सोनिया गाँधी अब चुनाव नहीं लड़ेंगी ,आज राज्य सभा के लिए भर सकती है नामांकन !

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न्यूज़ डेस्क
 कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष  सोनिया गांधी अब लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेगी। जानकारी के मुताबिक अब वह राज्य सभा की सदस्य बनेगी। जानकारी के मुताबिक़ सोनिया गाँधी राजस्थान या हिमाचल से उच्च सदन की सदस्य हो सकती है और खबर के मुताबिक आज ही वह राजयसभा के लिए नमांकन भी भर सकती है। बता दें कि  पहले ये ऑफर प्रियंका गांधी को दिया गया था लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। राज्यसभा सदस्य बनने के बाद सोनिया इस बार रायबरेली से चुनाव नहीं लड़ेंगी। कांग्रेस पार्टी के इस कदम से देश के सबसे बड़े प्रदेश से सबसे पुरानी पार्टी का खात्मा हो जाएगा।      

2019 चुनाव से पहले कांग्रेस की यहां दो सीटें थी लेकिन इसी साल राहुल गांधी को अमेठी से बीजेपी नेता स्मृति ईरानी के हाथों हार झेलना पड़ा था। जिसके बाद सोनिया गांधी की रायबरेली सीट बची थी। अब खबर आ रही है कि सोनिया इस बार राज्यसभा जाने वाली हैं।

अप्रैल-मई 2024 में होने वाले आम चुनाव में सोनिया गांधी की जगह कौन लेगा? उनकी विरासत को कौन संभालेगा? सूत्रों का कहना है कि उनकी बेटी और कांग्रेस नेत्री प्रियंका वाड्रा गांधी को वहां से मौका मिल सकता है। लेकिन ऐसा होता है तो बीजेपी और एनडीए के बाकी दल फिर कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगायेंगे और कहेंगे कि कांग्रेस के लाखों कार्यकर्त्ता होने के बावजूद उन्हें सीट पर उतारने के लिए अपने परिवार का ही कोई सदस्य मिला।

 मालूम हो कि रायबरेली सीट कांग्रेस और गांधी परिवार के लिए शुरू से खास रही है। यहां गांधी परिवार की अलग विरासत रही है। यहां गांधी परिवार का वर्चस्व रहा है। यह उनकी विरासत से जुड़ी हुई सीट है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी साल 1999 से लोकसभा की सदस्य रही हैं। ये पहला मौका होगा जब सोनिया राज्यसभा पहुंचेंगी। सोनिया गांधी से पहले इस सीट से फिरोज गांधी, इंदिरा गांधी, अरुण नेहरू, शीला कौल जैसे नेता इस सीट से चुनाव लड़ चुके हैं।

कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को पार्टी के महासचिव बनाया, उसके बाद उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से का प्रभारी और फिर पूरे राज्य की प्रभारी महासचिव नियुक्त किया। प्रियंका ने पार्टी को उत्तर प्रदेश में फिर से मजबूत बनाने की कोशिश की, लेकिन मोदी लहर के सामने उनकी कोई रणनीति काम नहीं आई। यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में भी प्रियंका गांधी का प्रभाव कम रहा और पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा था।

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