विभिन्न पार्टियों के कांग्रेस में विलय की संभावना बीजेपी का बिगड़ेगी खेल!

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पश्चिम बंगाल में 4 मई को विधानसभा चुनाव का परिणाम आया, जिसमें बीजेपी को अप्रत्याशित सफलता मिली। बीजेपी के 208 उम्मीदवारों ने चुनाव में जीत हासिल की और ममता बनर्जी की नेतृत्व वाली टीएमसी 80 सीटों पर सिमट गई। खुद ममता बनर्जी भवानीपुर सीट पर सुभेन्दु अधिकारी से चुनाव हार गई। इसके बाद सुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बन गए। इसके बाद शुरू हो गया पश्चिम बंगाल में नया खेला। नया खेला मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि चुनाव के दौरान तो पश्चिम बंगाल में पहले भी खेला हुआ करता था। 2022 के चुनाव में तो ममता बनर्जी खुद ही चुनाव प्रचार के दौरान खेला होवे गई खेला होवे की बातें किया करती थीं। लेकिन इस बार असली खेला चुनाव की बात शुरू हुआ। ममता बनर्जी के 80 में से 60 विधायक बागी बन बैठे और विधानसभा में भी इन लोगों को विधानसभा अध्यक्ष ने टीएमसी के बागी विधायक के रूप में अलग जगह आवंटित कर‌ दिया। इन बागी विधायकों में से ही एक ऋतु व्रत बनर्जी इस समय पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता विपक्ष भी बन गए हैं। टीएमसी के इन बागी विधायकों की खेला के बाद ममता बनर्जी को दूसरा झटका तब लगा जबकि टीएमसी के सांसदों ने भी बगावत कर दी। टीएमसी के 20 सांसद ने टीएमसी छोड़कर चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड लेकिन अनरिकॉग्नाइज्ड एक राजनीतिक पार्टी नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर लिया। यहां तक तो बीजेपी के लिए सब कुछ बल्ले बल्ले था। लेकिन इसके बाद देश स्तर पर जो एक दूसरा राजनीतिक खेला की पृष्ठभूमि बनी, उससे बीजेपी पर भी बड़ा खतरा मंडराने लगा। पहले चर्चा उस खेला की जिसके द्वारा बीजेपी को 2029 के आम चुनाव में सत्ता से बेदखल करने की योजना बनने लगी और उसके बाद इसे रोकने के लिए बीजेपी के द्वारा खेले जाने वाले खेला की।

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी पार्टी की दुर्दशा से पूर्व महाराष्ट्र और बिहार के हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी के द्वारा उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी शिवसेना यूवीटी , शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी एनसीपी शरद पवार और तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाली पार्टी आरजेडी की दुर्गति हो चुकी थी। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी की दुर्गति के तुरंत बाद इंडिया अलायंस की एक बड़ी बैठक हुई। यहां पहले सोनिया गांधी ने ममता बनर्जी को अपनी पार्टी टीएमसी को कांग्रेस में विलय करने की सलाह दी ताकि टीएमसी पार्टी की और दुर्दशा ना हो सके और ममता बनर्जी तथा उसके भतीजे अभिषेक बनर्जी को कुछ मलाई चखने का मौका मिल जाए।

सोनिया गांधी द्वारा ममता बनर्जी को दिए गए इस प्रस्ताव के बाद इन दोनों नेत्रियों की बाद में भी इस विलय को लेकर बैठक हुई और अभिषेक बनर्जी तथा राहुल गांधी के बीच भी बैठक हुई। इन बैठकों में और क्या-क्या बातें हुई यह तो सामने नहीं आई, जो बातें सामने आई उसमें प्रमुख थी, ममता बनर्जी को राज्यसभा का पद देना और उन्हें पश्चिम बंगाल में अपने मन से कांग्रेस को चलाने की खुली छूट देना। अभिषेक बनर्जी को भी कांग्रेस का महासचिव बनाए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद शिवसेना यूबीटी के नेता संजय राउत का एक बयान आया कि शरद पवार को भी महाराष्ट्र में कांग्रेस की कमान संभाल लेना चाहिए और शिवसेना यूवीटी तथा एनसीपी पवार पार्टी का विलय भी कांग्रेस के साथ कर दिया जाना चाहिए। तेजस्वी यादव के आरजेडी पार्टी की कांग्रेस पार्टी में विलय की बात उठने लगी। हां अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी के कांग्रेस में विलय की बात सामने नहीं आई क्योंकि उत्तर प्रदेश में तो समाजवादी पार्टी कांग्रेस को अपने रहमो-करम पर रखना चाहती है।

