रात में छाती के दर्द से डरना चाहिए?

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सोते हुए अगर आपको छाती में दर्द, चुभन या भारीपन होता है तो यह कितना डरने की बात है। कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर हिमांशु गुप्ता ने बताया कि हर बार इसे बेचैनी या एसिडिटी जैसी समस्या नहीं मान लेना चाहिए, इसके पीछे कुछ खतरनाक वजहें हो सकती हैं। लेकिन अक्सर लोग मानते हैं कि नींद के दौरान या रात में सोते वक्त सीने में दर्द होने के पीछे एसिडिटी, अपच या चिंता होती है।

जयपुर स्थित मणिपाल हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी में कंसल्टेंट डॉक्टर हिमांशु गुप्ता ने लोगों की इस सोच के पीछे का कारण यह बताया कि उन्हें लगता है इस वक्त शरीर कोई काम नहीं कर रहा तो दिल का इस भारीपन या दर्द से लेना देना नहीं होगा। लेकिन कई बार ऐसी स्थिति किसी खतरे की चेतावनी भी हो सकती है, जिसके इलाज की तुरंत जरूरत होती है।

दिल एक निश्चित पैटर्न पर धड़कता है और नींद के दौरान उस पैटर्न में थोड़ा बदलाव आता है। डॉक्टर के अनुसार, खासकर सुबह के वक्त हार्टबीट, ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन लेवल में बदलाव आता है। दिल के मरीजों को इन बदलावों से हल्की-फुल्की परेशानियां भी हो सकती हैं, जो कि दिन के वक्त अक्सर नदारद रहती हैं। ऐसे लोगों को ऑक्सीजन लेवल कम होने, दिल के अनियमित धड़कने और हार्ट मसल्स को पहुंचने वाले ब्लड फ्लो में जरा सी रुकावट आने पर नींद के दौरान सीने में दर्द हो सकता है।

इस स्थिति के मुख्य कारणों में से एक नॉक्टर्नल एंजाइना है। इसमें दिल को खून पहुंचाने वाली आर्टरीज सिकुड़ जाती हैं और उसे पर्याप्त खून नहीं मिल पाता।
साइलेंट मायोकार्डियल इस्केमिया में खून का बहाव कम हो जाता है। इससे दर्द नहीं होता, लेकिन सीने में दबाव, बेचैनी और सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
एरिदमिया भी एक कारण है, जिसमें धड़कन अनियमित हो जाती है। इसकी वजह से दिल खून को ढंग से पंप नहीं कर पाता और घबराहट-छाती में दबाव महसूस होने से नींद टूट सकती है।

स्लीप एप्निया के मरीजों का भी नींद के दौरान ऑक्सीजन लेवल गिर जाता है, जिससे हार्ट अटैक पड़ सकता है।सोने के दौरान सीने में बैचेनी के साथ निम्नलिखित लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए-

बुखार के बिना पसीना आना
सीने के दर्द का जबड़े, कलाई या पीठ की ओर फैलना
सांस लेने में दिक्कत या सांस फूलना
चक्कर आना
घबराहट या दिल का अनियमित व असामान्य धड़कना

अगर किसी व्यक्ति को सोते वक्त सीने में दर्द या बेचैनी महसूस होती है तो ईसीजी, ईकोकार्डियोग्राफी, स्ट्रेस टेस्टिंग या लगातार हार्ट रिद्म मॉनिटरिंग से उसकी जांच करवाई जानी चाहिए। इसके पीछे की किसी भी बड़ी दिक्कत को वक्त पर पहचानकर खतरे को टाला जा सकता है। डॉक्टर दवाओं, लाइफस्टाइल में बदलाव या एंजियोप्लास्टी व स्टेंट डालने जैसी सर्जिकल प्रोसीजर से इलाज कर सकता है।

नींद के दौरान सीने में दर्द एक गंभीर दिक्कत है। पहले से हाइपरटेंशन, डायबिटीज या स्लीप एप्निया से परेशान लोगों को इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पेट की समस्या से सीने में बेचैनी होना आम है, लेकिन नींद के दौरान इसे इग्नोर करना जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसलिए इन संकेतों को वक्त पर पहचानकर डॉक्टरी सलाह लेना महत्वपूर्ण हो जाता है।

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