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बीजेपी वाले सांसद निशिकांत दुबे और टीएमसी वाली महुआ मोइत्रा की लड़ाई का सच

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अखिलेश अखिल
गोड्डा वाले बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की फर्जी डिग्री की कहानी सच है या झूठ इसका सही जवाब तो दुबे जी ही देंगे या फिर जहां से डिग्री मिली है वह संस्थान देगा। लेकिन टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने जो प्रमाण पेश किया है उससे दुबे जी काफी आहात हो गए हैं। जाहिर है महुआ के दावे में कुछ न कुछ सच्चाई है। हलाकि निशिकांत दुबे ने भी महुआ के प्रमाण के बाद अपनी बात रखी है लेकिन उस बात में कोई दम नहीं लगता। महुआ ने जो प्रमाण पेश किये हैं उससे साफ़ लगता है कि दुबे जी फर्जी डिग्री के सहारे अपने चेहरे को चमका रहे थे और पिछले समय में कई कॉर्पोरटे घरानो के लिए काम भी किये थे। लेकिन मामला केवल उनके एमबीए की डिग्री तक ही नहीं है। दुबे जी ने पीएचडी भी किया है। महुआ ने उस पीएचडी डिग्री को भी कठघरे में खड़ा किया है। दुबे जी शर्मसार तो हो ही गए हैं।

बीजेपी कई ऐसे लोग है जिनकी पढ़ाई लिखाई की कहानी सवालों के घेरे में है। खुद प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री पर भी सवाल उठ चुके हैं। आज तक कोई नहीं जान सका कि उनकी असली पढ़ाई क्या है ? स्मृति ईरानी भी पढ़ाई -लिखाई को लेकर शर्मसार हो चुकी हैं। कोई नहीं जान सका कि वे कहाँ तक पढ़ी है। इसके साथ ही बीजेपी की मौजूदा राजनीति में बहुत से साइज़ नेता ,मंत्री ,सांसद,विधायक और प्रवक्ता है जिनकी डिग्री की जांच की जाए तो बड़े खिलाडी निकलेंगे। कइयों के पास नकली संस्थानों की नकली डिग्री मिल सकती है। हालांकि राजनीति करने के लिए किसी डिग्री की जरूरत नहीं होती लेकिन पिछले कुछ सालों में अनपढ़ नेताओं ने पढ़े लिखे के सामने खुद को चमकाने के लिए नकली डिग्री का सहारा खूब लिया है।

अब महुआ मोइत्रा में डिग्री को लेकर निशिकांत दुबे पर बड़ा हमला किया है। यह हमला पिछले कई दिनों से जारी है। जबसे   निशिकांत दुबे ने राहुल गाँधी के संसद के भीतर और लंदन में दिए गए भाषण के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मामला पेश किया है तब से ही महुआ दुबे जी पर हमलावर हैं। दुबे की कोशिश या फिर पूरी बीजेपी की कोशिश यही है कि राहुल गाँधी की सांसद सदस्यता ख़त्म कराई जाए ताकि चुनावी साल में बीजेपी जनता के सामने यह कह सके कि यह आदमी देशद्रोही है ,अनाप शनाप बोलता है और बेकार है। लेकिन महुआ भला कहाँ रुकने वाली ! महुआ टीएमसी से पहले कांग्रेस में भी रह चुकी है और राहुल के साथ उसके बेहतर राजनीतिक रिश्ते भी रहे हैं। वह बाद में ममता के साथ चली गई और आज संसद में मुखर नेता के रूप में उसकी पहचान रही है।

