बांदा (राजीव द्विवेदी): उत्तर प्रदेश में पराली जलाने वाले किसानों को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। पराली समस्या वाले जिलों का प्रशासन किस कदर सतर्क है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ऐसी गतिविधियों पर सेटेलाइट से नजर रखी जा रही है। उधर, खेत में धुआं उठते देर नहीं होती इधर मुख्यालय से रिपोर्ट मिलते ही प्रशासनिक अमला जुर्माना वसूलने पहुंच जाता है।
सेटेलाइट से कैसे रखी जा रही है नजर ?
अकेले बांदा जिले में ही एक दिन में पराली जलाने वाले डेढ़ दर्जन से अधिक किसानों पर कार्रवाई की गई है। सभी किसानों से 67,500 रुपये का जुर्माना वसूला गया। सेटेलाइट में कुल 21 किसानों की तस्वीरें सामने आयीं, जिसमें 16 किसानों के पराली जलाने कि पुष्टि हुई और 5 मामले कूड़ा जलाने के पाए गए। पराली जलाने वाले किसानों से 67,500 की रकम जुर्माने के रूप में वसूली गई।
NHRC की फटकार के बाद जागा प्रशासन
दरअसल, कुछ दिन पहले एयर क्वालिटी इंडेक्स के मामले में सबसे बदतर स्थिति तक पहुंच चुकी राजधानी दिल्ली की आबोहवा बेहद खराब हो गई थी। हालात यह हो गए थे कि दिल्ली के कई इलाके गैस चैंबर में तब्दील हो गए थे। जिसके बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा। आयोग ने पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और यूपी के मुख्य सचिवों को अपने सामने बुलाकर कड़ी फटकार लगाई थी।
खुफिया जांच से किसान अनजान
NHRC की फटकार के बाद से ही यूपी का प्रशासनिक अमला बेहद सतर्क नजर आ रहा है। पराली जलाने के मामलों पर आसमान से नजर रखी जा रही है। सेटेलाइट से जानकारी मिलते ही अधिकारी जांच के लिए पहुंच जाते हैं और इस खुफिया तहकीकात से अनजान किसानों में हड़कंप मच जाता है।
जुर्माने के साथ जागरूकता कार्यक्रम भी
उपकृषि निदेशक विजय कुमार ने बताया कि बांदा में सेटेलाइट के माध्यम से 21 किसानों की तस्वीरें सामने आयी हैं, जिसमें जांच के बाद 16 किसानों में पराली जलाने और शेष 5 के कूड़ा जलाने की पुष्टि हुई है। उन्होंने आगे बताया कि सभी किसानों पर प्रशासन द्वारा 67,500 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही पराली न जलाने को लेकर किसानों को विभिन्न माध्यम से जागरूक किया जा रहा है।

