बीरेंद्र कुमार झा
अनुच्छेद 370 मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर ली है। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संविधान पीठ ने 16 दिन तक दोनों पक्षों की जिरह सुनी और 5 सितंबर 2023 को इसपर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।इस दौरान दोनों पक्षों ने संवैधानिक पहलुओं से लेकर ऐतिहासिक घटनाक्रम पर चर्चा की।सुप्रीम कोर्ट सोमवार को इसपर अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाएगा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सोमवार को अनुच्छेद 370 पर फैसला सुनाने को लेकर अभी से ही राजनीति शुरू हो गई है।
महबूबा को सुप्रीम कोर्ट से नैसर्गिक न्याय न मिलने की आशंका
सुप्रीम कोर्ट का अनुच्छेद 370 पर फैसला यों तो सोमवार को आना है, लेकिन उससे पहले ही पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने यह का राजनीतिक माहौल को गर्म करना शुरू कर दिया कि जम्मू कश्मीर प्रशासन की गतिविधियां संकेत दे रही है कि उच्चतम न्यायालय द्वारा संविधान के अनुच्छेद 370 से जुड़ी याचिका पर सुनाया जाने वाला फैसला देशहित के खिलाफ हो सकता है। महबूबा मुफ्ती ने अनंतनाग में पत्रकारों से कहा की कुछ दिनों से हम देख रहे हैं विभिन्न दलों विशेष कर पीडीपी के कार्यकर्ताओं के नाम वाली सूचियां थानों के माध्यम से ली जा रही है। इससे ऐसा लगता है कि सुप्रीम कोर्ट से कोई ऐसा निर्णय आने वाला है जो इस देश और जम्मू कश्मीर के पक्ष में ना हो। बीजेपी के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कुछ ऐसी एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं जो काफी दुर्भाग्यपूर्ण है।
सुप्रीम कोर्ट को निर्णय देने के सिखाए गुर
महबूबा मुफ्ती ने जोर देकर कहा कि यह सुनिश्चित करना शीर्ष अदालत की जिम्मेदारी है कि वह भारतीय जनता पार्टी के झंडे को आगे ना बढ़ाए, बल्कि देश और उसके संविधान के अखंडता को बरकरार रखें। महबूबा मुफ्ती ने कहा कि अदालत के फैसले से स्पष्ट होना चाहिए कि बीजेपी के नेतृत्व वाले केंद्रीय सरकार द्वारा 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के संबंध में लिया गया निर्णय अवैध और संवैधानिक था।
उच्चतम कोर्ट पर लगाए कई तोहमत
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि एक तो उच्चतम न्यायालय ने मामलों की सुनवाई में पहले ही काफी समय लगा दिया। इसमें इसे 5 साल लग गए। तब उच्चतम न्यायालय ने अपने पिछले फैसले में कहा कि जम्मू कश्मीर के संविधान सभा को छोड़कर कोई भी अनुच्छेद 370 को रद्द नहीं कर सकता है। महबूबा मुफ्ती ने कहा इसलिए मुझे लगता है निर्णय सरल होना चाहिए की 5 अगस्त 2019 को जो कुछ भी अनुच्छेद 370 को लेकर केंद्र सरकार द्वारा किया गया वह अवैध, असंवैधानिक, जम्मू कश्मीर और यहां के लोगों से किए गए वादों के खिलाफ था।
अनुच्छेद 370 पर फैसला हो सकता है एक फिक्स मैच
पीडीपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि पुलिस इन दिनों काफी सक्रिय हो गई है और यह पीडीपी से जुड़े लोगों को हिरासत में लेने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि इससे संदेह पैदा हो गया है कि कहीं कोई फिक्स मैच तो नहीं होने वाला है। उच्चतम कोर्ट पर आक्षेप लगाते हुए उन्होंने कहा कि आप भारतीय संविधान और लोकतंत्र को जीवित रखना चाहते हैं या बीजेपी के झंडे को या आपको तय करना है लेकिन मैं देख रहा हूं कि पुलिस पिछले कुछ दिनों से काफी सक्रिय हो गई है वह यह सूची बना रही है ताकि फैसले से पहले लोगों को हिरासत में लिया जा सके यह संदेश पैदा करता है की कहीं कोई फिक्स मैच तो नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की टिप्पणी पर बीजेपी का पलटवार
जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी की जम्मू कश्मीर इकाई के अध्यक्ष रविंद्र रैना ने कहा कि अनुच्छेद 370 से जुड़ी याचीकाओं को लेकर उच्चतम न्यायालय या उसके फैसले पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि उच्चतम न्यायालय या उसके फैसलों पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इसे अदालत की अवमानना माना जाता है। देश की अदालत सर्वोच्च है,और इससे बढ़कर कुछ नहीं है। मुझे यकीन है कि जम्मू कश्मीर और देश के सभी 140 करोड लोग इस फैसले का दिल से सम्मान करेंगे और इसे स्वीकार करेंगे ।
