दिशा सालियान और सुशांत सिंह राजपूत के मामले को जांच अधिकारियों ने अपनी जांच में पूरी तरह से आत्महत्या का मामला बता दिया था। यहां तक की जांच के क्रम में पहले दिशा सालियानऔर सुशांत सिंह राजपूत के पिता को ही इन जांच अधिकारियों ने आरोपी बना दिया था। वहीं दिशा सालियान और सुशांत सिंह राजपूत के परिजनों का मानना था कि दिशा सालियान और सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या नहीं की थी बल्कि इनकी जघन्य हत्या की गई थी।
पहले तो दिशा सालियान और सुशांत सिंह राजपूत के परिजनों की यह आवाज नक्कार खाने में तूती बनकर रह गई थी, लेकिन जब से खासकर दिशा सालियां के पिता सतीश सालियां इस मामले को अपने वकील निलेश ओझा के माध्यम से बॉम्बे उच्च न्यायालय लेकर गए तब से बाजी पलटनी शुरू हो गई। रिया चक्रवर्ती, डीनो मोरिया,उद्धव ठाकरे,आदित्य ठाकरे,परमवीर सिंह जैसे प्रमुख राजनीतिक हस्ती और नौकरशाह के रहने के कारण जहां मुंबई पुलिस पहले इस मामले में इन लोगों के विरुद्ध कोई एफआईआर तक नहीं कर रही थी, वही बॉम्बे हाई कोर्ट के द्वारा इस मामले को मुंबई पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंपने के आदेश देने के बाद दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान के द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार इन लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज हो गया। हालांकि सीबीआई में दर्ज एफआईआर में इन लोगों को नामजद आरोपी बनाए जाने के बावजूद सीबीआई ने इन लोगों को अपनी कस्टडी में लेकर पूछताछ करने जैसी कार्रवाई भी अभी शुरू नहीं की है। इसके बाद इस तरह की चर्चा सरेआम होने लगी की एक तरफ तो यह सभी नाम चिन व्यक्ति हैं और ऊपर से ये लोग नशा के अवैध व्यापार और अवैध उगाही के धंधेबाज है है जिस कारण से इन लोगों के पास बड़ी मात्रा में काला धन है जिसका उपयोग कर यह लोग मामले को कुछ दिनों तक दबा कर रखना और बाद में उसे रफा दफा करवा देने की क्षमता रखते हैं। इस मामले के मुंबई पुलिस से सीबीआई में हस्तांतरित होने के बावजूद ये एक बार फिर से अपनी पहुंच और इस काले धन के पैसे की ताकत से सीबीआई के द्वारा भी इस मामले को आत्महत्या का मामला कार करवा देंगे और फिर मजे से अपने धंधे में लगे रहेंगे। दिशा सालियान के पिता सतीश सल्यान के वकील निलेश ओझा इस बात को Qvive नेटवर्क पर दिए गए इंटरव्यू में कई बार दोहरा चुके हैं कि जब उन्होंने इस मामले को अपने हाथ में लिया तब उनका भी इन नामित आरोपियों के द्वारा यह कहकर उपवास उड़ाया जाता है किया लोग सेटिंग गेटिंग में काफी महारत हासिल रखते हैं इसलिए इन लोगों को कुछ नहीं होगा और यह मामला अंत में आत्महत्या का मामला ही सिद्ध होकर रह जाएगा।
दिशा सालियान के पिता शक्तिशालियां के वकील निलेश ओझा का मानना है कि आवे स्थिति में आ चुके हैं की उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे ,रिया चक्रवर्ती, डिनो मारिया, परमवीर सिंह जैसे नामित आरोपियों को तो न्यायालय से जेल की सजा दिलवाएंगे ही इन्हें बचाने में जुटी हुई दलालों यथा किशोर, बियानी, निखिल कामत देसी धनपतियों को जो इन आरोपियों को महिमा मंडित कर रहे हैं और अपने पैसों के बल पर कानून को धोखा देकर बचाने के अपने अभियान में जुटे हुए हैं ताकि बाद में इनका लाभ उठाया जा सके उन्हें भी जेल के सलाखों के पीछे डालने में सफल होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से हुए अपनी प्रयासों से सीबीआई के भ्रष्ट पदाधिकारी पीएमओ के भ्रष्ट पदाधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई कर रहे हैं उससे इन आरोपियों पर कानून का शिकंजा तेजी से कसने लगा है। इस मामले में उन्होंने किशोर बियानी के मामले का उल्लेख करते हुए बताया कि अब इसके साथ ही निखिल कामत रिया चक्रवर्ती होते हुए सारे आरोपी कानून के शिकंजे में कैसे जाएंगे और दिशा सालियां तथा सुशांत सिंह राजपूत को न्याय मिलेगा।
