Homeदेशसमष्टि भारतम् , नवसृजित उदय भारतम् राजनीतिक दल का प्रमुख सूत्र वाक्य

समष्टि भारतम् , नवसृजित उदय भारतम् राजनीतिक दल का प्रमुख सूत्र वाक्य

Published on

नवसृजित उदय भारतम् राजनीतिक दल जिन 10 प्रमुख सूत्र वाक्यों को आधार बनाकर भारत और भारतवासियों के प्राचीन गौरव की स्थापना के लिए सामाजिक और राजनीतिक प्रयास कर रहा है,उनमें एक प्रमुख सूत्र वाक्य समष्टि भारतम् है।परिस्थितिकी यानि इकोलॉजी के अनुसार किसी प्रजाति के किसी एक निश्चित स्थान अथवा क्षेत्र में एक निश्चित समय पर रह रहे व्यष्टि (जीव) परस्पर मिलकर समष्टि कहलाते हैं। भिन्न – भिन प्रकार के व्यष्टियों से निर्मित समष्टि का बेहतर विकास तभी होता है जबकि एक व्यष्टि का दूसरे,तीसरे और अन्य व्यष्टियों से परस्पर तारतम्यता (स्ट्रेटेजिक को- ऑर्डिनेशन) बना रहे।

भारत के संदर्भ में उदय भारतम् पार्टी का समष्टि भारतम का सिद्धांत भी प्रकृति के इसी मूलभूत सिद्धांत पर आधारित है।उदय भारतम् पार्टी का ‘समष्टि भारतम ‘ एकता, गौरव , विविधता और वैश्विक मान्यता वाले भारत के लिए एक दृष्टिकोण का प्रतीक है। यह एक ऐसे राष्ट्र की कल्पना करता है, जहां नागरिक क्षेत्रीय , भाषाई और सांस्कृतिक से परे उद्देश्य और अपनेपन की एक सामंजस्य पूर्ण पहचान बनाने की सामूहिक भावना से बंधे हों। अपनी समृद्ध विरासत और उपलब्धियों पर गर्व पैदा करके, विविध समुदायों के बीच एकता को बढ़ावा देकर और एक सकारात्मक छवि पेश करके समष्टि भारतम् दुनिया में सभी भारतीयों के लिए एक मजबूत और सम्मानित पहचान स्थापित करना चाहता है। यह समावेशिता, सहिष्णुता और आपसी समझ को बढ़ावा देता है, राष्ट्रीय शक्ति की आधारशिला के रूप में विविधता में एकता पर जोर देता है। अंततः समष्टि भारतम् , एक सामंजस्य पूर्ण और समृद्ध भारत बनाने का प्रयास करता है जो बहुलवाद,लोकतंत्र के प्रतीक और और वैश्विक मंच पर एक नेता के रूप में खड़ा हो।

उदय भारतम् पार्टी की समष्टि भारतम की सिद्धांत का प्रतिपादन ऋग्वेद की रिचा
संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम् | देवा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते’ भी करती है जिसका अर्थ है कि
हम सब एक साथ चलें ,
आपस में संवाद करें ,
हमारे मन एक हों ।
जिस प्रकार पहले के विद्वान अपने नियत कार्य के लिए एक होते थे, उसी प्रकार हम भी साथ में मिलते रहें ।।गौरतलब है कि यह मंत्र ऋग्वेद के 10/191/3 में उल्लेखित है।यह मंत्र उन पुजारियों को संबोधित है जो यज्ञ अर्थात विशिष्ट उद्देश्यों की पूर्ति के लिए विशिष्ट कार्यों को संपादित करने का कर्म करते हैं।यह मंत्र एकता के महत्व की व्याख्या करता है ।
क्रमशः

Latest articles

राहुल गांधी अपरिपक्व हैं, उन्हें अर्थव्यवस्था की समझ नहीं’पीयूष गोयल,

भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर कांग्रेस संसद से लेकर सड़क तक विपक्ष...

ऐप्सटिन फाइल की आंच राहुल को झुलसाया सकती है

बजट सत्र के दौरान संसद में राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद...

फोन पानी में गिर गया? समय रहते करें ये 5 काम, वरना हो सकता है भारी नुकसान

  फोन अगर अचानक पानी में गिर जाए या तेज बारिश में पूरी तरह भीग...

2050 तक चार में से एक शख्स के कान में होंगी दिक्कतें, डरा देगी WHO की रिपोर्ट

  दुनिया भर में सुनने से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही है।वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन...

More like this

राहुल गांधी अपरिपक्व हैं, उन्हें अर्थव्यवस्था की समझ नहीं’पीयूष गोयल,

भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर कांग्रेस संसद से लेकर सड़क तक विपक्ष...

ऐप्सटिन फाइल की आंच राहुल को झुलसाया सकती है

बजट सत्र के दौरान संसद में राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद...

फोन पानी में गिर गया? समय रहते करें ये 5 काम, वरना हो सकता है भारी नुकसान

  फोन अगर अचानक पानी में गिर जाए या तेज बारिश में पूरी तरह भीग...