न्यूज़ डेस्क
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन और ‘सनातन धर्म उन्मूलन सम्मेलन’ के आयोजकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया।न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी की पीठ ने याचिका पर स्टालिन जूनियर, तमिलनाडु पुलिस और अन्य से जवाब मांगा। कोर्ट ने इसे शीर्ष अदालत के समक्ष लंबित अन्य हेट स्पीच मामलों के साथ टैग करने से इनकार कर दिया। सुनवाई की शुरुआत में, पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर रिट याचिका पर विचार करने में अनिच्छा व्यक्त की और पूछा कि याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाना चाहिए।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दामा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि संवैधानिक पदाधिकारी एक संपूर्ण आस्था के खिलाफ बोल रहे हैं, उन्होंने कहा कि “बच्चों से एक विशेष आस्था के खिलाफ बोलने के लिए कहा जाता है और उन्हें मजबूर किया जाता है।”
उन्होंने दावा किया कि वर्तमान मामले में, राज्य “घृणास्पद भाषण” फैला रहा है और राज्य सरकार द्वारा छात्रों को एक विशेष धर्म के खिलाफ बोलने के लिए परिपत्र जारी किए गए हैं।दलीलें सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने मामले की जांच करने का फैसला किया और नोटिस जारी किया। इसने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि अदालत को पुलिस स्टेशन में परिवर्तित किया जा रहा है और ऐसे मामलों को उच्च न्यायालय द्वारा निपटाया जाना चाहिए।
उधर कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने हरिद्वार में मीडिया से बातचीत में कहा कि सनातन धर्म के खिलाफ जो बोलता है, जो सनातन के खिलाफ है वो भारत के भी खिलाफ है, क्योंकि सनातन के बिना भारत की कल्पना नहीं की जा सकती। सनातन के खिलाफ बोलने वाले रावण के वंशज है। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि जो नेता सनातन के खिलाफ बोलते हैं, उन्होंने इंडिया गठबंधन से निकाल देना चाहिए।
आचार्य ने कहा, कि वे इंडिया गठबंधन के तमाम वरिष्ठ नेताओं से ये अपील करना चाहते हैं कि उन्हें सनातन के खिलाफ बोलने वाले राजनेता को राजनीतिक दलों को इंडिया गठबंधन से बाहर कर देने चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भी समाजवादी पार्टी को ये फैसला लेना पड़ेगा कि वो सनातन के साथ हैं, रामायण के साथ हैं, रामचरित मानस के साथ भगवान राम के साथ हैं या फिर भगवान राम और रामचरित मानस को गाली देने वालों के साथ हैं।
स्वामी प्रमोद कृष्णन ने साधु समाज के संतों से भी मांग की है कि उन्हें सनातन के खिलाफ बोलने वाले नेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाही की मांग करें, और ऐसे राजनीतिक दलों को बैन करने की मांग की है जो इन नेताओं को संरक्षण देते हैं। स्वामी प्रमोद कृष्णन का ये बयान ऐसे समय में आया है जब इंडिया गठबंधन के नेताओं में लोकसभा चुनावों को लेकर एकजुट होने की कोशिश में जुटे हैं।

