा 11 बजे सूरत सेशन कोर्ट ने ‘मोदी सरनेम’ बयान से जुड़े मानहानि केस में दोषी ठहराए जाने के खिलाफ राहुल गांधी की याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद राहुल गांधी से जुड़े कई सवाल लोगों के मन में उठने लगे। जैसे- राहुल गांधी जेल जाएंगे या उन्हें हाईकोर्ट से बेल मिल जायेगी ? क्या राहुल 2024 और 2029 का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे? कुछ सवाल और उसके जबावों के जरिए समझते हैं कि इस केस में अब आगे क्या होगा

सवाल 1: मानहानि का दोषी ठहराने पर रोक लगाने की याचिका खारिज होने के बाद क्या राहुल अब गिरफ्तार होंगे?

जवाब: नहीं, इसकी संभावना नहीं है।इस मामले में राहुल गांधी के वकील आरएस चीमा का कहना है कि अभी राहुल गांधी की गिरफ्तारी का कोई सवाल ही नहीं है। 23 मार्च को मानहानि केस में राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाने के साथ ही 30 दिन की जमानत दी गई थी। इन्हीं 30 दिनों के अंदर राहुल को ऊपरी अदालत में अपील करना था।हमने 3 अप्रैल को सूरत के सेशन कोर्ट में इस फैसले के खिलाफ अपील की। इसके साथ सजा पर रोक लगाने और दोषी ठहराने पर रोक लगाने की भी अपील की। इसी दिन सेशन कोर्ट ने राहुल 7गांधी को अपील करने के लिए अंतरिम जमानत दे दी। ऐसे में जब तक ऊपरी अदालतों में ये मामला चलेगा, तब तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सकता।

निचली अदालत के फैसले के खिलाफ सूरत सेशन कोर्ट में राहुल गांधी ने 3 याचिकाएं दायर की थीं…

1. मुख्य याचिका: CJM कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। इस पर 3 मई को सुनवाई होगी।

2.दूसरी याचिका: दो साल की सजा पर रोक की मांग की गई। 3 अप्रैल को कोर्ट ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए राहुल को अंतरिम जमानत दे दी।

3. तीसरी याचिका: दोषी ठहराए जाने पर रोक यानी कन्विक्शन पर स्टे की मांग की गई थी। 20 अप्रैल को सूरत की सेशन कोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी।

सवाल 2: दोषी ठहराए जाने पर रोक लगाने की याचिका खारिज होने से राहुल को क्या नुकसान होगा?

जवाब: राहुल गांधी की सांसदी फिलहाल बहाल नहीं होगी। लोक प्रहरी बनाम चुनाव आयोग के केस में सुनाए गए फैसले के मुताबिक, राहुल गांधी तब तक दोबारा से सांंसद नहीं बन सकते, जब तक उन्हें दोषी ठहराए जाने पर रोक नहीं लगती। यानी उनके लिए कन्विक्शन स्टे जरूरी है। अब राहुल गांधी के पास ऊपरी अदालत में अपील का ही विकल्प है।

सवाल 3: हाईकोर्ट में राहुल गांधी इस फैसले के खिलाफ कब अपील करेंगे?

जवाब: राहुल गांधी के वकील आरएस चीमा का कहना है कि हाईकोर्ट में अपील कब करेंगे, ये राहुल को तय करना है।हालांकि कांग्रेस पार्टी के नेता जयराम रमेश ने कहा है कि 21 अप्रैल को हम हाईकोर्ट का रुख करेंगे। राहुल गांधी की तरफ से दोषी ठहराए जाने पर रोक यानी कन्विक्शन पर स्टे के लिए अपील की जा सकती है।

सवाल 4: दोषी ठहराए जाने पर स्टे नहीं मिला तो क्या राहुल 2024 का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे?

जवाब: ‘रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपुल्स एक्ट 1951’ की धारा 8 (3) के तहत अगर सांसद या विधायक को किसी अपराध में 2 साल या इससे ज्यादा की सजा सुनाई जाती है, तो उसकी सदस्यता खत्म हो जाती है। वह 2 साल की सजा काटने के बाद 6 साल बाद तक चुनाव भी नहीं लड़ पाएगा।

ऐसे में राहुल गांधी के दोषी ठहराए जाने पर स्टे नहीं लगाया जाता है तो वह 8 साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। यानी राहुल गांधी सिर्फ 2024 में ही नहीं, बल्कि 2029 में होंने वाले आम चुनाव में भी प्रत्याशी के रूप में सीधे चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।

सवाल 5: अगर हाईकोर्ट ने दोषी ठहराए जाने पर स्टे लगा दिया तो राहुल कब तक सांसद बनेंगे?

जवाब: हाईकोर्ट में राहुल गांधी की दोषसिद्धि यानी कन्विक्शन पर स्टे लगता है तो उनकी सांसदी बहाल हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में लोक प्रहरी बनाम यूनियन ऑफ इंंडिया के केस में कहा था कि जिस दिन दोषी ठहराए जाने पर स्टे लगाया जाएगा, उसी दिन से सांसदी बहाल की जा सकती है। इसके लिए उन्हें लोकसभा सचिवालय में अपील करनी होगी।

सवाल 6: अगर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से भी सजा बरकरार रहती है, तो क्या राहुल गांधी कभी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे?

