अब इस दिन होगा महागठबंधन में सीटों का बंटवारा,आज दिल्ली में फिर नहीं बनी बात

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बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन में सीट बंटवारे पर आखिरी दौर की बातचीत जारी है। सूत्रों के अनुसार मंगलवार तक सीट बंटवारे पर फैसला हो जाएगा। दिल्ली में सोमवार को लगातार बैठकों का सिलसिला चला। सोमवार शाम को आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शकील अहमद और राजेश राम के साथ मुलाकात की। यह बैठक करीब दो घंटे तक चली।

इससे पहले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बिहार कांग्रेस के नेताओं के साथ सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पर बैठक की। इस दौरान बिहार कांग्रेस के नेताओं ने अपनी पसंदीदा सीटों पर लड़ने की बात हाईकमान को स्पष्ट तौर पर बता दी। राहुल ने भी इस पर सहमति दे दी। इसके बाद के सी वेणुगोपाल ने तेजस्वी यादव से बातचीत की।

महागठबंधन में पेच कांग्रेस और वाम दलों की कुछ सीटों को लेकर फंसा हुआ है। आरजेडी इन सीटों पर दावा जता रही है, जबकि कांग्रेस उन सीटों को मजबूत आधार बताकर छोड़ने को तैयार नहीं है। कांग्रेस का कहना है कि इस बार सीटों की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि कौन किस सीट से चुनाव लड़ेगा। पार्टी उन सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है जहां उसका संगठन मजबूत है। करीब एक दर्जन सीटें ऐसी थीं जिनपर गतिरोध बना हुआ था।

सूत्रों के अनुसार तेजस्वी यादव और कांग्रेस नेतृत्व के बीच सात से आठ विवादित सीटों पर सहमति बनने लगी है। माना जा रहा है कि मंगलवार को तेजस्वी यादव वाम दलों, खासकर भाकपा माले को फाइनल ऑफर देकर महागठबंधन की सीटों का औपचारिक ऐलान कर सकते हैं। इस बार वीआईपी (विकासशील इंसान पार्टी) भी महागठबंधन में शामिल होकर चुनाव लड़ेगी, जिससे समीकरण में नया बदलाव आया है।

पिछले विधानसभा चुनावों में सीटें इस प्रकार बंटी थीं कि आरजेडी ने 144 सीटों पर चुनाव लड़ा और 75 सीटें जीतीं। कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा और 19 सीटें जीतीं। वाम मोर्चे से भाकपा माले ने 19 में से 12 सीटों पर जीत हासिल की थी। भाकपा ने 6 में से 2 और माकपा ने 4 में से 2 सीटें जीती थीं। इन नतीजों के बाद वाम दलों की साख बढ़ी और इस बार वे अपनी सीट संख्या बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि यदि उसे रणनीतिक सीटें मिलती हैं तो वह पिछली बार की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। वहीं आरजेडी सबसे बड़े दल के रूप में अपनी पकड़ बनाए रखना चाहती है। तेजस्वी यादव की कोशिश है कि सभी सहयोगी दलों को साधते हुए महागठबंधन को एकजुट संदेश दिया जाए।

महागठबंधन के भीतर पिछले कुछ दिनों से लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। दिल्ली में हुई इन चर्चाओं से संकेत मिल रहे हैं कि अब विवाद अपने अंतिम चरण में है। कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि करीब एक दर्जन सीटों पर असहमति थी, लेकिन अब अधिकांश मुद्दे सुलझ चुके हैं। मंगलवार तक तस्वीर साफ हो जाएगी।

अब सबकी निगाहें मंगलवार पर टिकी हैं, जब महागठबंधन के सीट बंटवारे की औपचारिक घोषणा होने की उम्मीद है। इससे बिहार की राजनीतिक तस्वीर स्पष्ट हो जाएगी और उम्मीदवार नामांकन की प्रक्रिया भी तेज हो जाएगी। पहले चरण के लिए 17 अक्टूबर तक नामांकन होने हैं।

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