उपेंद्र कुशवाहा का जेडीयू से अलग होने का जेडीयू और बिहार की राजनीति पर प्रभाव

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उपेंद्र कुशवाहा के वीडियो से अलग होने के बाद बिहार की सियासत में उठापटक तेज हो गई है उपेंद्र कुशवाहा ने नई पार्टी का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही उनका और नीतीश का परसों पुराना साथ छूट गया है । जेडीयू का नीतीश खेमा अक्सर यह कहता रहा था कि उपेंद्र कुशवाहा बीजेपी के इशारे पर जेडीयू को कमजोर करने के लिए बयानबाजी कर रहे हैं।बाद में उपेंद्र कुशवाहा ने जेडीयू की मजबूती के लिए गत रविवार को पटना की सिन्हा लाइब्रेरी में जेडीयू नेताओं की बैठक बुलाई थी।इसकी अंतपरिणति उपेंद्र कुशवाहा का जेडीयू से अलग होकर राष्ट्रीय लोक जनता दल पार्टी के निर्माण के रूप में हुआ। इस बदली परिस्थिति में बिहार की राजनीति भी एक नई करवट लेती हुई दिखती है।

बिहार में लव कुश समीकरण

बिहार की सियासत में लव-कुश समीकरण के बल पर राजनीति करने की शुरुआत वर्ष 1994 से हुई है। लव-कुश के अंतर्गत कोयरी यानि कुशवाहा और कुर्मी समुदाय के लोग आते हैं। इन्हें नीतीश कुमार की राजनीति का आधार स्तंभ माना जाता है ।वर्ष 1994 ईस्वी में कुर्मी- कोइरी सम्मेलन के साथ लव कुश समीकरण की शुरुआत हुई। बाद में इसी आधार पर समता दल की नींव पड़ी थी।इस सम्मेलन में नीतीश कुमार के अलावा जॉर्ज फर्नांडीस, उपेंद्र कुशवाहा, दिग्विजय सिंह, शकुनी चौधरी आदि नेता शामिल थे। इसमें कुर्मी समाज के महरुआ नीतीश कुमार बने और उपेंद्र कुशवाहा ने कोयरी समाज का झंडा बुलंद किया। इसके साथ नीतीश का इजाद किया हुआ महादलित भी इस वोट बैंक में शामिल हुआ। इस समीकरण ने बिहार में नीतीश कुमार की सियासत को एक नई ऊंचाई दी। न सिर्फ ऊंचाई दी बल्कि इसी के बदौलत नीतीश कुमार भिन्न भिन्न पार्टियों और गठबंधन में जाने के बावजूद लंबे समय से बिहार के मुख्यमंत्री भी बने हुए हैं।

अब बीजेपी की है लव कुश और महादलित पर नजर

जबतक बिहार में जेडीयू और बीजेपी की गठबंधन वाली सरकार थी, तबतक बीजेपी के लिए सब कुछ ठीक-ठाक था, लेकिन इस गठबंधन के टूटने और टूटकर नीतीश कुमार का आरजेडी कांग्रेस महागठबंधन में शामिल होकर मुख्यमंत्री बनने के बाद से स्थिति बीजेपी के लिए प्रतिकूल होती दिखने लगी थी। बीजेपी अब इसी राजनीतिक प्रतिकूलता को दूर कर 2024 में होने वाले चुनाव के लिए बिहार में अपने लिए अनुकूल राजनीतिक परिस्थिति बनाने में जुट गई है। उपेंद्र कुशवाहा का नीतीश कुमार के जेडीयू से अलगाव और नई पार्टी का गठन, बीजेपी की इन्हीं प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है। बीजेपी यह बात अच्छी तरह से जानती है कि लव- कुश वोट बैंक पर उपेंद्र कुशवाहा का भी अच्छा प्रभाव है। उपेंद्र कुशवाहा के बीजेपी के पक्ष में आने की स्थिति में लव कुश समीकरण बीजेपी के पक्ष में आई तो इससे नीतीश कुमार की पार्टी और इसके गठबंधन की स्थिति काफी कमजोर हो जाएगी । ऐसे में अगर बीजेपी की रणनीति सफल होती है तो उपेंद्र कुशवाहा का सहयोग बीजेपी को मिलने से 2024 के चुनाव में ना सिर्फ नीतीश कुमार के नेतृत्ववाली जेडीयू बल्कि आरजेडी और कांग्रेस के लिए भी चुनाव जीतना काफी कठिन ही जायेगा।

उपेंद्र कुशवाहा की हैसियत

उपेंद्र कुशवाहा का जेडीयू से निकलकर राष्ट्रीय लोक जनता दल पार्टी का गठन करने को लेकर अगर बीजेपी उत्साहित है तो वहीं दूसरी तरफ उपेंद्र कुशवाहा को भी कई प्रकार के राजनीतिक लाभ मिलने की संभावना है।वर्ष 2024 के चुनाव में बीजेपी के साथ गतबंधन होने की स्थिति में उपेंद्र कुशवाहा नीतीश कुमार के समान ही आपने लोगों के लिए ज्यादा से ज्यादा सीट दिला पाएंगे। वहीं बीजेपी वर्तमान में भी उपेंद्र कुशवाहा को राज्यपाल जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर बिठा सकता है।

नीतीश का वर्तमान राजनीतिक स्थिति

अभी तक नीतीश कुमार लव – कुश और महादलित समीकरण के साथ-साथ शराब बंदी के फैक्टर पर बिहार में अपना सिक्का चला रहे थे। लेकिन इस बार नितीश कुमार का यह सिक्का बिहार में चलेगा, इसमें कुछ संदेह है।संदेह इसलिए है क्योंकि एक तो लव कुश समीकरण का एक बड़ा धड़ा कोयरी यानि कुशवाहा, उपेंद्र कुशवाहा के जेडीयू से निकलने के कारण जेडीयू को वोट नहीं भी कर सकता है। साथ ही हाल के दिनों में बिहार में शराब से लोगों की हुई मौत ने भी नीतीश कुमार की छवि को काफी नुकसान पहुंचाया है। इसके अलावा बीजेपी भी बिहार में नीतीश कुमार का बेड़ा गर्क करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ने वाली है। यह नीतीश कुमार कि सरकार को सुशासन की सरकार की जगह कुशासन और जंगलराज बताकर चुनावी संग्राम जीतने का प्रयास करेगी।

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