बीरेंद्र कुमार झा
बीजेपी सांसद सुशील कुमार मोदी की अध्यक्षता में संसदीय समिति की बैठक हुई जिसमें उन्होंने समान नागरिक संहिता बनाने की स्थिति में पूर्वोत्तर एवं अन्य क्षेत्रों के आदिवासियों को इसके दायरे से बाहर रखने की वकालत की। वहीं कुछ विपक्षी दलों के सदस्यों ने इस विवादित मुद्दे पर विचार विमर्श शुरू करने की विधि आयोग की कदम पर सवाल उठाया।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों ने यूसीसी पर जोर दिए जाने के बीजेपी के प्रयास को लोकसभा चुनाव से जोड़ा
इस बैठक में कांग्रेस और डीएमके समेत ज्यादातर विपक्षी दलों के सदस्यों ने समान नागरिक संहिता यूसीसी पर बीजेपी द्वारा जोर दिए जाने को अगले लोकसभा चुनाव से जोड़ा। बैठक में शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने कहा कि कई देशों में समान नागरिक संहिता हैं। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों की चिंताओं पर भी ध्यान देने को कहा ।संजय रावत ने इस विषय पर विचार विमर्श की प्रक्रिया शुरू करने के समय को लेकर भी सवाल उठाए।
कांग्रेस सांसद ने विधि आयोग की कदम पर उठाया सवाल
कांग्रेस सांसद विवेक तंखा और डीएमके सांसद पी विल्सन ने यूसीसी पर लोगों को अन्य विधायकों से सुझाव आमंत्रित करने की विधि आयोग के कदम पर सवाल उठाते हुए अलग-अलग लिखित बयान सौंपा। तंखा और विल्सन ने कहा कि परिवार कानून में सुधार को लेकर 31 अगस्त 2018 की विधि आयोग के परिचर्चा पत्र को देखा है और इसमें यूसीसी को इस स्तर पर न तो जरूरी और ना ही वांछनीय बताया गया है।
21 वे विधि आयोग के परिचर्चा पत्र को कमतर करना चाहते हैं
डीएमके सांसद एवं समिति के एक अन्य सदस्य पी विल्सन ने अपने ट्वीट में कहा कि आज विधि एवं न्याय पर संसदीय समिति की बैठक से पहले मैंने समिति के अध्यक्ष सुशील मोदी को समान नागरिक संहिता पर विधि आयोग के आगे लोक विचार विमर्श करने को लेकर पत्र सौंपा। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात पर आश्चर्य है कि जब सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले 21 वें विधि आयोग ने विस्तृत अध्ययन कराया था और 2018 में यह निष्कर्ष दिया था कि यूसीसी वांछनीय नही है,तब वर्तमान विधि आयोग इस मुद्दे को फिर से खोलने और आगे विचार विमर्श करने पर जोर दे रहा है।विल्सन ने सवाल किया कि क्या वे 22 विधि आयोग के परिचर्चा पत्र को कमतर करना चाहते हैं?
समान नागरिक संहिता बीजेपी का चुनावी मुद्दा
गौरतलब है कि समान नागरिक संहिता लंबे समय से बीजेपी के चुनावी मुद्दा में से एक प्रमुख मुद्दा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में भोपाल में समान नागरिक संहिता यानि यूसीसी की पुरजोर वकालत करते हुए सवाल किया था कि दोहरी व्यवस्था से देश कैसे चलेगा।उन्होंने कहा था कि इस संवेदनशील मुद्दे पर मुसलमानों को उकसाया जा रहा है।

