बिहार में राजनीतिक चर्चा के केंद्र बिंदु में उपेंद्र कुशवाहा,बनेंगे उप मुख्यमंत्री!

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न्यूज डेस्क: बिहार की सियासत में अभी अक्सर माहौल बनते बिगड़ते रहता है। कभी कोई नेता चर्चा के केंद्रबिंदु में आ जाता है तो कभी कोई और नेता। महागठबंधन के नेताओं का दावा है कि वहां सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा है,लेकिन आरजेडी और जेडीयू के नेताओं की बयानबाजी कुछ अलग ही संकेत देते रहता है। इधर मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा भी जोरों पर है। इस मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा में जो बड़ा सवाल उठ रहा है, वह है, क्या बिहार में अब दो उपमुख्यमंत्री होंगे और तेजस्वी के बाद क्या दूसरा उपमुख्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा होंगे?

उपेंद्र कुशवाहा की इस पर प्रतिक्रिया

बिहार में उपमुख्यमंत्री बनने की चर्चा को उपेंद्र कुशवाहा ने भी यह कह कर थोड़ी गति प्रदान कर दी कि वे कोई सन्यासी नहीं है और ना ही किसी मठ में बैठे हैं। उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा सुनकर उन्हें अच्छा लग रहा है। हम अपनी ओर से मंत्री या उपमुख्यमंत्री बनने का कोई डिमांड नीतीश कुमार से नहीं कर रहे हैं। इन विषयों पर निर्णय लेना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का काम है। यदि सरकार का विस्तार होना है और मंत्रिमंडल में किसी को लाना है, किसी को नहीं लाना है तो यह फैसला नीतीश कुमार ही लेंगे। फिलहाल में संगठन का काम कर रहा हूं और जैसा भी हूं ठीक हूं।

उपेन्द्र कुशवाहा की सियासत

गौरतलब है कि उपेंद्र कुशवाहा सियासत में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुराने दिनों के साथ ही रहे हैं।उन्होंने जेडीयू से अलग होकर राष्ट्रीय लोक समता पार्टी नाम की अपनी पार्टी बनाई थी, लेकिन बाद में उन्होंने इसका विलय जेडीयू में ही करा दिया था। वर्तमान में वे अभी जेडीयू संसदीय बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। मंत्री पद को लेकर पहले भी उपेंद्र कुशवाहा सुर्खियों में रहे हैं।

नीतीश कुमार के नेतृत्व में महागठबंधन की सरकार और दो उपमुख्यमंत्री

नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल की बात करें तो उन्हें दो-दो उपमुख्यमंत्री के साथ सरकार चलाने का पुराना अनुभव है। नीतीश कुमार ने 2015 में पहली दफा जब आरजेडी के साथ गठबंधन कर अपनी सरकार बनाई थी। तब लालू प्रसाद के दोनो बेटों तेज प्रताप और तेजस्वी को उपमुख्यमंत्री बनाकर उन्होंने सरकार में संतुलन बिठाया था ऐसे में तेजस्वी यादव के एकमात्र उपमुख्यमंत्री रहने से आरजेडी खेमे से बार – बार उठ रहे मुख्यमंत्री बनाने की मांग को निष्क्रिय करने के लिए जेडीयू खेमे से भी एक उपमुख्यमंत्री बनाकर सत्ता संतुलन की साध लें तो आश्चर्य नहीं।

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