Solar Panel से बनेगी फुल बिजली,  जान लें एफिशिएंसी बढ़ाने के 6 तरीके

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सोलर पैनल लगाने के बाद बिजली के बिल से छुटकारा मिल जाता है।आपके घर की छत पर लगा सोलर एनर्जी सिस्टम न सिर्फ बिजली जनरेट करता है बल्कि आपके पैसे की भी बचत करता है सोलर तरीको को ठीक तरीके से मैंटेन कर बिजली जनरेशन बढ़ाया जा सकता है।आज हम आपको कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं, जिससे सोलर पैनल फुल एफिशिएंसी के साथ काम कर पाएंगे। अगर आप इन टिप्स को इग्नोर कर देते हैं तो एफिशिएंसी में कमी आ सकती है और सोलर पैनल अपने फुल पोटेंशियल के साथ काम नहीं कर पाएंगे।

मैक्सिमम एफिशिएंसी के लिए सोलर पैनल की पॉजीशन सही होना जरूरी है।सोलर पैनल हमेशा साउथ फेसिंग होने चाहिए, जिससे ज्यादा से ज्यादा सनलाइट को कैप्चर किया जा सके। इसके अलावा सोलर पैनल को कितना टिल्ट किया जाता है, यह भी एनर्जी जनरेशन के लिए बहुत जरूरी है।

पैनल को रखें साफ- सोलर पैनल को साफ रखना बहुत जरूरी है। पैनल गंदे होने पर एनर्जी प्रोडक्शन में 15 प्रतिशत तक की कमी हो सकती है।खुले में लगे होने के कारण इन पर धूल-मिट्टी जम जाती है, जो सनलाइट को ब्लॉक कर सकती है।इसलिए पैनल को नियमित तौर पर पानी और मुलायम कपड़े या ब्रश से साफ करते रहें।

शेडिंग न होने दें- पैनल को ऐसी जगह पर लगाने से बचें, जहां दिन में कई घंटे छाया रहती है। इससे एनर्जी प्रोडक्शन कम होता है। अगर किसी पेड़ की टहनी बढ़कर पैनल को छाया दे रही है तो उसे हटा दें।कोशिश करें कि पैनल पर ज्यादा से ज्यादा समय तक धूप रहे।

टेंपरेचर से भी पड़ता है फर्क- यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन ज्यादा टेंपरेचर में सोलर पैनल की एफिशिएंसी कम हो जाती है।इसलिए टेंपरेचर का ध्यान रखना जरूरी है। सोलर पैनल को ऐसी जगह पर इंस्टॉल करवाएं, जहां वेंटिलेशन हो सके। इसके अलावा छत से थोड़ी ऊंचाई पर लगाकर भी एयर सर्कुलेशन के कारण टेंपरेचर को ज्यादा बढ़ने से रोका जा सकता है।

हाई क्वालिटी पैनल चुनें- सारे पैनल एक तरह से नहीं बनाए जाते हैं।मैक्सिमम एफिशिएंसी के लिए हाई क्वालिटी वाले पैनल चुनें।इनकी लागत भले ही ज्यादा हो, लेकिन इनका लाइफ स्पैन ज्यादा होता है और ये ज्यादा बिजली जनरेट कर पाएंगे। इसी तरह इन्वर्टर और बैटरी की क्वालिटी से भी समझौता न करें।

मैंटेनेंस पर भी दें ध्यान- अगर आपके एनर्जी सिस्टम सही चल रहा है, फिर भी साल में एक या दो बार प्रोफेशनल टेक्नीशियन को इसे दिखाना जरूरी है। इससे पैनल या सिस्टम में किसी प्रकार की गड़बड़ का पता चल जाएगा और उसे समय पर रिपेयर किया जा सकता है।इससे सोलर एनर्जी सिस्टम की एफिशिएंसी कम नहीं होगी।

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