ट्रैफिक जाम का झंझट खत्म! भारत की पहली उड़ने वाली टैक्सी से उठा पर्दा

0
5

सड़कों पर लगने वाले भारी ट्रैफिक से जल्द ही भारतीय शहरों को राहत मिल सकती है।लोगों को ट्रैफिक जाम का सामना न करना पड़े, इसके लिए आसमान का रास्ता मिलने वाला है।चेन्नई के IIT मद्रास स्थित स्टार्टअप द ईप्लेन कंपनी ने भारत की पहली इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी e200X – PT01 का फुल-स्केल प्रोटोटाइप का अनावरण किया।यह न सिर्फ शहरों के बीच के सफर को मिनटों में समेट देगी, बल्कि भारतीय एविएशन की पूरी तस्वीर बदलने का दम रखती है।
IIT मद्रास के डिस्कवरी कैंपस में स्थित 60,000 वर्ग फुट की नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में इस एयरक्राफ्ट का अनवेलिंग किया गया।

इस फ्लाइंग टैक्सी की खासियत की बात करें तो यह एयरक्राफ्ट हेलीकॉप्टर की तरह सीधे ऊपर उठ सकता है और हवाई जहाज की तरह हवा में उड़ान भर सकता है।इसे उतरने और उड़ान भरने के लिए बास्केटबॉल कोर्ट से आधे आकार की जगह यानी 8×11 मीटर की ही जरूरत पड़ेगी। यानी शहरों में बिना नए वर्टिपोर्ट बनाए, इसे अस्पतालों की छतों और मौजूदा हेलीपैड पर आसानी से लैंड कराया जा सकता है।

यह 2.2 टन वजनी एयरक्राफ्ट एक बार चार्ज होने पर लगभग 110 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है। यानी मुंबई से पुणे या चेन्नई से पुडुचेरी जैसी दूरी मिनटों में तय की जा सकेगी।

इसमें 6 लिफ्ट रोटर्स और 4 फॉरवर्ड प्रोपेलर्स दिए गए हैं। अगर उड़ान के दौरान एक मोटर या पंखा खराब भी हो जाए, तो बाकी के पंखे एयरक्राफ्ट को सुरक्षित संभाल लेंगे।

कंपनी के फाउंडर और IIT मद्रास के प्रोफेसर सत्या चक्रवर्ती के अनुसार, इस एयर टैक्सी का सबसे पहला इस्तेमाल एयर एम्बुलेंस के रूप में किया जाएगा। यह भारी ट्रैफिक के बीच गंभीर मरीजों को मिनटों में एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल पहुंचाने में मदद करेगी। इसके बाद इसे आम यात्रियों के लिए शुरू किया जाएगा। इसमें एक पायलट के साथ 200 किलो तक का पेलोड ले जाया जा सकता है।

सुरक्षा के कड़े मानकों को ध्यान में रखते हुए, एयरक्राफ्ट की शुरुआती टेस्ट फ्लाइट्स बिना पायलट के होगी। प्रोफेसर चक्रवर्ती के अनुसार एडवांस फ्लाय-बाय-वायर तकनीक से अब बिना पायलट के टेस्ट फ्लाइट्स पूरी तरह सेफ है।जब तक एयरक्राफ्ट हर तरह के सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतर जाता, तब तक किसी इंसान को इसमें नहीं बैठाया जाएगा।

इंडिगो के प्रेसिडेंट रह चुके और ईप्लेन के बोर्ड मेंबर आदित्य घोष भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं। उन्होंने बताया कि एयरक्राफ्ट का ग्राउंड टेस्टिंग अगले साल की शुरुआत में शुरू होगा, वहीं फ्लाइंग टेस्टिंग 2027 की दूसरी तिमाही तक शुरू होने की उम्मीद है। सभी रेगुलेटरी अप्रूवल DGCA मिलने के बाद अगले 3 से 5 सालों में इसे व्यावसायिक रूप से लॉन्च किया जा सकता है।कंपनी को अब तक 800 से अधिक एयरक्राफ्ट के ऑर्डर मिल चुके हैं और उसने निवेशकों से 21.5 मिलियन डॉलर का फंड जुटाया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here