न्यूज़ डेस्क
मोदी सरकार को आज बड़ा झटका लगा। वक्फ विधेयक पर मोदी सरकार को इस तरह के झटके का अनुमान नहीं था। इससे पहले मोदी सरकार जो भी चाहती थी वह कर लेती थी लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। लोकसभा में आज वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 विपक्ष के भारी विरोध के बाद इसे विस्तृत समीक्षा के लिए संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया गया।
बता दें कि अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने वक्फ बोर्डों को नियंत्रित करने वाले कानून में संशोधन से संबंधित विधेयक पेश करने की अनुमति का प्रस्ताव रखा। लेकिन कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों ने इस विधेयक को संविधान के विभिन्न प्रावधानों के विरुद्ध और मुसलमानों के धार्मिक मामलों में दखल देने का प्रयास मानते हुए इसका पुरजोर विरोध किया।
विपक्ष ने अध्यक्ष ओम बिरला से नियम 72 के तहत विधेयक को पेश करने से पहले बहस कराने की मांग की जिसे अध्यक्ष ने स्वीकार किया। पक्ष और विपक्ष के तमाम सदस्यों की राय सुुनने के बाद रिजिजू ने कहा कि इसको लेकर विपक्ष के सदस्य जो विरोध कर रहे हैं वह राजनीतिक दबाव में हो रहा है लेकिन सच यह है कि यह विधेयक सबके हित में है और इससे वक्फ संपत्ति में गरीब मुसलमानों का हित साधा जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि 90 हजार से ज्यादा मामले वक्फ बोर्ड में लंबित हैं और इन सब विषमताओं को देखते हुए और लोगों को न्याय देने के लिए यह विधेयक लाया गया है। नये विधेयक में छह माह में मामले के निस्तारण का समय तय किया गया है।
उन्होंने कहा कि विधेयक में किए प्रावधान से संविधान के किसी अनुच्छेद का उल्लंघन नहीं किया गया है और इसमें किसी का हक नहीं छीना जा रहा है। इसमें जिनको सदियों से हक नहीं दिया गया है उन्हें हक दिया गया है। विधेयक में वक्फ बोर्ड के लिए महिलाओं की सदस्यता को अनिवार्य किया गया है और इसमें हर मुस्लिम वर्ग की महिलाएं शामिल होंगी।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पहली बार यह विधेयक नहीं लाई है। सरकार 1995 में जो वक्फ विधेयक लेकर आई थी वह कानून अपने मकसद में सफल नहीं रहा है। विधेयक जिस उद्देश्य के लिए लाया गया था उसमें पूरी तरह से विफल रहा है।
उन्होंने कहा कि नया बिल बहुत विचार कर लाया गया है और इस बिल का सभी को समर्थन करना चाहिए क्योंकि करोड़ों लोगों को इंसाफ नहीं मिल रहा है। इस बिल का विरोध करने से पहले करोड़ों गरीब मुसलमानों के बारे में सोचिए तब इसका विरोध कीजिए। इस मुद्दे पर कई कमेटियां बनी थी इसको लेकर वक्फ इक्वरी रिपोर्ट पेश की गई थी। सारी वक्फ संपत्ति को व्यवस्थित करने की जरूरत है। इसके लिए एक न्यायाधिकरण हो तथा ऑडिट और अकाउंट की व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वक्फ पर दो कमेटी कांग्रेस के समय में बनी थी। सच्चर समिति ने कहा कि जितना वक्फ बोर्ड की संपत्ति है इससे बहुत कम पैसा आ रहा है यह गलत है और अगर सही तरीके से इस संपत्ति का संचालन ठीक हो तो 12 हजार करोड सालाना मिल सकता है।
सच्चर कमेटी ने कहा कि वक्फ बोर्ड में विशेषजों को लाने की जरूरत है और उसके पैसे का राजस्व का रिकार्ड होना चाहिए। उन्होंने कहा कि नये कानून में पूरी तकनीकी का इस्तेमाल कर विधेयक को लाया गया है और वक्फ संपत्ति सबकी संपत्ति बने और उसका दुरुपयोग नहीं हो इसका पूरा ध्यान रखते हुए विधेयक लाया गया है। नये बोर्ड में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अनिवार्य किया गया है और मुसलमानों में सभी वर्गों को इसमें रखा गया है।
उन्होंने कहा कि पहले के कानून में यह प्रावधान था कि यदि आपने अपनी जमीन के लिए हक की बात नहीं की तो उस जमीन पर कब्जा कर लिया जाता है। किसी जमीन को लेकर यह कहा जाता कि इस जमीन पर किसी के परिजनों ने नमाज पढी है तो वह जमीन वक्फ बोर्ड 1995 के कानून के तहत अपने कब्जे में ले लेता था और यह इस कानून की बहुत बड़ी खामी है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार यह संशोधन विधेयक लेकर अचानक नहीं आई है। मुसलमानों के सभी वर्गों से इस बारे में विचार किया गया है और संसद के कई सदस्य निजी स्तर पर मानते हैँ कि इस विधेयक के लाने से वक्फ का भ्रष्टाचार रुकेगा। वक्फ बोर्ड की समस्याओं पर व्यापक स्तर पर विचार विमर्श हुआ है और उसके बाद विधेयक तैयार किया गया है। हर राज्य से शिया, सुन्नी, अहमदिया, बोहरा, आगाखानी तथा अन्य मुस्लिम तबकों के साथ विचार कर यह विधेयक लाया गया है।
उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड की हालत यह है कि तमिलनाडु के एक गांव का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है लेकिन बोर्ड ने पूरे गांव को ही वक्फ बोर्ड की संपत्ति घोषित कर दिया और गांव के लोग अपने पूर्वजों की जमीन से बेदखल हो गये। उनका कहना था कि सवाल किसी धर्म विशेष का नहीं है बल्कि यह गलत को सही करने का कानूनी प्रयास है और इस विधेयक के पारित होने से इस तरह के अन्याय को रोका जा सकेगा। कर्नाटक वक्फ बोर्ड का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां करोड़ों की संपत्ति को वाणिज्यिक काम के लिए बदल दिया है। इस तरह की मनमानी को रोकने के लिए सरकार यह विधेयक लाई है।
कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक, माकपा, भाकपा, वाईएसआर कांग्रेस आदि पार्टियों ने जहां विधेयक का विरोध किया, वहीं सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल जनता दल यूनाइटेड, तेलुगु देशम और शिवसेना ने इस विधेयक का समर्थन किया। शिवसेना के श्रीकांत एकनाथ शिंदे ने विपक्ष पर जोरदार हमला करते हुए कहा कि जो देश की व्यवस्थाओं को जाति एवं धर्म के आधार पर चलाना चाहते हैं, उन्हें शर्म आनी चाहिए। इस विधेयक का मकसद पारदर्शिता एवं जवाबदेही लाना है लेकिन संविधान पर भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस के के सी वेणुगोपाल ने कहा कि यह विधेयक संविधान विरोधी है और एक समुदाय के हितों को नुकसान पहुंचाने वाला है। उन्होंने कहा कि संविधान में हर समुदाय को अधिकार है अपनी धार्मिक, चैरिटेबल आधार पर चल अचल संपत्ति रखे। इस विधेयक में वक़्फ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने की बात कही गयी है। उन्होंने सवाल किया कि क्या अयोध्या के श्रीरामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास में गैर हिन्दू हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार पर आक्रमण है और संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकारों का अतिक्रमण है।
समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने कहा कि यह विधेयक सोची समझी राजनीति से लाया गया है। जब वक्फ़ बोर्ड में सदस्यों को लोकतांत्रिक ढंग से चुने जाने की व्यवस्था है तो मनोनयन क्यों करने की जरूरत है। क्यों गैर बिरादरी का व्यक्ति बोर्ड में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि भाजपा हताश, निराश चंद कट्टरपंथियों को खुश करने के लिए ये विधेयक लायी है। इसके बाद श्री यादव ने कहा कि ये विधेयक इसलिये लाया गया है कि ये अभी अभी हारे हैं।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सुप्रिया सुले ने कहा कि सरकार को विधेयक को वापस लेना चाहिए या किसी समिति को भेजना चाहिए। लेकिन इस विधेयक को सबसे पहले मीडिया को बताया गया फिर सांसदों को। यह संसद का अपमान है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में वक्फ अधिनियम के कई धाराओं को समाप्त करने का प्रस्ताव है और वक्फ पंचाट को भी कमजाेर किया गया है। उन्होंने कहा कि हर देश में अल्पसंख्यकों को सुरक्षित रखा जाता है। आखिर ऐसा क्या है कि इस विधेयक को अभी लाना है।
रेवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के एन के प्रेमचंद्रन नेे कहा कि यह विधेयक सेकुलरिज़्म के खिलाफ है। वक्फ का एकमात्र मकसद चल अचल संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन करना है। इस विधेयक के पारित हाेने से वक्फ बोर्ड शक्तिहीन हो जाएगा। उन्होंने कहा कि वह सरकार को और इस सदन को आगाह करना चाहते हैं कि यदि नया कानून संवैधानिक विवेचना के लिए उच्चतम न्यायालय गया तो वहां यह खारिज कर दिया जाएगा।

