स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा अयोध्या में संविधान और कानून की रक्षा के लिए चलवाई थी गोली

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एक तरफ जहां 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर लोगों का उमंग और उत्साह का वातावरण देखा जा रहा है,तो वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य इस रंग में भंग करने वाले अपने एक बयान को लेकर फिर से चर्चा में घिर गए हैं।वैसे भी वे कभी हिंदू धर्म तो कभी रामायण पर विवादित बयान देकर सुर्खियों में रहने के आदी रहे हैं। हालिया मामला उनके द्वारा कासगंज में मीडिया से बातचीत करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के अयोध्या में विवादित ढांचे को बचाने के लिए गोली चलाने का समर्थन करने से जुड़ा हुआ है। मुलायम सिंह के समर्थन को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि मुलायम सिंह यादव जो उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे,ने संविधान और कानून की रक्षा के लिए गोली चलाने के आदेश दिए थे। ऐसा करते हुए तत्कालीन मुलायम सिंह यादव की सरकार ने केवल अपना कर्तव्य निभाया था। रामभक्तों की भावना को भड़काते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि तत्कालीन मुलायम सिंह की सरकार ने अराजक तत्वों पर गोली चलवाई थी।

रामभक्त कारसेवकों को बताया अराजक तत्व

मीडिया को दिए एक बयान में स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामभक्त कारसेवकों को लेकर कहा कि अयोध्या में बिना किसी न्यायपालिका के निर्देश पर,बिना किसी प्रशासनिक आदेश पर बड़े पैमाने पर अराजक तत्वों ने तोड़फोड़ की थी।तत्कालीन सरकार ने संविधान की रक्षा और अमन – चैन कायम रखने के लिए उस समय गोलियां चलवाई थी। ऐसा करना सरकार का अपना कर्तव्य था और मुलायम सिंह यादव की तत्कालीन सरकार ने अपना कर्तव्य निभाया था ।

सरकार ने स्वामी प्रसाद मौर्य पर किया पलटवार

समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य की इस बयान के बाद सरकार की तरफ से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री जयवीर सिंह ने स्वामी प्रसाद मौर्य को बयानवीर बताया है। उन्होंने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य विवादित बयानों दे दे कर बयानवीर हो गए हैं। वह आए दिन कोई न कोई विवादित बयान दे रहे हैं। भगवान राम उन्हें भी सद्बुद्धि प्रदान करें।

क्या था मुलायम सिंह यादव द्वारा गोलियां चलवाने का मामला

गौरतलब है की 1990 ईस्वी में जिस समय अयोध्या में कारसेवा के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में कारसेवक जुटे थे, उस समय उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे।उन्होंने अयोध्या के हनुमानगढ़ी जा रहे कारसेवकों को रोकने के लिए गोलियां चलाने का निर्देश दिया था। उस दौरान बड़े पैमाने पर साधु संत और राम भक्त कारसेवक अयोध्या के लिए निकले थे। तब उत्तर प्रदेश की मुलायम सरकार ने इन लोगों के अयोध्या में प्रवेश को रोकने के लिए वहां कर्फ्यू लगा रखा था। पुलिस ने उस दौरान विवादित ढांचे के पास बैरिकेडिंग लगा रखी थी। जब श्रद्धालुओं को हनुमानगढ़ी के रास्ते से प्रवेश करने से रोका गया तो वहां भीड़ बेकाबू हो गया। इसके बाद जिला प्रशासन ने रामभक्त कारसेवकों पर गोली चला दी थी,जिससे सरकारी आंकड़ों के अनुसार पांच लोगों के मौके पर ही मौत हो जाने की बात कही गई थी,हालांकि साधु – संत और कारसेवक पुलिस से मारने वालों की संख्या कहीं अधिक बता रहे थे।यह घटना 30 अक्टूबर 1990 को घटित हुई थी।

इस घटना के बाद अयोध्या से लेकर पूरे उत्तर प्रदेश का माहौल गर्म हो गया था और फिर दो दिन बाद ही 2 नवंबर को बड़ी संख्या में कारसेवक फिर से हनुमानगढ़ी पहुंच गए थे।तब इस मामले को किसी तरह से निबटा लिया,लेकिन धीरे-धीरे यह मामला देश के विभिन्न भागों में रह रहे रामभक्तों के बीच सुलगता रहा और इस घटना के 2 साल बाद 6 दिसंबर 1992 है को कारसेवकों ने फिर से अयोध्या कुछ किया था और विवादित ढांचे को गिरा दिया था।

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