कांग्रेस में इन पार्टियों का विलय होगा या नहीं यह अभी पूरी तरह से नेपथ्य में है, लेकिन इससे पहले ही यह पार्टी और इसके कुछ सहयोगी मीडियाकर्मी इस बात की हवा उड़ाने में लग गए कि कांग्रेस में इन पार्टियों के विलय के पश्चात अब यह कांग्रेस स्वतंत्रता संग्राम के समय का कांग्रेस बन गया है। तब कांग्रेस का उद्देश्य अंग्रेजी सरकार को उखाड़ फेंकना था और अब वर्तमान कांग्रेस का उद्देश्य पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को उखाड़ फेंकना है क्योंकि पीएम मोदी एक फासीवादी चेहरा बन गया है , जो संविधान को बदलकर देशवासियों की चुनी हुई सरकार की जगह अपनी मनमानी वाली सरकार देश पर अप्रत्यक्ष रूप से थोप चुकी है। इसका दावा है कि विभिन्न पार्टियों के कांग्रेस में विलय के बाद पूरे देश की जनता इसके साथ जुड़ गई है और वर्ष 2029 के चुनाव में यह बीजेपी की नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को उखाड़ फेंकेगी।

अभी तो कांग्रेस में इन पार्टियों का विलय हुआ भी नहीं है, ऐसे में अभी तो कांग्रेस में इन पार्टियों के नेता भी नहीं आए हैं तो फिर जिस जनता के भरोसे ये नेतागण 2029 में आम सभा चुनाव में जीत कर सरकार बनाने की बात कर रहे हैं यह क्या है ?

कांग्रेस के नेता राहुल गांधी हों या शिवसेना यूबीटी के नेता उद्धव ठाकरे हों,एनसीपी पवार के नेता शरद पवार हो या आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव हों या फिर ममता बनर्जी जिन्हें सोनिया गांधी ने कांग्रेस में विलय करने का निमंत्रण दिया है, ये सभी ने नेता इस बात को जानते हैं कि ये तमाम नेता अगर कांग्रेस में शामिल हो भी जाते हैं तो भी उनके समर्थक इस नए रूप में कांग्रेस के पक्ष में आ ही जाएगी या जरूरी नहीं। तब बिना विलय किये ही ये लोग इतना उछल कूद क्यों मचा रहे हैं। दरअसल ये इस उछल कूद से जनता को अपने पक्ष में करने का प्रयास कम कर रहे हैं और उद्योगपतियों को धमका कर उनसे धन उगाही का प्रयास ज्यादा जोर-जोर से कर रहे हैं। विश्वस्त सूत्रों से पता चला है की दिल्ली और मुंबई में इन लोगों ने अपना कार्यालय खोलकर उद्योगपतियों और व्यवसाईयों को यह कहकर धमकाना शुरू कर दिया है कि आगामी आम सभा चुनाव में उनकी ही सरकार बनने जा रही है, इसलिए जैसे बीजेपी को गुप्त रूप से धन देते हो वैसे हमारी पार्टी को भी देना शुरू कर दो ,नहीं तो आगामी चुनाव के बाद बोरिया बिस्तर गोल करना पड़ सकता है।

