बीरेंद्र कुमार झा
महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे सरकार के लिए अब तक मराठा आंदोलन ही एक टेंशन बना हुआ था लेकिन ओबीसी जातियों की गोलबंदी भी अब अलग से चिंता बढ़ा रही है।यही नहीं ओबीसी बिरादरियों को गोलबंद करने में एकनाथ शिंदे सरकार के ही मंत्री छगन भुजबल जुटे हुए हैं।अजीत पवार के साथ सरकार का हिस्सा बने छगन भुजबल तो अब इस ओबीसी के मुद्दे पर बागी तेवर भी अपनाने लगे हैं। छगन भुजबल ने कहा यदि मराठा आरक्षण के खिलाफ मेरे स्टैंड के आधार पर इस्तीफा मांगा जाता है तो मैं मंत्री पद छोड़ने के लिए भी तैयार हूं।उन्होंने कहा कि मैं ओबीसी के लिए विधायकी त्यागने के लिए तैयार हूं ।
भुजबल ओबीसी मुद्दे विधायकी तक से इस्तीफा देने की कर रहे बात
दरअसल छगन भुजबल लगातार इस बात का विरोध कर रहे हैं कि मराठा समाज के लोगों को कुनबी जाति का सर्टिफिकेट दिया जाए,जिसके तहत उसे ओबीसी आरक्षण मिलता है।वह कहते हैं कि इससे ओबीसी वर्गों के अधिकार प्रभावित होंगे। उन्होंने हाल ही में जलाना में ओबीसी वर्ग की एक बड़ी सभा की थी।उसकी इस मूहिम में कांग्रेस के भी कई नेता साथ हैं। उन्होंने इस मामले में सरकार के खिलाफ जाते हुए इस्तीफा तक की भी बात कर दी है। छगन भुजबल ने कहा कि मैं इस्तीफा देने के लिए तैयार हूं यदि मेरे स्टैंड की वजह से कहा जाता है तो मैं फिर विधायकी भी छोड़ दूंगा।मैं अपनी पार्टी के आदेश का पालन करूंगा,जिसमें अजीत पवार सुप्रीम है। इसके अलावा कैबिनेट में सिंदे मेरे बॉस हैं, जबकि बीजेपी गठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी है।यदि वह मुझे इस्तीफा देने को कहते हैं तो में इस्तीफा दे दूंगा। मैं हमेशा ओबीसी समाज के लिए काम किया है और आगे भी करता रहूंगा। यही नहीं जलाना की रैली में तो छगन भुजबल को मुख्यमंत्री बनाने के नारे भी लगने लगे थे।
सरकार मराठा के पक्ष में झुकी तो उनका विरोध होगा तेज
यह पूछे जाने पर की सरकार मराठा आंदोलन के आगे झुकते दिख रही है।छगन भुजबल ने कहा कि मैं तो अपनी बात कहता ही रहूंगा।सरकार और इस मामले की सुनवाई करने वाले जजों को इस मामले में व्यापक दृष्टिकोण रखना चाहिए।मराठा आरक्षण विचार करते हुए यह ध्यान रखना चाहिए इससे ओबीसी समाज के साथ किसी प्रकार का अन्याय ना हो सक।
मराठा भी बना रहे दबाव
गौरतलब है की कि मराठा आंदोलनकारी भी लगातार अल्टीमेटम दे रहे हैं।मनोज जरंगे पाटिल ने तो पिछले महीने आंदोलन ही इस शर्त पर खत्म किया था कि यदि 2 जनवरी तक मराठा आरक्षण पर कोई फ़ैसला नहीं हो सका,तो फिर सड़कों पर उतरकर आंदोलन किया जाएगा।