किशोर बियानी, फ्यूचर रिटेल और उनके भाई राकेश बियानी के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 4 नवंबर 2026 को ₹904.32 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।
State Bank of India (SBI) की शिकायत पर दर्ज एफआईआर (FIR) के मुताबिक, यह मामला पूरी तरह से एक कॉर्पोरेट बैंक लोन फ्रॉड है। इसकी मुख्य कड़ियाँ निम्न हैं:
लोन का प्रकार: फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (FRL) ने एसबीआई (SBI) और 9 बैंकों के एक कंसोर्टियम (समूह) से वर्किंग कैपिटल और व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए लोन लिया था।
फंड की हेराफेरी (Fund Siphoning): फोरेंसिक ऑडिट (2017 से 2022 के बीच की अवधि) में पाया गया कि बियानी बंधुओं ने लोन के पैसों का इस्तेमाल उस काम के लिए नहीं किया जिसके लिए वह मंजूर हुआ था। इस पैसे को संदिग्ध लेन-देन के जरिए अपनी सहयोगी कंपनियों और संबंधित संस्थाओं में डायवर्ट और लेयर कर दिया गया।
एफआईआर में शामिल नाम: सीबीआई की एफआईआर में स्पष्ट रूप से फ्यूचर रिटेल लिमिटेड, प्रमोटर किशोर बियानी, राकेश बियानी, कंपनी के तत्कालीन डायरेक्टर्स, गारंटर्स और कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों (बैंक अधिकारियों) को नामजद किया गया है। इसमें धोखाधड़ी के लिए आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं।
भारतीय कानून (पूर्ववर्ती IPC की धारा 409 या भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धारा) एक बेहद विशिष्ट और गंभीर गैर-जमानती धारा है। इसे किसी भी आरोपी पर लगाने के लिए कोर्ट और जांच एजेंसियों को तीन बुनियादी शर्तें पूरी करनी होती हैं:
1. विशेष कानूनी हैसियत : आरोपी का लोक सेवक (Public Servant), बैंकर, व्यापारी या कानूनी एजेंट होना अनिवार्य है।
2. संपत्ति पर नियंत्रण : यह साबित होना चाहिए कि पीड़ित (जैसे बैंक या जनता) ने आरोपी को उसकी उस हैसियत के कारण अपनी संपत्ति या फंड का ‘ट्रस्टी’ या ‘संरक्षक’ बनाया था।
3. आपराधिक दुर्विनियोग: आरोपी ने उस भरोसे को तोड़कर उस संपत्ति को अपने निजी फायदे के लिए गबन या डायवर्ट कर लिया हो।
जांच एजेंसी ने हालांकि निखिल कामत और रिया चक्रवर्ती इस कानूनी दायरे से बाहर रखा है। जांच एजेंसी ने इसके निम्नलिखित कारण बताए हैं:
कोई ‘Entrustment’ नहीं है: न तो निखिल कामत और न ही रिया चक्रवर्ती एसबीआई बैंक के एजेंट या बैंकर हैं, और न ही वे फ्यूचर रिटेल के बोर्ड या मैनेजमेंट का हिस्सा थे। एसबीआई बैंक ने उन्हें कोई फंड नहीं सौंपा था।
व्यक्तिगत निवेश बनाम बैंक फ्रॉड: यदि कोई निवेशक (चाहे वह बियानी हों या कामत) अपनी निजी संपत्ति या किसी वैध फंड से किसी के स्टार्टअप में निवेश करता है, तो वह उनका व्यक्तिगत व्यावसायिक निर्णय है। जब तक सीबीआई को यह ठोस कंक्रीट ट्रेल नहीं मिलती कि “एसबीआई से लूटा गया ₹904 करोड़ रुपया सीधे घूमकर रिया चक्रवर्ती के अकाउंट में आया है”, तब तक उन्हें इस केस में आरोपी नहीं बनाया जा सकता।
हालांकि दिशा शालाएं के पिता सतीश सालियां के वकील निलेश ओझा ने Qvive नेटवर्क परयह दावा किया कि निखिल कामत ने किशोर बियानी के साथ व्यावसायिक संबंधों के चलते रिया चक्रवर्ती के नए फैशन/क्लोदिंग स्टार्टअप ‘चैप्टर 2’ (Chapter 2) में ₹1 करोड़ की सीड फंडिंग दिलवाई है। और अब वह जांच एजेंसियों कि इस लापरवाही को लेकर न्यायालय में तो मामला उठाएंगे ही लेकिन उससे पहले 19 नवंबर को मुंबई में आयोजित रैली में सीधे-सीधे इन जांच एजेंसियों से ऐसी लापरवाही को लेकर सवाल करने की बात बात कर रहे हैं। इनका मानना है कि वैसे तो अन्य कई साक्षी भी इनके पास उन नामित आरोपियों उद्धव ठाकरे आदित्य ठाकरे रिया चक्रवर्ती दोनों मारिया परमवीर सिंह आदि के विरुद्ध उपलब्ध है लेकिन जहां से एजेंटीयों के द्वारा किशोर बियानी के इस मामले के तार भी इन सभी नामित आरोपियों से जुड़ेंगे और वे सभी जेल के शिक्षकों के भीतर रहेंगे और दिशा शल्याम तथा सुशांत सिंह राजपूत को न्याय मिलकर रहेगा।

