बीरेंद्र कुमार झा
सुप्रीम कोर्ट ने बिना पर्ची और आईडी के ₹2000 के नोटों को बदलने के नोटिफिकेशंस को चुनौती देने वाली याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने के मुद्दे पर अपनी रजिस्ट्री से रिपोर्ट मांगी है। याचिकाकर्ता एडवोकेट अश्वनी उपाध्याय ने इस मामले में तत्काल सुनवाई की अपील की है। इसके बाद जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस राजेश बिंदल की अवकाश पीठ ने यह आदेश जारी किया। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने नोटिफिकेशन को चुनौती देने वाली उपाध्याय की याचिका पर 1 जून को तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया था। पीठ ने कहा था कि वह गर्मियों की छुट्टी के दौरान इस तरह की याचिकाओं पर सुनवाई नहीं करेगी।
अब तक 80 हजार करोड़ रुपये के 2000 वाले नोट बदले गए
अश्वनी उपाध्याय ने कहा कि यह मुद्दा बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि माओवादी, आतंकवादी और अलगाववादी ₹2000 के नोटों को बदल रहे हैं।मीडिया खबरों के अनुसार अब तक 80,000 करोड रुपए के नोट बदले जा चुके हैं। पीठ ने कहा हम मीडिया की खबरों पर नहीं जा सकते ।आप शुक्रवार को इसका उल्लेख करें। इस बीच हम रजिस्ट्री की रिपोर्ट देखेंगे।कोर्ट ने पूछा कि जब मामले का पहले ही उल्लेख किया जा चुका है तो इसे कैसे फिर से रखा जा सकता है। इससे पहले एडवोकेट उपाध्याय ने याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने की अपील करते हुए कहा था कि ₹2000 के नोटों को अपराधियों और आतंकवादियों द्वारा भी बिना किसी पहचान पत्र के बदला जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि बहुत कम समय में ₹2000 मूल्य वर्ग के नोटों के बदले बैंकों ने ग्राहकों को अन्य मूल्य वर्ग के ₹50000 करोड़ के नोट लौटाए हैं।
29 मई के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर
अश्वनी उपाध्याय ने दिल्ली हाईकोर्ट के 29 मई के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। इस याचिका में उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)और भारतीय स्टेट बैंक SBI) द्वारा ₹2000 के बैंक नोट को बिना किसी डॉक्यूमेंट के बदलने की नोटिफिकेशन को चुनौती दी थी। उल्लेखनीय है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने गत 19 मई को ₹2000 मूल्य वर्ग के नोटों को वापस लेने की घोषणा की थी इन नोटों को 30 सितंबर तक बैंक खाते में जमा किया जा सकता है या कम मूल्य के नोट से बदला जा सकता है ,हालांकि ₹2000 के मूल्य वर्ग के नोट अभी वैलिड करेंसी बने हुए हैं।

