बीरेंद्र कुमार झा
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट को फंड मुहैया नहीं करने के मुद्दे पर दिल्ली सरकार को फटकार लगाई है ।साथ ही भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने सवाल उठाए कि आखिर सरकार फंड जारी क्यों नहीं कर रही है? सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को गुरुवार तक फंड देने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले फंड की कमी की वजह से अदालत से जुड़ी परियोजनाओं के अटकने की खबरें लगातार सामने आ रही थी।
मॉडल हाई कोर्ट पर ,फंड के अभाव में कोर्ट रूम तक नदारद
भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के अलावा जे बी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा भी इस बेंच में शामिल थे।कोर्ट ने पूछा यह क्या हो रहा है ?आपकी सरकार क्या कर रही है?आप दिल्ली हाई कोर्ट को कोई फंड देना क्यों नहीं चाहते? आपको गुरुवार तक रुपए देने होंगे। यह एक मॉडल हाई कोर्ट है और इसकी हालत देखिए ! जजों की ट्रेनिंग चल रही है और यहां ढंग से कोर्ट रूम तक नहीं है। कोर्ट ने कहा हम इसे गुरुवार के लिए सूचीबद्ध कर रहे हैं।
मार्च 2021 में योजना स्वीकृत और दिसंबर 23 तक फंड नहीं
सीजेआई ने पाया की मार्च 2021 में ही चार में से तीन परियोजनाओं की मंजूरी मिल गई थी, लेकिन अब तक फंड जारी नहीं किए गए। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि 5 दिसंबर तक की हाई कोर्ट की स्टेटस रिपोर्ट में 887 न्यायिक अधिकारियों, 15 फास्ट्रेक स्पेशल कोर्स और 813 अधिकारियों की स्वीकृत संख्या के संकेत मिलते हैं। अब मंजूरी प्राप्त संख्या को 118 कोर्ट रूम की जरूरत है। साथ ही 114 और कोर्ट रूम की जरूरत है।
फंड देने में।देरी करना दुखद
शीर्ष कोर्ट ने कहा कि फंड देने में देरी होना दुखद है।साथ ही कोर्ट ने कहा कि दिल्ली जिला न्यायपालिका के प्रति भी दिल्ली सरकार रवैया सही नहीं है।शीर्ष न्यायालय ने दिल्ली हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और राज्य सरकार को बैठक करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट का कहना है की मीटिंग के जरिए जिला न्यायपालिका में कमी को दूर करने का तरीका निकाला जाए।
हाई कोर्ट भी उठा चुका है सवाल
नवंबर में फंड की कमी की बात दिल्ली हाईकोर्ट भी उठा चुका है।तब एसीजे मनमोहन ने कहा था कि अगले साल तक एक सौ मजिस्ट्रेट तैयार हो जाएंगे और हमारे पास उन्हें लगाने के लिए जगह ही नहीं है।हमारे पास नई अदालतों के लिए जगह या फंड्स नहीं है। किसी भी जिला कोर्ट में 1 इंच भी जगह नहीं है। दिल्ली सरकार ना पैसा दे रही है और न हीं जगह। हम बहुत कोशिश कर रहे हैं लेकिन वे फंड जारी नहीं कर रहे हैं।