जवाब: नहीं, ऐसा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट भी सजा बरकरार रखती है तो राहुल गांधी को 2 साल जेल में रहना पड़ सकता है। रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपुल्स एक्ट 1951 की धारा 8 (3) के तहत राहुल रिहाई के 6 साल बाद तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। यानी लगभग 8 साल तक राहुल चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। राहुल गांधी दो आम चुनाव यानी 2024 और 2029 लोकसभा चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।

सवाल 7: राहुल अपने बचाव में हाईकोर्ट में क्या दलीलें दे सकते हैं?

जवाब: राहुल अपने बचाव में हाईकोर्ट में वही 4 दलीलें दे सकते हैं जो उन्होंने सूरत सेशन कोर्ट में दी थी…

दलील 1: राहुल ने अपनी स्पीच में जिनका नाम लिया, उनमें पूर्णेश मोदी का नाम नहीं है तो फिर मानहानि कैसी?

सबसे पहले जानते हैं कि राहुल ने 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान कर्नाटक के कोलार की रैली में क्या शब्द इस्तेमाल किए थे-

‘…नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, विजय माल्या, अनिल अंबानी और नरेंद्र मोदी। चोरों का ग्रुप है। आपके जेबों से पैसे लेते हैं… किसानों, छोटे दुकानदारों से पैसा छीनते हैं। और उन्हीं 15 लोगों को पैसा देते हैं। आपको लाइन में खड़ा करवाते हैं। बैंक में पैसा डलवाते हैं और ये पैसा नीरव मोदी लेकर चला जाता है। 35,000 करोड़ रुपए। मेहुल चोकसी, ललित मोदी… अच्छा एक छोटा सा सवाल है। इन सब चोरों के नाम मोदी-मोदी-मोदी कैसे हैं? नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी और अभी ढूंढेंगे तो और मोदी निकलेंगे।…’

यहां पर राहुल के खिलाफ मानहानि का केस न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, न ही नीरव मोदी, न ही ललित मोदी ने किया है। राहुल के खिलाफ मानहानि का केस सूरत से BJP विधायक पूर्णेश मोदी ने किया है।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील विराग गुप्ता कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2022 में मनोज तिवारी के खिलाफ आपराधिक मानहानि के मामले को खारिज करते हुए कहा था कि धारा 499 के तहत आरोप लगाने के लिए पीड़ित व्यक्ति की स्पष्ट और सीधी मानहानि होनी चहिए।

राहुल की स्पीच में नीरव, ललित और नरेंद्र मोदी के नाम थे, इसलिए विधायक पूर्णेश मोदी की मानहानि होने और उनके दायर मुकदमे की वैधता पर भी सवाल है।

मानहानि के मामले में किसी खास व्यक्ति के सम्मान को ठेस पहुंचाने का आरोप स्पष्ट होना चाहिए। आमतौर पर की गई टिप्पणी या बड़े दायरे को समेटने वाली टिप्पणी को इसमें शामिल नहीं किया जा सकता।

राहुल का ये बयान ठीक वैसा ही है, जैसा लोग आम बोलचाल में बोल देते हैं कि नेता तो भ्रष्ट होते हैं। ऐसे में अगर कोई नेता देश की किसी कोर्ट में जाकर मुकदमा कर दे कि इससे मेरी मानहानि हुई है, तो इसे मानहानि नहीं कहा जा सकता। राहुल गांधी की तरफ से कोर्ट में ये सबसे मजबूत दलील दी जा सकती है।

दलील 2 : कर्नाटक के कोलार में स्पीच दी, केस सूरत में क्यों दर्ज हुआ?
विराग गुप्ता कहते हैं कि CrPC की धारा 202 के तहत आपराधिक मामलों में मजिस्ट्रेट का क्षेत्राधिकार तय होता है। राहुल ने मोदी सरनेम वाली स्पीच कर्नाटक के कोलार में दी। सवाल यह है कि यह मामला फिर सूरत की सीजेएम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में कहां से आ गया?

ओबीसी की सेंट्रल लिस्ट में बिहार और गुजरात में मोदी नाम की कोई जाति नोटिफाई नही है। इसलिए राहुल के बयान को ओबीसी के खिलाफ मानना भी मुश्किल है। अगर इस कसौटी पर केस परखा गया तो राहुल को राहत मिलने की उम्मीद है।

दलील 3 : क्या राजनीतिक बयानबाजी को अपराध के दायरे में लाया जा सकता है?
विराग कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने 1965 के कुलतार सिंह मामले में कहा था कि राजनीतिक बयानबाजी के मामलों को अपराध के दायरे में लाने से बचना चाहिए।

168 पेज के गुजराती में दिए फैसले में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का जिक्र तो है, लेकिन फिर भी राहुल गांधी के मामले को अपराध के दायरे में लाया गया।

मानहानि के मामले में आपराधिक मुकदमा चलाने के लिए, जैसा कि इस केस में हुआ है, बदनीयती और द्वेष की भावना सिद्ध करना जरूरी है।

दलील 4 : पहली बार के अपराध में अधिकतम सजा मिल जाना
राहुल के खिलाफ आपराधिक मानहानि के 10 और मामले चल रहे हैं। हालांकि किसी और मामले में उन्हें अभी तक सजा नहीं हुई है।

इसलिए पहले अपराध में अधिकतम 2 साल की सजा दिए जाने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में यदि बड़ी कोर्ट एक दिन की सजा भी कम कर देती है तो राहुल की संसद सदस्यता बहाल हो जाएगी।

 

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