शुक्रवार को महुआ ने दुबे जी पर हमला किया और चुनाव आयोग में दुबे जी ने हो हलफनामा सौपा था उसमे दर्ज शैक्षणिक योग्यता की प्रमाणिकता पर सवाल उठाया। मोइत्रा ने शुक्रवार को सिलसिलेवार ट्वीट करते हुए दावा किया कि 2009 और 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान दुबे के हलफनामे में ‘दिल्ली विश्वविद्यालय से अंशकालिक एमबीए’ को अपनी योग्यता के रूप में उल्लेखित किया गया था। उन्होंने एक आरटीआई भी साझा की जिसमें डीयू के कथित जवाब का जिक्र किया गया है जिसमें दावा किया गया है कि 1993 में शैक्षणिक वर्ष के दौरान ऐसे किसी भी उम्मीदवार को प्रवेश नहीं दिया गया था या पास आउट नहीं किया गया था।

टीएमसी सांसद महुआ यही नहीं रुकी। उन्होंने आगे ट्वीट किया कि 2019 के चुनावों के दौरान हलफनामे में, दुबे ने एमबीए की डिग्री का कोई उल्लेख नहीं किया और केवल प्रताप विश्वविद्यालय, राजस्थान से पीएचडी की डिग्री का उल्लेख किया। इसके बाद निशिकांत दुबे ने अपने पीएचडी आवेदन का एक दस्तावेज साझा किया और कहा कि उन्होंने डीयू की एमबीए की डिग्री छोड़ दी और इसके बजाय उनके पास प्रताप विश्वविद्यालय से ही एमबीए की डिग्री थी, जो 2013-2015 सत्र को पूर्ण की गई थी।

इसके जवाब में दुबे ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय आरटीआई का जवाब नहीं देता है और उन्होंने चुनाव आयोग का एक दस्तावेज साझा किया, जिसने मामले को रद्द कर दिया है। इस मामले में सबसे पहले झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और एक अन्य याचिकाकर्ता विष्णु कांत झा ने पहल की थी और निशिकान्त दुबे की डिग्री पर सवाल उठाए थे।

Am very keen to see Hon’ble Member’s attendance record at Pratap Uni for full time MBA 2013-15 given he was full time MP then & match with LS attendance & constituency visits. Btw Pratap Uni MBA transcript has spelt “cumulative” incorrectly so don’t know how genuine it is pic.twitter.com/u1HoRPAjoZ

— Mahua Moitra (@MahuaMoitra) March 17, 2023

महुआ मोइत्रा ने विश्वविद्यालय की डिग्री में वर्तनी की गलती की ओर इशारा करते हुए ट्वीट किया, “मैं प्रताप विश्वविद्यालय में पूर्णकालिक एमबीए 2013-15 के लिए माननीय सदस्य की उपस्थिति रिकॉर्ड देखने के लिए बहुत उत्सुक हूं, क्योंकि वह तब पूर्णकालिक सांसद थे और लोकसभा की उपस्थिति और निर्वाचन क्षेत्र के दौरों के साथ यह मेल खाते हैं। उन्होंने कहा, ‘जो लोग शीशे के घरों में रहते हैं, उन्हें पत्थर नहीं फेंकना चाहिए। और जिन लोगों के पास फर्जी डिग्री है और उन्होंने हलफनामे पर झूठ बोला है, उन्हें निश्चित रूप से नियम पुस्तिका नहीं फेंकनी चाहिए।

मोइत्रा के आरोपों का जवाब देते हुए, दुबे ने दो दस्तावेज साझा किए – एक चुनाव आयोग का दस्तावेज जिसने उनकी डिग्री के मामले पर आगे बढ़ने से इनकार कर दिया और सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी डिग्री पर उनके खिलाफ एफआईआर करने के झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया।

यह पहली बार नहीं है जब दुबे अपनी डिग्रियों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। जुलाई 2020 में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के प्रमुख हेमंत सोरेन ने गोड्डा के सांसद पर दिल्ली विश्वविद्यालय से प्रबंधन की फर्जी डिग्री हासिल करने का आरोप लगाया था। इस बीच झा ने भाजपा सांसद के खिलाफ देवघर में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर झारखंड पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर उनके खिलाफ जांच शुरू की थी।

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