अखिलेश अखिल
यह देश भले ही सेक्युलर है लेकिन इस देश में धर्म कुलांचे मरता रहता है। इस देश में रहने वाले चाहे जो भी लोग हों वह धर्म के बिना जी नहीं सकता। वह हिन्दू हो सकता है ,वह मुसलमान हो सकता है ,वह ईसाई ,बौद्ध ,जैन और सिख और पारसी हो सकता है इसके साथ ही वह किसी भी पंथ को मानने वाला भी हो सकता है सबको इस बात की गारंटी दी गई है कि वह अपने धर्म का ख़ुशी से पालन करे लेकिन धर्म के नाम पर समाज में कोई विद्वेष न फैलाएं। यही देश की असली ताकत है। हम अनेक जरूर है लेकिन एक सबसे ज्यादा है। हम लड़ते भी हैं लेकिन बांटते नहीं। हम मतभेद रखते हैं लेकिन देश भेद तो कतई नहीं रखते।
देश राममय है। अयोध्या में 22 जनवरी को प्रभु राम के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है। भारत के भीतर सनातनियों के साथ ही गैर सनातनी लोगों में भी उल्लास है। आखिर किसी भी ईश्वर के मंदिर पर किसी को ख़ुशी और उल्लास क्यों नहीं होगी। लेकिन इस धर्म के नाम पर पाखंड भी चल रहा है। यह दिखाने की कोशिश की जा रही है कि बीजेपी और उसके लोग ही असली सनातनी है बाकी के लोग सनातन विरोधी। बीजेपी और गोदी मीडिया वाले जिस तरह का माहौल खड़ा किया है वह आजाद भारत का ऐसा सच है जिसकी कल्पना आज तक नहीं की जा सकती। मकसद एक ही है चुनाव में बीजेपी की वापसी।
इस बार बजप और संघ को लग रहा है कि भगवान् राम के नाम पर बीजेपी की नैयार पा हो सकती है। और यही कारण कि भगवान् राम के मंदिर उद्घाटन को एक बड़ा इवेंट बना दिया है। इस इवेंट पर कितने करोड़ खर्च किये जा रहे हैं यह भी एक कहने की बात हो सकती है। लेकिन चुकी भगवान् के नाम पर यह सब हो रहा है इसलिए इस पर सवाल कौन उठा सकता है ? अब कुछ ख़बरों पर ध्यान देने की जरूरत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु दौरे पर हैं। अयोध्या में 22 जनवरी को राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा से पहले 11 दिवसीय विशेष अनुष्ठान में जुटे पीएम मोदी ने रामेश्वरम में कई नदियों के तीर्थ से लाए गए जल से स्नान किया। उन्होंने रामेश्वरम के समुद्र में पवित्र डुबकी लगाने के बाद श्री अरुल्मिगु रामनाथस्वामी मंदिर में दर्शन-पूजन भी किया। प्रधानमंत्री ने समुद्र में पवित्र स्नान के बाद गंगा, यमुना और सरस्वती नदी के पवित्र और तीर्थ के जल से भी विशेष स्नान किया।
स्नान के बाद प्रधानमंत्री रामेश्वरम के रामनाथस्वामी मंदिर में विशेष पूजा भी की। इस मंदिर में पूजे जाने वाले मुख्य देवता श्री रामनाथस्वामी हैं, जिन्हें भगवान शिव का एक रूप माना जाता है। श्रद्धालुओं की ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में जिस मुख्य शिवलिंग की पूजा होती है, इसकी स्थापना और पूजा खुद भगवान श्रीराम और माता सीता ने की थी। रामेश्वरम को 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक गिना जाता है। इसे हिंदू धर्म के चार धामों में से एक माना जाता है। इसके अलावा बद्रीनाथ, द्वारका और जगन्नाथ पुरी को भी चार धाम में गिना जाता है।
पीएम मोदी ने रामेश्वरम के इस मंदिर में ‘श्री रामायण पारायण’ कार्यक्रम में भी भाग लिया। इसमें आठ अलग-अलग पारंपरिक मंडलियों ने संस्कृत, अवधी, कश्मीरी, गुरुमुखी, असमिया, बंगाली, मैथिली और गुजराती भाषा की रामकथा का पाठ किया। पूरी रामकथा में लंकापति रावण के साथ युद्ध के बाद श्रीराम की अयोध्या वापसी के प्रसंग का वर्णन किया जा रहा है।
इससे पहले रामेश्वरम पहुंचे पीएम मोदी ने रोड शो किया। प्रधानमंत्री के स्वागत में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग सड़कों के किनारे जमा हुए। पीएम का स्वागत-अभिनंदन करते हुए पार्टी समर्थकों ने जमकर फूल बरसाए। रिपोर्ट्स के मुताबिक पीएम मोदी दोपहर करीब दो बजे रामेश्वरम पहुंचे। रामेश्वरम दौरे पर प्रधानमंत्री के इस रोड शो से पहले स्थानीय जनता खासा उत्साहित दिखी।
तिरुचिरापल्ली में पहुंचे पीएम मोदी को अपने बीच पाकर स्थानीय जनता काफी खुश दिखी। पीएम मोदी ने हाथ जोड़कर जनता का अभिवादन स्वीकार किया। पीएम मोदी की एक झलक पाने को युवाओं के अलावा बुजुर्गों और महिलाओं में भी उत्साह का माहौल दिखा।प्रधानमंत्री ने रामेश्वरम पहुंचने के बाद श्री अरुल्मिगु रामनाथस्वामी मंदिर में भी दर्शन-पूजन किया। प्रधानमंत्री धनुषकोडी के कोठंडारामस्वामी मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगे। धनुषकोडी के पास ही पीएम मोदी अरिचल मुनाई भी जाएंगे। ऐसी मान्यता है कि लंकापति रावण के साथ संग्राम से पहले श्रीराम की सेना ने राम सेतु का निर्माण इसी स्थान से शुरू किया था।
रामेश्वरम में रोड शो से पहले प्रधानमंत्री मोदी तिरुचिरापल्ली में श्री रंगनाथस्वामी मंदिर भी गए। उन्होंने इस मंदिर में विद्वानों के समूह की तरफ से आयोजित कंब रामायणम के छंदों का पाठ भी सुना। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री का तमिलनाडु दौरा शुक्रवार से शुरू हुआ। छठे खेलो इंडिया अभियान का उद्घाटन करने पहुंचे पीएम मोदी के आगमन पर स्थानीय लोगों और उत्साही भाजपा समर्थकों ने फूल, माला और पार्टी के झंडे के साथ उनका स्वागत किया था। हजारों लोग सड़कों के दोनों ओर खड़े दिखे।