इधर बीजेपी भी कांग्रेस में विभिन्न पार्टियों के विलय और उसके क्रियाकलापों को देखते हुए विपक्षी गठबंधन पर प्रहार करने में जुट गई है। कांग्रेस में विभिन्न पार्टियों के विलय के उपरांत परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा, लेकिन एक बड़ा खतरा बीजेपी के लिए जरूर उत्पन्न हो सकता है,अगर सभी विपक्षी पार्टियां कांग्रेस में विलय कर जाती है तब।हालांकि इसकी संभावना बिल्कुल भी नहीं है ,लेकिन इसके बावजूद बीजेपी इन पार्टियों के मठाधीशों को अपने पक्ष में करने में जुट गई है। कांग्रेस से टूटकर बनी पार्टियों के मठाधीशों को बीजेपी की तरफ से संदेश दिया जा रहा है कि आपकी पार्टी के दफ्तरों और संपत्तियों पर राहुल गांधी की नजर है। अभी भले ही हुए आपको अपने-अपने राज्य में अपना क्षत्रप नियुक्त कर रहे हैं। लेकिन एक बार आप कांग्रेस में आ गए तो फिर कांग्रेस के नेता राहुल गांधी, सोनिया गांधी आप पर पहले ही की तरह अपने मनमानी करेंगे और तब आपके पास कोई विकल्प नहीं बचेगा, शिवाय इसके की एक बार फिर से कांग्रेस से टूट कर अलग हो जाएं। लेकिन टूट कर अलग होने पर बड़ा खतरा यह है कि इतने दिनों में जो आपने अपना वोट बैंक बनाया है,जो परिसंपत्तियों अर्जित की है,वह दोबारा आपको मिलने से रहा। अभी अपनी पार्टी के मठाधीश की नाते आपका महत्व है, लेकिन कांग्रेस में जाने के बाद आपका यह सब खत्म हो जाएगा और कांग्रेस सत्ता में आने वाली भी नहीं है ,इसलिए आपको वहां कोई मंत्री पद भी नहीं मिलने वाला है। हां! अगर आप उसकी जगह मेरे गठबंधन का हिस्सा बनते हैं तो भविष्य में कुछ ना कुछ बड़ा लाभ चाहे वह मंत्री पद का हो या फिर किसी बोर्ड या निगम के अध्यक्ष पद का आपको मिल जाएगा। जब आप कांग्रेस से टूट कर अलग हुए थे तो हमने ही आपको‌ सहयोग दिया था। ममता बनर्जी का उदाहरण देते हुए बीजेपी कह रही है कि उसने तो ममता बनर्जी को केंद्र में रेलमंत्री बनाया था।

बीजेपी का यह तीर ठीक निशाने बैठा है।। महाराष्ट्र में एनसीपी शरद पवार की नेत्री सुप्रिया सूले ने यह कहकर कि बरसात में रेनकोट पहनेगी या छाता लेकर चलेंगे, यह फैसला तो तब किया जाएगा जब बरसात आएगी। सुप्रिया सूले के
इस बयान के बाद अब विपक्षी राजनीतिक दलों के कांग्रेस में विलय की चर्चा कुछ दिनों से बंद हो गई है।

अब देखना दिलचस्प होगा की बंगाल के टीएमसी सांसदों को तोड़कर बीजेपी को समर्थन करने वाली एनसीपीआई में आए सांसदों के सहारे बीजेपी जो 2024 के आम चुनाव में अकेले 240 सांसदों के जीत पर सीमित हो जाने के कारण अपने बल पर किसी बड़े बिल को संसद में पास करने में असमर्थ हो गई थी। इससे यह कितना राहत मिलती है कि यह मानसून सत्र के दौरान नारी शक्ति वंदन अधिनियम और परिसीमन जैसे मामले जिसे यह बजट सत्र में पास करने में असमर्थ हो गई थी, उसे पास करवा कर आधी आबादी यानी महिला पर अपना प्रभाव बनाकर वर्ष 2029 के चुनाव में आसान जीत प्राप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाने में सफल होगी या कांग्रेस विभिन्न पार्टियों के विलय के बाद बीजेपी के समक्ष 2029 ई के आमसभा चुनाव में कोई बीजेपी को हराकर सत्ता में आने में सफल होगी।।

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