बारिश का मौसम आते ही डेंगू के मामले तेजी से बढ़ने लगते हैं. ऐसे समय में टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों को सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों में गंभीर और जानलेवा डेंगू होने का खतरा ज्यादा हो सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि डेंगू प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले डायबिटीज मरीजों को नियमित स्वास्थ्य देखभाल के साथ डेंगू वैक्सीन पर भी ध्यान देना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, हाई ब्लड शुगर की वजह से शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है।इससे डेंगू वायरस शरीर में तेजी से फैल सकता है। ऐसे मरीजों में प्लेटलेट्स काउंट अचानक कम होने, शरीर के अंदरूनी हिस्सों में ब्लीडिंग होने और डेंगू शॉक सिंड्रोम का खतरा भी बढ़ जाता है। शोध में यह भी बताया गया है कि उम्र, मोटापा, किडनी की बीमारी और अनियंत्रित ब्लड शुगर जैसी स्थितियां इस जोखिम को और बढ़ा सकती हैं।
डायबिटीज श्वेत रक्त कोशिकाओं के काम करने की क्षमता को घटा देती है, जिससे संक्रमण से लड़ना मुश्किल होता है।डायबिटीज के मरीजों में डेंगू होने पर डेंगू हीमोडर्जिक फीवर (DHF) या शॉक सिंड्रोम का खतरा बढ़ जाता है। डेंगू से संक्रमण के दौरान ब्लड शुगर का स्तर अचानक बहुत ज्यादा बढ़ सकता है या कम हो सकता है, जो ढंग से इलाज नहीं होने की स्थिति में जानलेवा हो सकता है।
डायबिटीज के मरीज को डेंगू से संक्रमित होने के दौरान बार-बार उल्टी, पेट में तेज दर्द, या मसूड़ों से खून आने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए । बुखार के दौरान उन्हें अपने ब्लड शुगर की जांच बार-बार करते रहना चाहिए ताकि उसके उतार -चढ़ाव को लेकर होने वाली मुश्किलों से बचने का उपाय किया जा सके।

