बीरेंद्र कुमार झा
लोकसभा चुनाव के पहले सीएए से जुड़े नियमों को अधिसूचित कर दिया गया है।ऐसे में विपक्षी दल इसकी टाइमिंग को लेकर हमलावर हैं। वहीं बीजेपी इसे अपना वादा बता रही है।ठीक चुनाव के समय सीएए के नोटिफिकेशन आने से सत्ता पक्ष और विपक्ष इस मुद्दे को पूरी तरह से अपने पक्ष में करके इसका चुनावी लाभ उठाने के प्रयास में एक दूसरे पर हमलावर है।
लोक सभा चुनाव को लेकर बीजेपी का चुनावी बॉन्ड से ध्यान हटाकर सुर्खिया बटोरने का प्रयास
लोकसभा चुनाव 2024 का शेड्यूल आने से पहले सीएए का नोटिफिकेशन आ चुका है।11 मार्च, 2024 को एनडीए सरकार की ओर से इसकी अधिसूचना जारी की गई तो विपक्ष ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया। कांग्रेस से लेकर आम आदमी पार्टी और असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआई ने इस पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने की कोशिश की।किसी ने कहा कि चुनावी बॉन्ड के मसले पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद यह ऐलान सिर्फ और सिर्फ ‘सुर्खियां बटोरने’ का प्रयास है तो कोई नेता इसे पूरी तरह से सांप्रदायिक उद्देश्यों के साथ विभाजनकारी और नुकसान पहुंचाने वाला कदम बताता दिखा। हालांकि, सियासी गलियारों में ऐसी चर्चा है कि यह मोदी-बीजेपी के लिए बड़े मास्टरस्ट्रोक के रूप में साबित हो सकता है।
सामाजिक घुव्रीकरण के लिए है सीएए- जयराम रमेश
सीएए को लेकर कांग्रेस के सीनियर नेता जयराम रमेश ने गुजरात के सूरत में मंगलवार को कहा कि यह बिल्कुल सामाजिक घुव्रीकरण के लिए है। इसे असम और पश्चिम बंगाल चुनाव को देखकर लाया जा रहा है।दोनों सूबों में इसका फायदा उठाने की कोशिश की जाएगी।बीजेपी के मुद्दे विभाजनकारी हैं और उनमें राजनीतिक तानाशाही नजर आ रही है। चार साल तीन महीने इस कानून को बनाने में लगे हैं।
बोले ओवैसी- संघियों को पहले हुआ चौकीदार से प्यार, अब शायद रद्दी वाले को दे दिया दिल
सीएए का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने एक्स पोस्ट के जरिए कहा कि संघियों को दो करोड़ नौकरियां नहीं मिली, मगर इनको कागज लेकर लाइन में खड़े होने का शौक है।साल 2019 में चौकीदार से प्यार हुआ था और अब शायद रद्दी वाले को दिल दे दिया।जब देखो तब कागज मांगते रहते हैं।
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात ने किया सीएए कानून का स्वागत
सीएए नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शाहबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है।उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने सीएए कानून लागू कर दिया है और हम इसका स्वागत करते हैं। ये पहले ही लागू कर दिया जाना चाहिए था।उन्होंने आगे कहा कि इस कानून को लेकर मुस्लिम समुदाय के बीच बहुत सी भ्रांतियां हैं।इस कानून का मुस्लिम समुदाय से कोई संबंध नहीं है।
मोदी सरकार ने पूरी की एक और प्रतिबद्धता
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक और प्रतिबद्धता पूरी की है और संविधान निर्माताओं के वादे को साकार किया है।आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि सीएए-2019 नागरिकता देने का कानून है और यह किसी भी भारतीय की नागरिकता नहीं छीनेगा, चाहे वह किसी भी धर्म का हो, यह केवल उन लोगों के लिए है जिन्होंने वर्षों से उत्पीड़न सहा है और जिनके पास भारत के अलावा दुनिया में कोई अन्य आश्रय नहीं है।
सीएए को लेकर कई भ्रांतियां फैलाई गई हैं।
सीएए को दिसंबर 2019 में संसद की मंजूरी मिल गई और बाद में राष्ट्रपति की सहमति भी मिल गई, लेकिन इसके खिलाफ देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए, कई विपक्षी दलों ने कानून के खिलाफ बोलते हुए इसे “भेदभावपूर्ण” बताया। सीएए विरोधी प्रदर्शनों या पुलिस कार्रवाई के दौरान 100 से अधिक लोगों की जान चली गई।इसलिए इस बार पहले से ही सतर्कता बरती जा रही है।
किसी की नागरिकता नहीं जाएगी
छत्तीसगढ़ बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सिंहदेव ने कहा कि इस कानून से किसी नागरिकता नहीं जाएगी, बल्कि भारत के 3 पड़ोसी देशों पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक आधार पर प्रताड़ित होकर भारत आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को जीने का अधिकार मिलेगा। सिंहदेव ने कहा- जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में शरण मांगी थी को भारत की नागरिकता देने का कानून है। भारत का संविधान भी हमें यह अधिकार देता है कि मानवतावादी दृष्टिकोण से धार्मिक शरणार्थियों को मूलबूत अधिकार मिले। ऐसे शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान की जा सके। इसी संवैधानिक भावना के अनुरूप भाजपा ने अपने इस वादे को पूरा किया है।
पूर्वोत्तर के जनजातीय इलाके सीएए के दायरे से बाहर
नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) 2019 पूर्वोत्तर राज्यों के अधिकांश जनजातीय क्षेत्रों में लागू नहीं किया जाएगा, जिनमें संविधान की छठी अनुसूची के तहत विशेष दर्जा प्राप्त क्षेत्र भी हैं।यह कानून सोमवार को लागू हुआ है।कानून के मुताबिक, इसे उन सभी पूर्वोत्तर राज्यों में लागू नहीं किया जाएगा,जहां देश के अन्य हिस्सों में रहने वाले लोगों को यात्रा के लिए ‘इनर लाइन परमिट’ (आईएलपी) की आवश्यकता होती है।यह व्यवस्था आईएलपी अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मिजोरम और मणिपुर में लागू है।अधिकारियों ने नियमों के हवाले से कहा कि जिन जनजातीय क्षेत्रों में संविधान की छठी अनुसूची के तहत स्वायत्त परिषदें बनाई गई हैं, उन्हें भी सीएए के दायरे से बाहर रखा गया है।असम, मेघालय और त्रिपुरा में ऐसी स्वायत्त परिषदें हैं
