ज्ञानवापी सर्वे पर मुस्लिम पक्ष बोला कुरेदे जाएंगे पुराने जख्म, सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाया राम मंदिर का फैसला

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बीरेंद्र कुमार झा

सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू पक्ष को राहत देते हुए शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाने से इंकार कर दिया जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ( ASI) को वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद परिषद में वैज्ञानिक सर्वेक्षण की अनुमति दी गई थी। सर्वेक्षण यह करने के लिए किया जा रहा है कि क्या 17 वीं शताब्दी की इस मस्जिद का निर्माण एक हिंदू मंदिर की पहले से मौजूद संरचना पर किया गया है? प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़,न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने एएसआई को सर्वेक्षण के दौरान किसी भी तरह की तोड़फोड़ की कार्रवाई से मना कर दिया है। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील ने पुराने जख्मों के कुरेदे जाने का जिक्र किया तो सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर का मामला याद दिला दिया।

मस्जिद कमिटी को एएसआई सर्वे से अतीत के घाव हरे होने का डर

दरअसल मुस्लिम पक्ष अंजुमन इंतजामिया मस्जिद समिति ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ज्ञानवापी मस्जिद में एएसआई सर्वेक्षण का इरादा इतिहास में जाना है और यह अतीत के घावों को फिर से हरा कर देगा। मस्जिद प्रबंध समिति की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हुजैफा अहमदी ने मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष दलील दी कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की यह कवायद इतिहास को कुरेदना, पूजा स्थल अधिनियम 1991 का उल्लंघन करना और भाईचारे को प्रभावित करना है।इसपर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि आप एक ही आधार पर हर अंतरिम आदेश का विरोध नहीं कर सकते हैं आप की आपत्तियों पर सुनवाई के दौरान फैसला किया जाएगा।

सीजेआई ने अयोध्या मामले का किया जिक्र

सुनवाई के दौरान सीजेआई ने राम मंदिर मामले का भी जिक्र किया।उन्होंने कहा यहां तक कि अयोध्या मामले में भी हमने सर्वे कराने की इजाजत दी थी। अंतिम चरण में इस पर काफी चर्चा हुई।फिर हमने चर्चा की कि एएसआई का साक्ष्य वैल्यू क्या होना चाहिए? हम संरचना की रक्षा करेंगे।मुस्लिम पक्ष के वकील अहमदी ने पूछा कि अगर कल कोई एक तुच्छ चीज के लिए मुकदमा दायर करता है और पहली तारीख पर सर्वेक्षण के लिए कहता है तो क्या आप एएसआई को सर्वेक्षण के लिए भेज देंगे।इसपर सीजेआई ने जवाब दिया जो आपके लिए तुच्छ है वह दूसरे पक्ष के लिए आस्था है। हम कैसे कह इसपर टिप्पणी कर सकते हैं। मैं कह रहा हूं कि जब रखरखाव पर गंभीर संदेह तो सर्वेक्षण न करें।

अतीत के घावों को फिर कुरेदेगा

मुस्लिम पक्ष के वकील अहमदी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए सर्वेक्षण के आदेश पर कहा कि एएसआई सर्वेक्षण का इरादा इतिहास से यह जानने का है कि 500 साल पहले क्या हुआ था? यह अतीत के घावों को फिर से कुरेद देगा। चल रही सुनवाई के दौरान अहमदी ने कहा कि सर्वेक्षण पूजा स्थल ( विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991 का उल्लंघन करता है जो 1947 में मौजूद धार्मिक स्थानों के चरित्र परिवर्तन पर रोक लगाता है।शीर्ष अदालत ज्ञानवापी मस्जिद मामले में एएसआई सर्वे की अनुमति देने वाली इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ मस्जिद समिति की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।हाई कोर्ट ने गुरुवार को समिति द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें जिला अदालत के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें एएसआई को यह निर्धारित करने के लिए दिया गया था कि क्या मस्जिद वहां पहले से मौजूद मंदिर पर बनाई गई थी।

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