न्यूज़ डेस्क
एक तरफ देश में चुनावी हवा चल रही है और देश के सभी नेता चुनावी प्रचार में व्यस्त हैं वही मणिपुर में फिर से हिंसा भड़कने से हाहाकार मचा हुआ है। मणिपुर में हिंसा रोकने की जिम्मेदारी राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार की है लेकिन सरकार के लोग चुनावी खेल में व्यवस्त है। प्रधानमंत्रो मोदी हर मुद्दों पर बोलते हैं लेकिन मणिपुर पर नहीं बोलते। अभी तक उन्होंने मणिपुर का दौरा भी नहीं किया है। इस खेल के बारे में क्या सच है यह कौन जानता है ?
मणिपृर फिर से हिंसा की आग में झुलसने लगा है। कुछ दिनों थी लेकिन आज जल उठे और कई राउंड की गोलिया भी चल गई। जानकारी के मुताबिक राज्य के इंफाल वेस्ट जिले में दो घरों में आग लगा दी गई। इसके अलावा इस दौरान कई राउंड गोलीबारी की गई है।कहा जा रहा है कि कई लोग घायल भी हुए हैं।
पुलिस ने कहा कि मामला बुधवार रात करीब 10 बजे पटसोई पुलिस थाना क्षेत्र के न्यू कीथेलमनबी का है। हमले के बाद आरोपी मौके से तुरंत भाग गया। पुलिस ने आगे कहा कि हमने फायर सर्विस के साथ मिलकर तुरंत आग पर काबू पा लिया।
खबर के मुताबिक, पुलिस ने जानकारी दी कि पूरे मामले के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई थी, लेकिन अब नियंत्रण में है। उन्होंने बताया कि घटना के बाद इलाके में इकट्ठा हुईं मैतेई समुदाय की महिलाओं को सुरक्षा बलों ने आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके अलावा एरिया में स्थिति संभालने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया है।
मणिपुर में मई से हिंसा जारी है। राज्य में अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मैतेई समुदाय की मांग के विरोध में जनजातीय एकजुटता मार्च के बाद तीन मई को जातीय हिंसा भड़क गई थी। हिंसा की घटनाओं में अब तक 180 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। साथ ही कई लोगों को विस्थापित भी होना पड़ा। इसके अलावा कई लोगों के घर जला दिए गए।
मणिपुर की आबादी में मैतेई समुदाय के लोगों की जनसंख्या लगभग 53 प्रतिशत है। वे ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं। वहीं, नगा और कुकी आदिवासियों की आबादी करीब 40 प्रतिशत है और वे ज्यादातर पर्वतीय जिलों में रहते हैं। पूरे मामले को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है।

