नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2016 में केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले को सही करार दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए इससे जुड़ी सभी 58 याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने ये भी कहा कि नोटबंदी को लेकर सरकार ने सभी नियमों का पालन किया और छह महीने तक सरकार और आरबीआई के बीच इस मुद्दे को लेकर बातचीत हुई और इसके बाद फैसला लिया गया। कोर्ट ने कहा कि नोटबंदी के फैसले में कोई गड़बड़ी नजर नहीं आती और आर्थिक फैसले को नहीं पलटा जा सकता। इस फैसले को 4 जजों का बहुमत हासिल हुआ जबकि न्यायमूर्ति नागरत्ना फैसले के खिलाफ थीं। उन्होंने नोटबंदी पर सरकार के फैसले को गलत बताया।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के 2016 में 500 रुपए और 1000 रुपए के नोटों को बंद करने के फैसले को बरकरार रखा है। pic.twitter.com/gJ9xCPXFQb
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 2, 2023
पांच जजों की संविधान पीठ ने सुनाया फैसला
जस्टिस एस.ए.नजीर की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ, जिसमें जस्टिस बी.आर.गवई, ए.एस. बोपन्ना,वी. रामासुब्रमण्यम और बी.वी. नागरत्ना शामिल थेजस्टिस गवई ने फैसला सुनाते हुए कहा कि निर्णय लेने की प्रक्रिया को सिर्फ इसलिए गलत नहीं ठहराया जा सकता,क्योंकि प्रस्ताव केंद्र सरकार की ओर से आया था।

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि नोटबंदी से पहले केंद्र और आरबीआई के बीच सलाह-मशविरा हुआ था। इस तरह के उपाय को लाने के लिए एक उचित सांठगांठ थी और हम मानते हैं कि नोटबंदी आनुपातिकता के सिद्धांत से प्रभावित नहीं हुई थी।
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 2, 2023
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि आरबीआई के पास नोटबंदी लाने का कोई अधिकार नहीं है और केंद्र तथा आरबीआई के बीच परामर्श के बाद यह निर्णय लिया गया।
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 2, 2023
सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित रखा था फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक को सात दिसंबर 2022 को निर्देश दिया था कि वे सरकार के 2016 में 1000 रुपये और 500 रुपये के नोट को बंद करने के फैसले से संबंधित रिकॉर्ड पेश करें। कोर्ट ने केंद्र के 2016 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी, आरबीआई के वकील और वरिष्ठ वकील पी. चिदंबरम और श्याम दीवान समेत याचिकाकर्ताओं के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
केंद्र सरकार का कोर्ट को जवाब- आरबीआई की सलाह पर लिया फैसला
केंद्र सरकार और आरबीआई की तरफ से अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि ने नोटबंदी के पक्ष में अपनी दलीलें देते हुए कहा था कि नोटबंदी कोई अकेला कदम नहीं था बल्कि एक व्यापक आर्थिक नीति का हिस्सा था, ऐसे में ये संभव नहीं है कि आरबीआई और सरकार अलग-थलग रहकर काम करती रहें। उन्होंने कहा था कि आरबीआई और केंद्र सरकार एक-दूसरे के साथ सलाह-मशविरा करते हुए काम करते हैं।

आरबीआई ने कहा- कानून के मुताबिक हुई नोटबंदी
आरबीआई ने बताया कि सेंट्रल बोर्ड मीटिंग के दौरान आरबीआई जनरल रेगुलेशंस, 1949 कोरम से जुड़ी शर्तों का पालन किया गया। रिजर्व बैंक ने बताया है कि इस बैठक में आरबीआई गवर्नर के साथ-साथ दो डिप्टी गवर्नर और आरबीआई एक्ट के तहत नामित पांच निदेशक शामिल थे। ऐसे में कानून की उस शर्त का पालन किया गया था जिसके तहत तीन सदस्य नामित होने चाहिए।
केंद्र का तर्क- काले धन से निपटना था मकसद
नोटबंदी के फैसले के बाद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि यह जाली करेंसी, टेरर फंडिंग,काले धन और कर चोरी जैसी समस्याओं से निपटने की प्लानिंग का हिस्सा और असरदार तरीका था। यह अर्थव्यवस्था में बदलाव से जुड़े निर्णय का सबसे बड़ा कदम था। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि नोटबंदी से नकली नोटों में कमी, डिजिटल लेन-देन में बढ़ोत्तरी, बेहिसाब आय का पता लगाने जैसे कई लाभ हुए हैं। अकेले अक्टूबर 2022 में 730 करोड़ का डिजिटल ट्रांजैक्शन हुआ, यानी एक महीने 12 लाख करोड़ रुपए का लेन-देन रिकॉर्ड किया गया है। जो 2016 में 1.09 लाख ट्रांजैक्शन, यानी करीब 6,952 करोड़ रुपए था।

केंद्र के विरोध में दलील,कानून का गलत हुआ इस्तेमाल
विपक्ष ने दलील दी कि सरकार की तरफ से आनन-फानन में सुनाए गए इस फैसले के खिलाफ देश के अलग-अलग हाईकोर्ट्स में कुल 58 याचिकाएं दाखिल हुई थीं। इन याचिकाओं में कहा गया था कि सरकार ने आरबीआई कानून 1934 की धारा 26(2) का इस्तेमाल करने में गलती की है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी की सुनवाई एक साथ करने का आदेश दिया।
सरकार को नहीं है करेंसी रद्द करने का अधिकार
याचिकाकर्ताओं ने अपनी दलील में कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम की धारा 26(2) किसी विशेष मूल्यवर्ग के करेंसी नोटों को पूरी तरह से रद्द करने के लिए सरकार को अधिकृत नहीं करती है। यह केंद्र को एक खास सीरीज के करेंसी नोटों को रद्द करने का अधिकार देती है, न कि संपूर्ण करेंसी नोटों को।
सरकार खुद नहीं ले सकती फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदम्बरम ने दलील दी थी कि केंद्र सरकार खुद ऐसा कोई फैसला नहीं ले सकती और ऐसा केवल आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड की सिफारिशों पर किया जा सकता है।

मोदी सरकार ने आठ नवंबर 2016 को की थी नोटबंदी
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर 2016 की रात आठ बजे देश को संबोधित कर नोटबंदी की घोषणा की थी। जिसमें तत्काल प्रभाव से 500 और 1000 के नोट चलन से बाहर हो गए थे। जिसके बाद देश की आम जनता को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा था। बैंकों व एटीएम के बाहर लोगों की लंबी लंबी कतारे लगी रहती थी। नोटबंदी करते समय सरकार को उम्मीद थी कि नोटबंदी से कम से कम 3 से 4 लाख करोड़ रुपए का काला धन बाहर आ जाएगा। हालांकि, पूरी कवायद में 1.3 लाख करोड़ रुपए का काला धन ही सामने आया।

नोटबंदी पर विपक्ष केंद्र को लगातार घेरता रहा
कांग्रेस समेत समूचा विपक्ष आज भी सरकार को इस मुद्दे पर घेरता रहता है। अब कोर्ट के इस फैसले के बाद उम्मीद है कि इस पर हो रही सियासत समाप्त हो जाएगी।

