5G का नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले ख्याल आता दमदार स्पीड, शानदार डिजाइन और धांसू कैमरा… है ना? लेकिन रुकिए! क्या आप जानते हैं कि भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में एक बहुत बड़ा ट्विस्ट आ गया है? जिस 5G का हर तरफ ढिंढोरा पीटा जा रहा था, वो अब आम बजट से बाहर होता जा रहा है।इसकी वजह से इंडियन यूथ फिर से 4G फोन्स की तरफ मुड़ रहा है।महंगे फोन्स ने 5G की रफ्तार थोड़ी धीमी कर दी है और 4G फोन्स एक बार फिर से ट्रेंड में आ गए हैं।आइए जानते हैं कि आखिर मार्केट में ऐसा क्या चल रहा है और क्यों लोग 15,000 रुपये के बजट में 5G से ज्यादा 4G पर भरोसा जता रहे हैं?
भारत में स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले लोगो के लिए एक बहुत ही दिलचस्प ट्रेंड सामने आया है।जहां लग रहा था कि 2026 तक हर किसी के हाथ में सिर्फ 5G फोन होगा, वहीं असलियत थोड़ी अलग निकली है।महंगे होते स्मार्टफोन्स की वजह से 5G की रफ्तार धीमी हो गई है और 4G फोन्स ने मार्केट में फिर से जबरदस्त वापसी कर ली है।लोग अब सिर्फ 5G टैग देखकर फोन नहीं खरीद रहे, बल्कि वो देख रहे हैं कि उन्हें कम पैसे में क्या-क्या तगड़े फीचर्स मिल रहे हैं।
रिसर्च फर्म काउंटरपॉइंट की नई रिपोर्ट के मुताबिक, ओवरऑल स्मार्टफोन मार्केट भले ही थोड़ा डाउन चल रहा हो, लेकिन 4G फोन्स की शिपमेंट में इस साल 3% की बढ़त देखी जा सकती है।अगर आंकड़ों की बात करें तो 2025 में स्मार्टफोन मार्केट में 4G की हिस्सेदारी सिर्फ 11% थी, लेकिन 2026 में इसके बढ़कर 13% होने का अनुमान है और 2027 तक यह 15% तक पहुंच सकती है।इससे साफ पता चलता है कि 4G अभी कहीं जाने वाला नहीं है।
सबसे बड़ा बदलाव 10,000 से 20,000 रुपये वाली प्राइस रेंज में देखा जा रहा है।2025 में इस बजट में केवल 2 ब्रांड्स ही 4G फोन बना रहे थे,लेकिन अब 2026 में करीब 12 स्मार्टफोन कंपनियां इस रेंज में नए-नए 4G मॉडल लॉन्च कर रही हैं। काउंटरपॉइंट के सीनियर एनालिस्ट प्रचीर सिंह के मुताबिक, 4G की यह रिकवरी सिर्फ सस्ते या एंट्री-लेवल फोन्स तक सीमित नहीं है। इस मिड-बजट सेगमेंट के बायर्स अब 5G के चक्कर में एक्स्ट्रा पैसे खर्च करने के बजाय एक बढ़िया डिस्प्ले, अच्छी बैटरी और शानदार कैमरा वाला 4G फोन लेना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
जून तिमाही में भारत के ओवरऑल स्मार्टफोन शिपमेंट में 11% की गिरावट दर्ज की गई है।इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि स्मार्टफोन में लगने वाले पार्ट्स, खासकर मेमोरी कंपोनेंट्स, काफी महंगे हो गए हैं। जब पार्ट्स महंगे हुए तो कंपनियों को फोन्स की कीमतें बढ़ानी पड़ीं।कीमतें बढ़ते ही बजट सेगमेंट के खरीदारों ने अपनी जेब का ध्यान रखते हुए महंगे 5G फोन्स से दूरी बनाना शुरू कर दिया।
भारतीय स्मार्टफोन ब्रांड Lava International के सीनियर वीपी और प्रॉडक्ट हेड सुमित सिंह ने बताया कि 15,000 रुपये से कम बजट में एक ऐसा 5G फोन बनाना बहुत मुश्किल हो गया है जिसमें फीचर्स से समझौता न करना पड़े।उन्होंने कहा कि मार्केट में कंपोनेंट्स के रेट तो काफी बढ़ गए हैं, लेकिन आम कस्टमर की खरीदने की ताकत उस हिसाब से नहीं बढ़ी है।सुमित सिंह के अनुसार, कस्टमर को सिर्फ सबसे सस्ता फोन नहीं चाहिए, बल्कि उसे एक ऐसा फोन चाहिए जो वैल्यू फॉर मनी हो, जिसमें तगड़े स्पेसिफिकेशन्स और लंबे समय तक चलने वाला अच्छा एक्सपीरियंस मिले।
सिर्फ Lava ही नहीं, बल्कि Xiaomi, Infinix और Realme जैसे बड़े ब्रांड्स ने भी इस साल नए 4G फोन्स मार्केट में उतारे हैं। काउंटरपॉइंट के रिसर्च डायरेक्टर तरुण पाठक का मानना है कि यह बदलाव कोई थोड़े समय का ट्रेंड नहीं है।कंपोनेंट की कीमतें इतनी जल्दी कम होने वाली नहीं हैं।इसलिए कंपनियों के पास यही ऑप्शन बचता है कि वो कम दाम में ज्यादा फीचर्स वाले 4G फोन्स ऑफर करें।भारतीय बायर्स भी अब सिर्फ 5G नेटवर्क स्पीड के पीछे भागने के बजाय पूरे फोन के ओवरऑल परफॉरमेंस को तवज्जो दे रहे हैं।यही वजह है कि 4G फोन अब एक समझदारी भरा और वैल्यू-फॉर-मनी ऑप्शन बन चुका है।

