बंगाल में बड़ा राजनीतिक धमाका हुआ है. न्यूटाउन में आज शाम हुई एक बैठक के बाद, तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट ने ममता बनर्जी को तृणमूल चेयरपर्सन के पद से हटा दिया है. उनकी जगह हावड़ा सेंट्रल के विधायक अरूप रॉय को नया चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है. इसके अलावा, रिताब्रता बनर्जी और अन्य लोगों के नेतृत्व वाले ‘असली तृणमूल’ गुट ने अभिषेक बनर्जी को पार्टी के ‘ऑल इंडिया जनरल सेक्रेटरी’ के पद से सस्पेंड कर दिया है.
पश्चिम बंगाल में सोमवार को विधानसभा का बजट सत्र हुआ. सत्र के बाद, तृणमूल के बागी विधायकों ने न्यूटाउन के एक होटल में बैठक की. इस बैठक में तृणमूल के 60 विधायक शामिल हुए. साथ ही, कोलकाता के लगभग 70 पूर्व पार्षद भी मौजूद थे. इसी बैठक में 30 सदस्यों वाली ‘तृणमूल’ कमिटी के गठन की घोषणा की गई.
AITC के स्पेशल सेशन में हिस्सा लेने के लिए जिले से लेकर MLA तक, तृणमूल के 500 नेता शहर के एक होटल में एकजुट हुए. कम से कम 16 जिला अध्यक्ष, पूर्व MLA, 60-70 पार्षद और बागी MLA मौजूद रहे. इसी में नेशनल वर्किंग कमेटी का गठन किया गया.
तृणमूल कांग्रेस की नई नेशनल वर्किंग कमेटी
राष्ट्रीय अध्यक्ष- अरूप रॉयनेशनल जनरल सेक्रेटरी – संदीपन साहा (निष्कासित MLA), जावेद खान और रिताब्रता बनर्जीउपाध्यक्ष – फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास, रथिन घोष
अब नजर TMC के बैंक अकाउंट्स पर
बागी गुट ने शहर के एक होटल में तृणमूल कांग्रेस का एक स्पेशल सेशन आयोजित किया. TMC के संविधान का हवाला देते हुए, मौजूदा और पूर्व विधायक, जिला अध्यक्ष और पार्षद एक नेशनल वर्किंग कमेटी बनाने के लिए इकट्ठा हुए और ममता बनर्जी की जगह विधायक अरूप रॉय को चेयरपर्सन बना दिया. अगले 21 दिनों में वे फ्रंटल ऑर्गनाइजेशन भी बनाएंगे. तृणमूल के बैंक अकाउंट्स को अपने पास कैसे रखा जाए, इस बारे में कानूनी सलाह ली जा रही है.
बागी विधायकों और पार्षदों के इस बड़े खेल के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने भी अपना खेल शुरू कर दिया है।आधिकारिक टीएमसी खेमे ने इस बगावत को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी ने चुनाव आयोग (ECI) को एक नई संशोधित सूची भेजकर यह स्पष्ट किया है कि ममता बनर्जी ही पार्टी की वैध अध्यक्ष हैं।
चुनाव आयोग (ECI) द्वारा इस विवाद पर अंतिम फैसला लेने तक, ममता बनर्जी ही पार्टी के नाम, लोगो और चुनाव चिन्ह की कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त प्रमुख है।
बागी गुट को टीएमसी पर पूरी तरह कब्ज़ा जमाने और पार्टी का नाम या सिंबल हासिल करने के लिए चुनाव आयोग के पास जाना होगा ।वहीं दूसरी ओर, आधिकारिक टीएमसी गुट बागी विधायकों के खिलाफ दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत अयोग्यता की कार्यवाही भी शुरू कर रहा है। इसलिए, पार्टी पर किसका पूर्ण अधिकार होगा, यह मुख्य रूप से चुनाव आयोग और कानूनी मामलों की सुनवाई पर निर्भर करेगा।

