मणिपुर हिंसा का एक्चुअल कंटेंट जुटाने के लिए  इंडिया के दो दर्जन सांसद कल मणिपुर जायेंगे !

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न्यूज़ डेस्क 
मणिपुर में अभी भी कोई शांति नहीं। हर रोज वहाँ उपद्रव और आगजनी की घटना घट रही है और हिंसक लड़ाई में लोगों की जाने भी जा रही है और लोग घायल भी हो रहे हैं। इधर संसद पिछले सात दिनों से मणिपुर हिंसा को लेकर वाधित है। इंडिया वाले मणिपुर पर चर्चा की मांग कर रहे हैं और प्रधानमंत्री को सदन में लाने की बात कर रहे हैं लेकिन सत्ता पक्ष कुछ भी मानने को तैयार नहीं है।
इधर विपक्ष ने सादाब ने अविश्वास का नोटिस दिया है और उसे स्वीकार भी किया गया है। उम्मीद है कि अगले सप्ताह अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो। इसी बीच विपक्ष के दो दर्जन से ज्यादा सांसद मणिपुर के दौरे पर कल जा रहे हैं। विपक्ष का यह दौरा 29 -30 तक प्रस्तावित है। ये सांसद वहाँ पीड़ितों से मिलेंगे। दरअसल, अगले हफ़्ते लोकसभा में मणिपुर को लेकर लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बहस होने वाली है।             
लगता है- ये सांसद उस बहस के लिए एक्चुअल कंटेंट जुटाने ही जा रहे हैं। ज़ाहिर सी बात है- भाषण में वास्तविकता होगी तो ज़्यादा वजन आएगा। हालाँकि, इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी मणिपुर जाकर लौट आए हैं। राहुल गांधी 29 जून को मणिपुर के चुराचांदपुर पहुंचे थे। उन्होंने रिलीफ कैंप में पीड़ितों से मुलाकात की थी। जिस तरह राहुल की यात्रा में कई अड़ंगे आए थे, इन सांसदों को भी वही सब भुगतना पड़ सकता है। वहाँ जाकर पीड़ितों से मिलना वैसे भी कोई हलवा तो है नहीं। वो भी पहले से घोषणा करके जाएँगे तो राह में मुश्किलें आना तो तय है ही।
                जहां तक मणिपुर और मिज़ोरम के झगड़े की बात है मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने साफ़ कह दिया है कि मिज़ोरम के मुख्यमंत्री हमारे राज्य के मामलों में दखल न ही दें तो अच्छा है। दरअसल पिछले दिनों मिज़ोरम में हुई कुकी समर्थित रैली में खुद मिज़ोरम के मुख्यमंत्री जोरमथंगा भी शामिल हुए थे।
            बीरेन सिंह को इसी का दर्द है। जोरमथंगा का कहना है कि मैं अपने राज्य में कुछ भी करूँ! किस रैली में जाऊँ और क़िसमें नहीं, ये मणिपुर के मुख्यमंत्री कैसे तय कर सकते हैं? दरअसल, मणिपुर में जब से हिंसा हो रही है तब से लगभग तेरह हज़ार कुकी लोग मिज़ोरम जा चुके हैं।
              वैसे भी मिजो आदिवासियों और कुकी समुदाय के बीच पहले से ही गहरे संबंध रहे हैं। म्यांमार के वक्त से ही। हिंसा के भय से व्यक्ति कहीं तो जाएगा! मिज़ोरम में होने वाली किसी रैली से भला बीरेन सिंह को कोई आपत्ति होनी भी क्यों चाहिए? बहरहाल, म्यांमार सीमा से लगे गाँवों में आज भी बमबारी, आगज़नी और गोलीबारी चल रही है।              इसके एक दिन पहले ही मणिपुर के एक अन्य ज़िले में भीड़ ने सुरक्षा बलों की दो बसों में आग लगा दी थी। समस्या एक नहीं है। कई हैं। मैतेई महिलाओं का एक समूह सुरक्षा बलों की कार्रवाई में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। दंगाइयों पर कार्रवाई के लिए सेना या सुरक्षा बल के जवान जैसे ही आगे बढ़ते हैं, हाथों में मशाल लिए हुए इन महिलाओं का समूह दीवार बनकर आगे खड़ा हो जाता है।

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