एनडीए के भीतर इन दिनों सियासी दबाव बनाने का खेल चरम पर है। गठबंधन का साथी दल लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) अभी से ही अगला सीएम की भविष्यवाणी करने में लगा है तो जनता दल यू की तरफ से शगूफा ये छूटा है कि सत्ता की हिस्सेदारी के सवाल पर विधान परिषद के सभापति का पद जदयू को मिलना चाहिए। इधर, यह दबाव कुछ ज्यादा ही तेज बनाया जाने लगा है। चर्चा यह है कि हाल के दिनों में इस बात में सहमति एनडीए के शीर्ष नेतृत्व में बन गई है कि विधानसभा अध्यक्ष का पद भाजपा के पास और विधान परिषद के सभापति का पद जनता दल यू की तरफ शिफ्ट होने जा रहा है। अचानक से यह बदलाव क्यों हो रहा है, समझते हैं।
बिहार में जब एनडीए की सरकार बनी तो यह एक अंडरस्टैंडिंग बनी थी कि विधानसभा अध्यक्ष और सभापति में एक-एक पद गठबंधन की दोनों बड़ी पार्टियां यानी कि बीजेपी और जदयू के बीच ये दोनों पद बंट जाएगी। नीतीश कुमार जब आरजेडी के साथ में मिल कर सरकार बनाई थी तो आरजेडी के विधायक ज्यादा थे तो अवध बिहारी चौधरी विधानसभा अध्यक्ष बने थे और जेडीयू से देवेश चंद्र ठाकुर सभापति बने।
वर्ष 2025 विधानसभा चुनाव के बाद जब एनडीए की सरकार बनी तो नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने और प्रेम कुमार ने विधानसभा अध्य्क्ष पद संभाले। लेकिन कुछ माह बाद जब मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी पर मुहर लगी उसी वक्त यह तय हो गया था कि विधानसभा अध्यक्ष बीजेपी के पास और सभापति का पद जेडीयू को। लेकिन तब बिहार के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा रही कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मूव के कारण बीजेपी ने विधानसभा अध्यक्ष और बिहार विधान परिषद के सभापति दोनों पद ही बीजेपी के नाम कर लिया।
इधर जनता दल यू का सांगठनिक चुनाव हुआ। अध्यक्ष, कार्यकारी अध्यक्ष, सचिव, उपाध्यक्ष, बने उस दौरान पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद और सभापति पद को फिर से हासिल करने की आवाज उठी। यह आवाज काफी जोरदार थी। मुख्यमंत्री के नाम पर तो नीतीश कुमार ने स्वीकृति नहीं दी पर सभापति के नाम पर जदयू के एमएलसी बने, इस पर जरूर सहमति बन गई। और अभी एनडीए गठबंधन के बीच अभी इसी बात पर चर्चा परवान पर है।
जेडीयू के भीतर भी सभापति पद को ले कर अभी धमाल मचा हुआ है। लेकिन पार्टी के भीतर अभी संजय झा का बोलबाला है। और अभी संजय झा, विजय चौधरी और लालन सर्राफ की तिकड़ी बनी हुई है। इनकी चली तो ललन सर्राफ का सभापति बनना तय है। अगर नीतीश कुमार इस मसले पर हस्तक्षेप हुआ या उन्होंने थोड़ा भी इंटरेस्ट लिया तो फिर रामवचन राय भी सभापति बन सकते हैं।

