अखिलेश अखिल
शिवसेना की लड़ाई अब और तेज होने वाली है। जिस तरह की घटना आज विधान सभा में हुई उससे लग रहा है कि उद्धव और शिंदे गुट की लड़ाई अब सड़को तक होगी। इस लड़ाई में कोई अनहोनी घटना की सम्भावना भी दिख रही है। आज शिंदे गुट ने महाराष्ट्र विधान सभा में शिवसेना के दफ्तर पर कब्ज़ा कर लिया। शिवसेना विधायकों के इस रवैये का हालांकि उद्धव गुट के विधायकों ने विरोध जरूर किया लेकिन शिवसेना विधायक नहीं माने और विधान सभा में शिवसेना के आधिकारिक दफ्तर को अपने हवाले कर लिया।
अभी दो दिन पहले ही चुनाव आयोग ने शिवसेना और उसके चुनाव चिन्ह को शिंदे गुट को देने का ऐलान किया था। इसके बाद शिंदे गुट की मुखरता ज्यादा ही बढ़ गई है। शिंदे गुट लगातार उद्धव गुट को झटका देते जा रहा है। पहले उद्धव की कुर्सी गई। फिर पार्टी में टूट हुई और चुनाव आयोग ने शिंदे गुट के हवाले शिवसेना को कर दिया। इस मामले को लेकर उद्धव गुट सुप्रीम कोर्ट पहुंचा लेकिन अदालत ने इस मसले पर तत्काल सुनवाई से इंकार कर दिया। उद्धव गुट के लिए यह भी एक झटके के तौर पर देखा जा रहा है।
आज सोमवार की घटना बहुत कुछ कह रही है। शिंदे गुट ने पहले से ही विधान सभा स्थित शिवसेना का दफ्तर उनके हवाले करने की अर्जी विधान सभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के सामने रखी थी ,नार्वेकर अभी तक इस पर चुप थे। लेकिन अब जब चुनाव आयोग ने शिवसेना को शिंदे गुट के हवाले कर दिया तो स्पीकर नार्वेकर ने आज शिवसेना का दफ्तर शिंदे गुट के हवाले कर दिया।
शिंदे गुट के विधायक आज शिवसेना के दफ्तर में घुसे और उसे अपने नियंत्रण में ले लिया। पहले से लगे सभी नेम प्लेट को बदल दिया गया। शिंदे गुट के विधायक भारत गोगावले कई विधायकों के साथ इस दफ्तर में घुसे थे। फिर उन्होंने एक बयान भी दिया। उन्होंने कहा कि शिवसेना अब हमारी पार्टी है। यह दफ्तर अब हमारा है और इसके साथ ही पार्टी के सभी दफ्तरों पर अब हम कब्ज़ा करेंगे। उन्होंने कहा कि यह शिवसेना का दफ्तर है और हम शिवसेना के विधायक है। हमें कौन रोकेगा ? हमने कोई गलती तो नहीं की है।
उधर उद्धव गुट लगातार बैठक कर रहा है। बड़ी संख्या में उद्धव समर्थक मातोश्री पहुँच रहे हैं और उद्धव से मिलकर लड़ाई करने की बात कर रहे हैं। उद्धव ने अपने समर्थको को हालांकि शांत रहकर घर -घर जाकर पार्टी को मजबूत करने की बात कर रहे हैं लेकिन जिस तरह से शिंदे गुट के तेवर बदल रहे हैं उससे लगता है कि अगली लड़ाई बड़ी होने वाली है। एक सवाल यह भी है कि क्या शिंदे गुट मातोश्री पर भी कब्जा करेंगे ? अगर ऐसा हुआ तो कोई अनहोनी घटना भी घट सकती है।
शिवसेना के राज्य भर में 80 से ज्यादा संगठन कार्यालय है। फिर दर्जनों कार्यालय गांव में भी खोले गए हैं। इसके साथ ही बीएमसी में कई संगठन कार्यालय है। अगर शिंदे गुट इन संगठनों और कार्यालय पर कब्ज़ा की कोशिश करता है तो टकराहट की सम्भावना बढ़ सकती है। इसके साथ ही पार्टी फंड को लेकर भी टकराहट हो सकती है। आगे क्या होगा कुछ कहा नहीं जा सकता लेकिन इस पुरे खेल को बीजेपी करीने से आगे बढ़ा रही है।

