ज्यादातर वाईफाई इंटरनेट राउटर के पीछे वायर वाले पोर्ट्स के साथ एक USB पोर्ट भी होता है। लोग अक्सर इसे अनदेखा कर देते हैं, लेकिन यह बहुत काम का फीचर है। इस USB पोर्ट में पेनड्राइव या हार्ड डिस्क लगाकर आप अपने डेटा को पूरे घर के नेटवर्क पर शेयर कर सकते हैं, यानी इसे अपनी पर्सनल नेटवर्क ड्राइव बना सकते हैं। इसके अलावा, अगर कभी आपका मेन ब्रॉडबैंड या वाई-फाई बंद हो जाए, तो इसमें मोबाइल का 4G/5G डोंगल लगाकर बैकअप इंटरनेट भी चला सकते हैं।
असल में, राउटर भी एक छोटे कंप्यूटर की तरह होता है, जिसमें अपना प्रोसेसर और मेमोरी होती है। नए राउटर्स में दिए गए फास्ट USB 3.0 पोर्ट की मदद से आप बिना किसी झंझट के ये सारे काम बहुत आसानी और तेजी से कर सकते हैं। आइये, वाई-फाई राउटर के पोर्ट के उपयोगी इस्तेमाल जानते हैं।
आपके WiFi राउटर के USB पोर्ट का एक और आम इस्तेमाल प्रिंटर शेयरिंग है। अगर आपके पास कोई पुराना या सस्ता प्रिंटर है, जिसमें Wi-Fi नहीं है, तो भी आप वायरलेस तरीके से प्रिंट कर सकते हैं और आपको अपने प्रिंटर को अलग-अलग कंप्यूटर से कनेक्ट करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि, यह आपके राउटर और प्रिंटर की कम्पैटिबिलिटी पर भी निर्भर करता है।
कुछ राउटर के USB पोर्ट में आप 4G या 5G डोंगल लगाकर इंटरनेट चला सकते हैं। हालांकि, यह फीचर हर राउटर में नहीं होता क्योंकि इसके लिए राउटर में सही सॉफ्टवेयर होना जरूरी है। अगर आपका राउटर इसे सपोर्ट करता है, तो आप डोंगल का इस्तेमाल अपने प्राइमरी इंटरनेट की तरह कर सकते हैं। या फिर, इसे बैकअप के रूप में रख सकते हैं। ताकि जब भी आपका मेन वाई-फाई बंद पड़े तो यह तुरंत अपने आप चालू हो जाए और आपका काम ना रुके। इसे ही डुअल WAN फेलओवर या मल्टी-WAN कहा जाता है।
अपने राउटर को स्टोरेज सर्वर में बदलने से पहले कुछ बदलाव करने होंगे। कई पुराने मॉडल केवल USB 2.0 स्पीड हैं। यह 480Mbps या 60MBps है, जिसका अर्थ है कि बड़ी मात्रा में डेटा ट्रांसफर करने में घंटों लगेंगे।

