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2 साल बाद किसान फिर सड़कों पर, एमएसपी सहित कई मुद्दों पर होगी सरकार से तकरार

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केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को शायद लोकसभा चुनाव को देखते हुए किसानों के आंदोलन की संभावना की भनक लग गई थी। ऐसे में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने हाल ही में किसानों के मसीहा कहे जाने वाले चौधरी चरण सिंह और भारतीय हरित क्रांति के जनक कहे जाने वाले एमएस स्वामीनाथन को भारत रत्न देने का ऐलान कर किसानों का समर्थन प्राप्त करने की एक चाल चली।लेकिन लगता है कि सरकार का यह दांव अब फेल हो गया है और किसान एक बार फिर से अपनी मांगों के साथ मोदी सरकार के खिलाफ आंदोलन पर अडिग हो गए हैं।नवंबर 2021 में जब किसानों ने अपना आंदोलन खत्म किया था, तब केंद्र सरकार को अपने तीन कृषि कानून को वापस लेना पड़ा था। साथ ही एमएसपी जैसे कई मुद्दों पर कानून बनाने के वायदे भी किसानों से किए करने पड़े थे।लेकिन यह सब हो ना सका। ऐसे में किस 2 साल बाद एक बार फिर से अपनी मांगों के साथ सड़कों पर आ गए हैं।

क्या है किसानों की मांग

2021 ई के आंदोलन की तरह ही इस बार भी किसान अपनी कई मांगों के साथ विरोध प्रदर्शन के लिए उतर रहे हैं।किसानों की इन मांगों में फसल उत्पादन का न्यूनतम समर्थन मूल्य एसपी की गारंटी को लेकर कानून बनाने की मांग सबसे बड़ी मांग है पूर्व में किसानों के आंदोलन समाप्त करने के दौरान सरकार ने किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून बनाने की गारंटी देने की बात कहीं भी थी। लेकिन अभी तक सरकार द्वारा इसकी अनदेखी ही की जा रही है।

2021 के किसान आंदोलन के दौरान सरकार ने आंदोलनरत किसानो के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज किए थे। किसानों का कहना है की सरकार ने पूर्व में हुए किसान आंदोलन की समाप्ति के वक्त इन मुकदमों की वापसी का भरोसा देकर भी इन मुकदमों की वापसी अभी तक नहीं की है।ऐसे में कि सरकार किसानों के खिलाफ दर्ज सारे मुकदमों को जल्द वापस करे।

2021 ईस्वी में लखीमपुर खीरी में कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे 4 सिख किसानों को कथित तौर पर गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी की गाड़ी ने कुचल दिया था।किसान सरकार से उसे घटना में मारे गए लोगों के परिवारों को नौकरी और दोषियों को सजा दिलाने की मांग कर रहे हैं।

किसान संगठनों का कहना है सरकार ने 2021 में किसान आंदोलन को समाप्त करते वक्त सबसे बड़ा वादा स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के मुताबिक किसानों को फसल के दाम देने का किया था। सरकार ने एमएस स्वामीनाथन को भारत रत्न से सम्मानित कर दिया, लेकिन सरकार उनकी इस रिपोर्ट को लागू नहीं कर रही है।गौरतलब है की स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट में किसानों के फसल लागत से डेढ़ गुना कीमत देने की सिफारिश की गई है।इसके अलावा किसानों को प्रदूषण कानून से मुक्त रखने का वादा किया गया था लेकिन सरकार ने कोई भी वादा पूरा नहीं किया।

किसान संगठन किसानों और खेत मजदूर के लिए नियमित पेंशन की भी मांग कर रहे हैं, ताकि किसानों को प्राकृतिक आपदा और अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों में कुछ राहत मिल सके।

किसान और सरकार के बीच पहली दौर की वार्ता विफल

चंडीगढ़ में सोमवार की रात को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और अर्जुन मुंडा के साथ किसान संगठनों की साढे 5 घंटे की बैठक बेनतीजा रही।किसानों का कहना है कि उनका दिल्ली कूच करने का अभियान जारी रहेगा,क्योंकि किसान एसपी के मुद्दे पर किसी भी कीमत पर समझौता करने को तैयार नहीं है। किसानों का कहना है कि सरकार उनकी मांग पर गंभीर नहीं है ।

