कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। हालिया चुनावी झटकों के बाद पार्टी लगातार अंदरूनी चुनौतियों का सामना कर रही है और अब इसका असर संसद तक दिखाई देने लगा है। पिछले चार दिनों में राज्यसभा के चार सांसदों के इस्तीफे ने पार्टी नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
गुरुवार को राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक और अभिनेत्री से राजनेता बनीं कोयल मल्लिक ने अपने पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी। इससे पहले सुखेंदु शेखर राय और सुष्मिता देव भी उच्च सदन की सदस्यता छोड़ चुके हैं।
प्रकाश बड़ाईक ने छोड़ा पार्टी का साथ
प्रकाश चिक बड़ाईक ने इस्तीफे के बाद कहा कि उन्होंने जनता के जनादेश और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। उन्होंने पार्टी के संगठनात्मक पदों से भी दूरी बना ली है।
बड़ाईक कभी पार्टी नेतृत्व के करीबी नेताओं में गिने जाते थे। उन्हें राज्यसभा भेजने के साथ-साथ लोकसभा चुनाव में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई थी। ऐसे में उनका इस्तीफा पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
कोयल मल्लिक के फैसले से बढ़ी मुश्किलें
राज्यसभा सदस्य के रूप में हाल ही में राजनीतिक सफर शुरू करने वाली कोयल मल्लिक का इस्तीफा भी TMC के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है। राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने की घोषणा के कुछ ही महीनों बाद उनका पीछे हटना कई सवाल खड़े कर रहा है।
लगातार हो रहे इस्तीफों के कारण राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले दिनों में कुछ और नेता भी अपना रुख बदल सकते हैं।
पार्टी में बढ़ रही अंदरूनी बेचैनी
सूत्रों के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस के भीतर कई नेता संगठन की मौजूदा कार्यशैली और भविष्य की रणनीति को लेकर असंतोष जता रहे हैं। यही वजह है कि पार्टी के भीतर अलग-अलग खेमों की चर्चा तेज हो गई है।
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के बीच अभिनेता और सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने पार्टी नेतृत्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। उन्होंने कहा कि कठिन समय में संगठन और नेतृत्व के साथ खड़ा रहना ही उनकी प्राथमिकता है।
सायोनी घोष को लेकर बढ़ा सस्पेंस
तृणमूल कांग्रेस की युवा इकाई की अध्यक्ष और सांसद सायोनी घोष इन दिनों राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में हैं। पार्टी के भीतर चल रही उठापटक के बीच उनके रुख को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं।
बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में कुछ महत्वपूर्ण राजनीतिक बैठकों में उनकी मौजूदगी को लेकर चर्चाएं तेज हुई हैं। हालांकि उन्होंने अब तक किसी भी तरह की सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
कोलकाता लौटने पर भी नहीं दिया जवाब
गुरुवार को कोलकाता लौटने पर पत्रकारों ने सायोनी घोष से पार्टी के भीतर चल रही हलचल और उनके राजनीतिक रुख को लेकर सवाल पूछे, लेकिन उन्होंने कोई टिप्पणी करने से परहेज किया। उनकी चुप्पी ने अटकलों को और हवा दे दी है।
पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं का एक वर्ग अब उनके स्पष्ट रुख का इंतजार कर रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में उनका फैसला तृणमूल कांग्रेस की आंतरिक राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है।
आगे क्या?
लगातार इस्तीफों, बढ़ती नाराजगी और नेताओं की चुप्पी के बीच तृणमूल कांग्रेस एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है। अब सबकी निगाहें पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी पर हैं कि वह संगठन को एकजुट रखने और बढ़ते असंतोष को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाती हैं।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में आने वाले कुछ सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि मौजूदा घटनाक्रम राज्य की राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकता है।

