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Whatsapp ऐसा क्‍या कर रहा जिस पर भड़क गई देश की सर्वोच्‍च अदालत,

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को Meta और WhatsApp को जबरदस्त फटकार लगाई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि भारतीयों के निजी डेटा का गलत इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। Meta और WhatsApp को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने आज यह तक कह दिया कि वह संविधान का पालन नहीं कर सकते, तो देश से जा सकते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर WhatsApp को किस मामले में इतनी कड़ी फटकार पड़ी है। दरअसल यह मामला WhatsApp की पॉलिसी से जुड़ा है। जिस पर CCI ने WhatsApp पर 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। चलिए डिटेल में जानते हैं कि आखिर किस वजह से आज Meta और WhatsApp को सुप्रीम कोर्ट से लताड़ खानी पड़ी है।

सुप्रीम कोर्ट में चल रहा WhatsApp का मामला 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़ा है। इस पॉलिसी अपडेट में WhatsApp यूजर्स की डिटेल्स को Meta के साथ शेयर करने की बात कही गई थी। WhatsApp ने यूजर्स को इस पॉलिसी स्वीकार न करने का कोई ऑप्शन नहीं दिया था। इस मामले को CCI ने ‘प्रभुत्व के गलत इस्तेमाल’ का मामला मानते हुए WhatsApp पर 213.14 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया था। जनवरी 2025 में NCLAT ने निष्कर्ष से एकाधिकार के गलत इस्तेमाल वाली बात को हटा लिया लेकिन जुर्माने को बरकरार रखा। इस विरोधाभास के खिलाफ Meta ने सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।

रिपोर्ट्स के मुताबित मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने ऑप्ट आउट के ऑप्शन पर सवाल उठाते हुए Meta और WhatsApp से पूछा है कि बाजार में किसी दूसरे ऑप्शन के न होने के चलते, यूजर के पास आपकी पॉलिसी को स्वीकार न करने का ऑप्शन कहां बचता है? कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि आप देश की गोपनीयता के अधिकार के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते। सीजेआई ने Meta और WhatsApp को लताड़ लगाते हुए कहा है कि अगर आप इस देश के संविधान को नहीं मान सकते, तो देश छोड़ दें। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि जब तक कंपनियां डेटा का इस्तेमाल न करने का हलफनामा नहीं देतीं, तब तक सुनवाई आगे नहीं बढ़ेगी।

रिपोर्ट्स के अनुसार सुनवाई के दौरान CJI ने अपना अनुभव शेयर करते हुए बताया कि अगर WhatsApp पर डॉक्टर को बीमारी का मैसेज भेजा जाता है, तो तुरंत विज्ञापनों की बौछार शुरू हो जाती है। हालांकि व्हाट्सएप के वकीलों ने दावा किया कि मैसेज एंड-टू-एंड एनक्रिप्टेड होते हैं, लेकिन कोर्ट ने यूजर्स के डेटा को लेकर लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। रिपोर्ट्स की मानें, तो कोर्ट ने Meta से कहा कि उनकी पॉलिसी गुमराह करने वाली है। कोर्ट के मुताबिक पॉलिसी को समझना हमारे लिए भी कभी-कभी मुश्किल हो जाता है, ऐसे में एक गरीब बुजुर्ग महिला, सड़क किनारे वेंडर या सिर्फ तमिल बोलने वाली महिला उसे क्या समझेगी? फिलहाल Meta को अपनी गतिविधियों और डेटा सुरक्षा पर एक हलफनामा दाखिल करना होगा, जिसके बाद अगले सोमवार को सुनवाई होगी।

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