दिशा सालियान मौत मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान गवाहों की सुरक्षा, पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर कई बड़े और चौंकाने वाले सवाल सामने आए हैं। हालाँकि, अधिकारिक रूप से किसी “मोटू” नाम के व्यक्ति या विशेष पुलिस अधिकारी के इस नाम से सरकारी गवाह बनने को लेकर कोई प्रमाणित जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन गवाहों को लेकर कोर्ट और वकीलों के बीच कुछ बेहद गंभीर पहलू जरूर चर्चा में रहे हैं।इस पूरे मामले के मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:
1. गवाहों की जान को खतरा और गुप्त गवाहों का दावा सुनवाई के दौरान दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा ने अदालत को बताया कि उनके पास ऐसे गवाह और सबूत मौजूद हैं, जो मामले की पूरी सच्चाई सामने ला सकते हैं। लेकिन, उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इन गवाहों की जान को गंभीर खतरा है। इसलिए, उनकी पहचान और गवाही केवल तभी अदालत के सामने लाई जा सकती है जब इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाए और उन गवाहों को कड़ी पुलिस सुरक्षा दी जाए।
2. बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा मुंबई पुलिस से तीखे सवाल: अगस्त 2026 में हुई सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र सरकार की जांच पर कड़े सवाल उठाए हैं।
3. FIR दर्ज क्यों नहीं हुई?: कोर्ट ने पूछा कि जब पिता ने अपनी बेटी की हत्या और सामूहिक दुष्कर्म की आशंका जताई थी, तो पुलिस ने तुरंत FIR दर्ज क्यों नहीं की और इसे केवल ‘आकस्मिक मृत्यु’ (ADR) मानकर सालों तक जांच क्यों खींचती रही?
4. पोस्टमार्टम और चोटों पर संशय: कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि यदि कोई व्यक्ति 14वीं मंजिल से गिरता है, तो उसके शरीर पर गंभीर चोटें या हड्डियां टूटने के बजाय सिर्फ दांत कैसे टूट सकते हैं? साथ ही, घटनास्थल पर खून के निशान गायब होने और शव के कपड़ों को लेकर पंचनामे व तस्वीरों में अंतर होने पर भी कोर्ट ने गंभीर संदेह जताया।
5. दस्तावेज़ छिपाने का आरोप: दिशा के पिता ने आरोप लगाया कि तत्कालीन पुलिस अधिकारियों और महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार के कुछ नेताओं के दबाव के कारण उन्हें सालों तक पोस्टमार्टम और जांच रिपोर्ट की कॉपियां तक नहीं दी गईं
6. राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप:इस मामले में राजनीति भी काफी गरमाई हुई है। याचिकाकर्ता ने शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे की टीम पर दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए उनसे पूछताछ की मांग की है। दूसरी तरफ, आदित्य ठाकरे के वकील सुदीप पसबोला ने इन आरोपों को पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित और अफवाहों पर आधारित बताया है।फिलहाल, बॉम्बे हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित (Reserve) रख लिया है और जल्द ही तय किया जाएगा कि क्या इस मामले की नए सिरे से निष्पक्ष या CBI जांच कराई जाएगी।

