सचिन वाजे (Sachin Waze) को एंटीलिया बम कांड और मनसुख हिरेन हत्याकांड मामले में विशेष NIA अदालत से जमानत (Bail) मिल गई थी, लेकिन इसके ठीक 24 घंटे के भीतर बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस फैसले पर 7 अक्टूबर 2026 तक अंतरिम रोक (Stay) लगा दी है। इस वजह से वे फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे।
मुंबई हाईकोर्ट के द्वारा दिशा सालियान मामले को मुंबई पुलिस से लेकर CBI को सौंपने के बाद से सचिन बाजे खासे चर्चा में आ गए थे। चर्चा तो यहां तक होने लगी थी कि सचिन बाजे सरकारी गवाह बनने वाले हैं। उनके सरकारी गवाह बनने से दिशा सालियान मामले को गलत दिशा में ले जाने वाले पुलिस पदाधिकारी परमवीर सिंह से लेकर राजनेता आदित्य ठाकरे और कई अन्य फिल्मी हस्तियां पर गाज गिर्णतया माना जा रहा था। इस बीच घटनाक्रम में कई प्रकार की तब्दीलियां देखने को मिली। ऐसे में अब जब कि सचिन बाजे को स्पेशल कोर्ट से जमानत मिल गई तो लोगों की दिलचस्पी सचिन बाजे को लेकर और बढ़ गई। कई लोग इसे परमवीर सिंह और आदित्य ठाकरे समूह की जीत बताने लगे तो कई लोग इसे दिशा सालियान के पिता के वकील निलेश ओझा और क्यों भाई जैसे मीडिया संस्थान की सूची समझी चाल बताने लगे। सही मामला तो सचिन बजे के आगे की क्रियाकलाप देखने के बाद ही समझ में आएगा लेकिन फिलहाल जानते हैं उन आधारों के बारे में जिसके बल पर सचिन बाजे को जमानत मिली।
विशेष NIA अदालत ने सचिन वाजे को 1 लाख रुपये के निजी मुचलके पर कुछ अहम कानूनी और तकनीकी आधारों पर जमानत दी थी।
UAPA (आतंकवाद धारा) पर सवाल: कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष (Prosecution) सचिन वाजे पर UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) के तहत आतंकवाद का मामला साबित करने में प्रथम दृष्ट्या (prima facie) असफल रहा।
अंबानी परिवार के बयान का न होना: कोर्ट ने टिप्पणी की कि NIA ने मुकेश अंबानी या उनके परिवार का कोई बयान दर्ज नहीं किया था। ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे लगे कि इस घटना से अंबानी परिवार आतंकित हुआ हो या उनका दैनिक कारोबार बाधित हुआ हो।
बिना डेटोनेटर के जिलेटिन स्टिक्स: स्कॉर्पियो गाड़ी में जो जिलेटिन की छड़ें मिली थीं, उनमें डेटोनेटर नहीं था। बिना डेटोनेटर के उसमें विस्फोट होना असंभव था, इसलिए इसे UAPA के तहत ‘आतंकवादी कृत्य’ नहीं माना जा सकता।
लंबे समय से जेल में होना: सचिन वाजे मार्च 2021 से (लगभग 5 साल) जेल में बंद हैं। ट्रायल (मुकदमे) की धीमी गति और लंबे कारावास को भी जमानत का आधार बनाया गया।
मनसुख हिरेन की मौत: कोर्ट ने कहा कि हिरेन की हत्या एक गंभीर अपराध है, लेकिन यह सीधे तौर पर आतंकवादी कृत्य का हिस्सा नहीं है और यह IPC धारा 302 (हत्या) के तहत एक स्वतंत्र मामला है।
जहाँ तक दिशा सालियान मामले का सवाल है, सचिन वाजे की इस जमानत का उस केस से सीधा कोई कानूनी संबंध नहीं है, लेकिन हालिया घटनाक्रमों के कारण। राजनीतिक और जांच के स्तर पर यह मामला चर्चा में है:
सीबीआई जांच और दावों का खंडन: हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई (CBI) ने दिशा सालियान मामले की नए सिरे से जांच शुरू की है। बीच में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और वकीलों द्वारा यह दावा किया गया था कि सचिन वाजे इस मामले में गवाह (Approver) बनने या कोई बड़ा खुलासा करने के लिए तैयार हैं।
वाजे का यू-टर्न: हालांकि, सचिन वाजे ने कोर्ट में अर्जी दाखिल कर इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। वाजे ने इसे अपने खिलाफ एक ‘दुर्भावनापूर्ण अभियान’ बताया है और कहा है कि उनका दिशा सालियान मामले से कोई लेना-देना नहीं है और न ही उन्होंने कोई गुप्त कबूलनामा दिया है।
सहायता की संभावना: कानूनी तौर पर एंटीलिया केस की जमानत से दिशा सालियान मामले की जांच पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। यदि भविष्य में सीबीआई वाजे से पूछताछ करना चाहती है, तो वाजे ने कोर्ट से अपील की है कि उनकी कस्टडी सीबीआई को देने से पहले उनका पक्ष सुना जाए।

