तुम ही बताओ यह मोहर्रम हुई या ईद ,केजरीवाल पर बरसे सुधांशु त्रिवेदी और मुस्कुराते रहे अमित शाह

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बीरेंद्र कुमार झा

लोकसभा से पारित होने के बाद दिल्ली सेवा बिल राज्यसभा में पेशकर दिया गया है।।सोमवार को उच्च सदन में इस पर दिलचस्प बहस देखने को मिली।कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी ने इस बिल को चुनी हुई सरकार के खिलाफ बताया और होम मिनिस्टर अमित शाह को सुपर बॉस कहते हुए तंज कसा।वहीं उनके बाद बोलने की बारी सुधांशु त्रिवेदी की थी। उन्होंने जमकर शायराना अंदाज में विपक्षी दलों पर तीर छोड़े। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की दोस्ती पर तंज कसते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि इन्हें लगता था की हम दिल्ली बिल पर समर्थन पाकर बढ़त बना लेंगे,लेकिन कांग्रेस तो अविश्वास प्रस्ताव लाकर आगे निकल गई। इस पर तंज कसते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने एक शेर भी पढ़ा ना तुम आए ना तुम्हारी दीद हुई ,तुम ही बताओ या मुहर्रम हुई कि ईद हुई। सुधांशु त्रिवेदी के भाषण के दौरान अमित शाह भी कई बार मुस्कुराते हुए दिखे।

सुधांशु त्रिवेदी ने विपक्ष द्वारा बिल के विरोध की बताई वजह

सुधांशु त्रिवेदी ने बिल का विरोध कर रही आम आदमी पार्टी पर हमला बोलते हुए कहा कि अदालत के आदेश के बाद जैसे कुछ अधिकार इनको मिले, तो सतर्कता के साथ सबसे पहले सतर्कता आयोग की फाइलें ली गई । सतर्कता आयुक्त ने बताया कि मंत्री ने रात को 9:00 बजे फोन करके फाइल मांग ली। उन्होंने राज्यपाल से यह भी कहा कि फाइलों के साथ छेड़छाड़ हो सकती है।ऐसे में इस बिल आने की वजह थी कि फाइलों को जल्दी लाया जाए।

केंद्र सरकार के ट्रांसफर मामले में अधिकार हों तय

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि ब्यूरोक्रेसी पर नियंत्रण की बात की जा रही है, लेकिन दिल्ली में आम आदमी पार्टी के लोग सरकारी पदों पर बैठे हैं और सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि दिल्ली का कोई स्टेट काडर नहीं है। यहां केंद्र शासित प्रदेश का काडर लागू होता है। यदि इन अफसरों का ट्रांसफर किसी और जगह पर करना हो और सीएम की मंजूरी ना हो तो फिर दिक्कत होगी।ऐसे में केंद्र सरकार के अधिकार तय होना जरूरी है। इस दौरान सुधांशु त्रिवेदी ने अरविंद केजरीवाल के बंगले का भी जिक्र किया।

केजरीवाल के बंगले पर तंज – 9 करोड़ 99 लाख तक के दिए गए टेंडर

केजरीवाल के बंगले पर तंज कसते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कहा इस बंगले में ऐसे काम कराए गए हैं कि टेंडर ही न उठाना पड़े। 9 करोड़ 99 लाख रुपए तक के टेंडर दिए गए ताकि ठेका न देना पड़े।क्योंकि 10 करोड़ की एक लिमिट होती है। कभी शीला दीक्षित के घर पर लगे 10 एसी पर अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि मेरा तो सीना फटता जा रहा है की आखिर इसका बिल कौन भरता होगा? अब शीला जी कि आत्मा जहां भी होगी होगी, रोती होगी।आज इनके घर घर में एक करोड़ रुपए तक के परदे ही लगे हैं। उन्हें अलग राज्य से भी संतोष नहीं होने वाला, इनको सुपर स्टेट चाहिए। मुझे तो डर है कि ये अलग मेंटल स्टेट में ही न पहुंच जाय।देश के संविधान की बात तो छोड़िए,इनको तो अपनी। पार्टी के संविधान में भी यकीन नही है।

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