वहीं सरकार ने किसने की बातों पर विचार करने के लिए किसान संगठनों से कुछ वक्त मांगा है, लेकिन किसान संगठनों का कहना है की सरकार उनकी मांग के प्रति गंभीर नहीं है ।सरकार किसानों को कुछ भी देना नहीं चाहती हैं और सिर्फ किसान आंदोलन को टालने के लिए समय चाहती है।इसलिए किसान मंगलवार को दिल्ली कूच करना प्रारंभ कर देंगे ।इसके अलावा किसान संगठनों ने 16 फरवरी को भारत बंद भी बुलाया है।

दिल्ली कूच कर रहे किसानों की तैयारी

दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक 13 फरवरी के दिल्ली मार्च में लगभग 20000 किसान 2500 ट्रैक्टर से दिल्ली पहुंच सकते हैं।हरियाणा और पंजाब के कई बॉर्डर एरिया में भी प्रदर्शनकारी मौजूद है।यह प्रदर्शनकारी दिल्ली में दाखिल होने के लिए तैयार हैं।प्रदर्शनकारी छोटी-छोटी टुकड़ियों में ट्रैक्टर और ट्राली के साथ मौजूद है।

किसान आंदोलन को लेकर सरकार की तैयारी

किसान आंदोलन के दिल्ली कूच कार्यक्रम को देखते हुए सरकार ने भारी भरकम अर्धसैनिक बलों की तैयारी आई की है 5000 से ज्यादा सैनिक वालों के जवान दिल्ली की अलग-अलग लोकेशन पर मौजूद हैं। दिल्ली के सभी बॉर्डर पर 50 साल सैनिक बलों की कंपनियां तैनात कर दी गई है। 10 कंपनियों को अभी तैनात किया गया है ।37 कंपनियां पहले से ही मौजूद है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर स्टैंड बाय मोड में मौजूद पांच अर्ध सैनिक वनों की कंपनियों को तैनात किया जाएगा।फिलहाल यह सभी कंपनियां दिल्ली पुलिस के साथ कानून व्यवस्था को बनाए रखने में मदद कर रही है। पड़ोसी राज्यों से दिल्ली के सीमाओं पर कंक्रीट के बैरिकेडिंग समेत कई व्यवस्थाएं की गई है ताकि, किसान के दिल्ली कूच आंदोलन पर नियंत्रण रखा जा सके।

सरकार ने आंदोलन किसानों को शांतिप्रिय ढंग से अपना आंदोलन करने और सरकार को इनकी मांगों पर विचार करने के लिए कुछ समय देने का आह्वान किया है। साथ ही साथ सरकार ने इस बात को लेकर भी चेतावनी जारी की है कि किसी भी हुडदंगियों को किसान के भेष में हुड़दंग करने की इजाजत नहीं दी जाएगी और उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की सीजेआई से अपील

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ को पत्र लिखकर किसान आंदोलन में गलती करने वाले किसानों के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आदिश अग्रवाल के लिखे पत्र में कहा गया है का आंदोलन की वजह से वकीलों के अदालत की कार्यवाही में भाग लेने में विफल रहने की स्थिति में कोई प्रतिकूल आदेश जारी नहीं किया जाए। उन्होंने वकीलों की मुश्किलों को सहानुभूति पूर्वक समझते हुए एक तरफा निर्देश न देने का अनुरोध किया है।

गुपचुप तरीके से सत्ताधारी राजनेताओं के घर के बाहर जमा हो सकते हैं किसान नेता

किसान आंदोलन को लेकर खुफिया रिपोर्ट है कि कुछ किसान गुपचुप तरीके से पहले आकर प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, कृषि मंत्री और बीजेपी की बड़े नेताओं के घर के बाहर इकट्ठा हो सकते हैं दिल्ली में घुसने के लिए किसान नेता बच्चों और महिलाओं को आगे कर सकते हैं। इस वजह से दिल्ली के सभी बॉर्डर और दिल्ली के अंदर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

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