आपने पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग के बारे में सुना होगा। अब उसी इथेनॉल से बिजली बनेगी। दरअसल ब्राजील ने दुनिया का पहला इथेनॉल इंजन बना लिया है, जो पूरी तरह से इथेनॉल पर चलेगा और बड़े पैमान पर बिजली पैदा करेगा। अभी तक इथेनॉल का इस्तेमाल सिर्फ कारों और ट्रकों जैसे वाहनों में पेट्रोल-डीजल के विकल्प के तौर पर या फिर ब्लेंडिंग के जरिए होता था। अब वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किए गए विशालकाय इंजन से पावर ग्रिड के लिए बिजली बनाई जा सकेगी। रिपोर्ट्स की मानें, तो बिजली बनाने की इस अद्भुत तकनीक से पावर ग्रिड के क्षेत्र में क्रांति आ सकती है।
इस प्रोजेक्ट को ब्राजील के पेरनामबुको में स्थित ‘सुआपे II पावर प्लांट’ में सेटअप किया गया है। इसे तैयार करने वाली कंपनियों में सुआपे एनर्जिया जो कि एक उर्जा के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी है और फिनलैंड की मशहूर टेक्नोलॉजी फर्म वार्ट्सिला शामिल है।
इसके लिए वार्ट्सिला ने एक खास इंजन 32M को मॉडिफाई किया, जो खास तौर पर ब्राजील के गन्ने से तैयार इथेनॉल पर काम करता है। वैज्ञानिक अब इसकी असल परिस्थितियों में टेस्टिंग करेंगे। अगले कुछ सालों तक इस इंजन को चलाकर इसकी परफॉर्मेंस, टिकाउपन और प्रदूषण के लेवल की टेस्टिंग की जाएगी।
गौरतलब है कि ब्राजील दुनिया का सबसे बड़ा इथेनॉल उत्पादक और उपभोक्ता है। ब्राजील ने कई सालों का समय लगाकर अपने यहां इथेनॉल के उत्पादन, भंडारण और ट्रांसपोर्टेशन के लिए मजबूत ढांचा तैयार किया है। भले ब्राजील दुनिया का सबसे बड़ा इथेनॉल उत्पादक देश हो लेकिन अभी तक इससे बिजली बनाने के विचार को नजरअंदाज किया गया। नए इंजन के बाद अब इथेनॉल से बिजली बनाने का रास्ता भी साफ हो गया है।
सोलर पैनल और विंड टर्बाइन के बिजली बनाने की एक सीमा है। अगर सूरज न चमके और हवा न चले, तो यह दोनों किसी काम के नहीं रहते। इससे ग्रिड को चालू रखने के लिए बैटरी पर आधारित स्टोरेज व्यवस्था काफी महंगी पड़ती है।
इसकी दूसरी खासियत है कि यह कम कार्बन वाली ऐसी ऊर्जा है जिसे स्टोर और ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है।
यह इथेनॉल इंजन ग्रिड को तब भी बिना रुके बिजली दे सकेगा जब सौर या पवन ऊर्जा उपलब्ध नहीं होगी।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के मुताबिक, 2030 तक दुनिया में बायोएनर्जी का उत्पादन तेजी से बढ़ेगा। ऐसे में इस तकनीक का भविष्य उज्जवल लगता है।

