दिल्ली हाईकोर्ट में एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि अंगमो की याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में दिल्ली पुलिस के उस एक्शन को चुनौती दी, जिसके तहत उन्हें जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध-प्रदर्शन से सफदरजंग अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया। वांगचुक वहां 20 दिनों से ज्यादा समय से भूख हड़ताल पर थे।सफदरजंग अस्पताल पर भरोसा न जताते हुए, गीतांजलि अंगमो ने उन्हें किसी प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने के लिए निर्देश देने की मांग की है। दिल्ली HC ने सोनम को दूसरे अस्पताल में भर्ती कराने का आदेश देने से इनकार किया। इस मामले में अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी।
कोर्ट ने कहा कि अभी इस मामले में किसी अंतरिम आदेश की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने सोनम की पत्नी की याचिका पर नोटिस जारी किया और साथ ही तीन दिन में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के आदेश दिए। इसके अलावा कोर्ट ने सोनम वांगचुक से भी इलाज में डॉक्टरों से सहयोग करने की बात कही। कोर्ट ने ये भी कहा कि वांगचुक की पत्नी, भाई और रिश्तेदार को उनसे मिलने की पूरी इजाजत दी गई है।उनके लिए अलग कमरा भी उपलब्ध कराया गया है।
वांगचुक की पत्नी ने कहा कि सफदरजंग अस्पताल से उनका भरोसा उठ गया है।उन्होंने दावा किया कि अस्पताल प्रशासन ने उन्हें बताया था कि वांगचुक का पोटैशियम लेवल गिरकर 2.9 हो गया है, जिसे उन्होंने चिंताजनक और जानलेवा बताया। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल के पब्लिक हेल्थ बुलेटिन में असल आंकड़ा नहीं बताया गया और सिर्फ पोटैशियम लेवल घटने की बात कही गई।उन्होंने यह भी दावा किया कि एक स्वतंत्र लैब टेस्ट में वांगचुक का पोटैशियम लेवल 3.5 पाया गया, जिसे उन्होंने नॉर्मल रेंज में बताया।
वकील कपिल सिब्बल गीतांजलि अंगमो की ओर से पेश हुए।उन्होंने पिछले आदेश की जानकारी दी. सिब्बल ने मांग की सफदरजंग अस्पताल में सबसे बड़ी समस्या यह है कि वांगचुक को अपने डॉक्टरों और वकीलों से मिलने की इजाजत नहीं है।हमें उनकी स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल रही।उन्होंने कहा कि हमने फैसला किया है कि सोनम को अस्पताल से छुट्टी दे दी जाए। हम चाहते हैं कि उनका इलाज हमारी पसंद के डॉक्टर और अस्पताल में हो।
कोर्ट में सोनम वांगचुक का पक्ष रख रहे वकील कपिल सिब्बल ने एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल में शिफ्ट करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि हमने मेदांता अस्पताल में बात कर ली है।हम मेंदाता अस्पताल में उनका इलाज करवाना चाहते है। उन्होंने कहा कि उन्हें डिस्चार्ज करने की मांग की जा रही है। उनका आरोप है कि वांगचुक के अपने डॉक्टरों और कानूनी टीम को उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा है और उन्हें यह भी नहीं पता कि कौन सा इलाज बताया जा रहा है।
वहीं कोर्ट ने सरकार की ओर से पेश ASG चेतन शर्मा से पूछा कि क्या ऐसी कोई गंभीर हालात थी, जिसकी वजह से सोनम को अस्पताल ले जाना जरूरी हो गया था। ASG ने जवाब दिया कि हां. उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी। वे 18 दिनों से भूख हड़ताल पर थे. उमस भरे मौसम में लंबे समय तक उपवास करने से शरीर में पानी की कमी हो गई थी। शरीर ऊर्जा के लिए ही चर्बी जलाने लगता है।
ASG ने बताया की कोर्ट के पिछले आदेश के मुताबिक ऐसी स्थिति में सरकार को कदम उठाना जरूरी था। ASG ने कहा कि सोनम की मौजूदा हालात हालत अभी स्थिर है। उन्होंने कहा कि वांगचुक ने पहले आईवीनड्रिप लेने से इनकार किया था, लेकिन बाद में इसके लिए मंजूरी दे दी।
कोर्ट ने पूछा कि क्या उन्हें यह इलाज उनकी मर्जी से दिया गया था? ASG ने जवाब दिया हां। उन्होंने सिर्फ इतना पूछा था कि क्या शुगर-फ्री दवा उपलब्ध है। ASG ने कहा कि HC की डिवीजन बेंच और SC के आदेशों को देखते हुए पूरी सावधानी बरतनी होगी। अगर वे इलाज से इनकार भी करें, तब भी जितना जरूरी इलाज जरूरी होगा, उसका फैसला एक्सपर्ट डॉक्टरों पर छोड़ना चाहिए।
ASG चेतन शर्मा ने कहा कि देश के किसी भी दूसरे नागरिक के तर्ज पर उन्हें भी डॉक्टरों के इलाज पर भरोसा रखना चाहिए।उनका पूरा ख्याल रखा जा रहा है।मगर उन्हें भी डॉक्टरों के साथ सहयोग करना चाहिए। वहीं वकील कपिल सिब्बल लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि सोनम को उनकी मर्जी के अस्पताल में इलाज करने का अधिकार है।
सोनम वांगचुक अभी सफदरजंग अस्पताल में रहेंगे।उन्हें मेंदाता अस्पताल में शिफ्ट करने का निर्देश देने की मांग वाली उनकी पत्नी गीतांजलि अगमो की मांग दिल्ली हाईकोर्ट ने ठुकरा दी ।कोर्ट ने कहा अभी इस स्टेज पर कोई अंतरिम आदेश देने की जरूरत नहीं है।
ASG चेतन शर्मा ने कहा कि देश के किसी भी दूसरे नागरिक के तर्ज पर उन्हें भी डॉक्टरों के इलाज पर भरोसा रखना चाहिए।उनका पूरा ख्याल रखा जा रहा है। मगर उन्हें भी डॉक्टरों के साथ सहयोग करना चाहिए। वहीं वकील कपिल सिब्बल लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि सोनम को उनकी मर्जी के अस्पताल में इलाज करने का अधिकार है।

