पहले स्ट्रोक को बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब 30-40 साल के लोगों में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि खराब लाइफस्टाइल, गलत खानपान, तनाव और शारीरिक गतिविधि की कमी इसकी बड़ी वजह बन रही है।अच्छी बात यह है कि समय रहते सावधानी बरती जाए तो स्ट्रोक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
डॉ. प्रवीण गुप्ता, चेयरमैन, मैरिंगो एशिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो एंड स्पाइन (MAIINS), के अनुसार आज के युवा लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं, कम एक्सरसाइज करते हैं और ज्यादा तनाव में रहते हैं. यही कारण है कि कम उम्र में भी स्ट्रोक के मामले बढ़ रहे हैं।
स्ट्रोक के 7 बड़े कारण निम्नलिखित हैं –
हाई ब्लड प्रेशर:हाई ब्लड प्रेशर स्ट्रोक का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। लंबे समय तक ब्लड प्रेशर बढ़ा रहने से दिमाग की नसों को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
धूम्रपान और तंबाकू:सिगरेट और तंबाकू रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और खून के थक्के बनने का जोखिम बढ़ाते हैं, इससे स्ट्रोक होने की संभावना बढ़ जाती है।
अनियंत्रित डायबिटीज:अगर ब्लड शुगर लंबे समय तक कंट्रोल में न रहे तो ब्लड वेसल्स कमजोर हो सकती हैं और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।
मोटापा और एक्सरसाइज की कमी:शारीरिक गतिविधि न करना और वजन बढ़ना हाई बीपी, डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं को जन्म देता है, जो स्ट्रोक के प्रमुख कारण हैं।
ज्यादा तनाव और कम नींद: लगातार तनाव में रहना और पूरी नींद न लेना शरीर पर बुरा असर डालता है, इससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और स्ट्रोक का जोखिम भी बढ़ जाता है।
गलत खानपान:जंक फूड, ज्यादा नमक, तली-भुनी चीजें और प्रोसेस्ड फूड खाने से धमनियों में चर्बी जमा हो सकती है, जिससे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है।
हाई कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोग
बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल धमनियों में रुकावट पैदा कर सकता है, इससे दिमाग तक खून पहुंचने में परेशानी होती है और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
अगर अचानक शरीर के किसी एक हिस्से में कमजोरी या सुन्नपन महसूस हो, बोलने में परेशानी हो, चेहरा टेढ़ा दिखे, देखने में दिक्कत आए, तेज सिरदर्द हो या संतुलन बिगड़ जाए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। स्ट्रोक के इलाज में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं
डॉ. गुप्ता के अनुसार, नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच करानी चाहिए।रोज कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं, संतुलित आहार लें, पर्याप्त नींद लें और तनाव को नियंत्रित करने के लिए योग या मेडिटेशन करें।जिन लोगों के परिवार में स्ट्रोक या हृदय रोग का इतिहास है, उन्हें नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए।

