आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पूरी दुनिया में काफी तेजी से फैल रहा है।एआई चैटबॉट अब लोगों के काम को आसान बनाने का काम कर रही हैं। ChatGPT देश में एक फेमश एआई चैटबॉट बन चुका है।इसी को देखते हुए अब कंपनी ने एक नया प्रोग्राम शुरू किया है। दरअसल, इस प्रोग्राम के तहत आने वाले सालों में करीब 1 लाख शोधकर्ताओं (Researchers) को अपने सबसे एडवांस ChatGPT AI मॉडल का फ्री एक्सेस दिया जाएगा। इस प्रोग्राम का मकसद है कि दुनियाभर के वैज्ञानिक बेहद एडवांस एआई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सकें जिससे नए प्रोजेक्ट्स और खोज को आसान बनाया जा सके।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये प्रोग्राम नॉर्मल यूजर्स के लिए नहीं पेश किया गया है। कंपनी ने साफ कर दिया है कि ये प्रोग्राम सिर्फ चयनित विश्वविद्यालयों और मान्यता प्राप्त रिसर्च संस्थानों के वैज्ञानिक एवं शोधकर्ता ही इस योजना के लिए पात्र होंगे।
अगर किसी शोधकर्ता का चयन हो जाता है तो वह अपने ही संस्थान के मैक्सिमम चार दूसरे सहयोगियों को भी इस प्रोग्राम में शामिल कर सकता है। इससे टीम के रूप में रिसर्च करना आसान होगा और कई विषयों पर बेहतर मदद मिल सकेगी।
कंपनी के अनुसार इस योजना की शुरुआत चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। सबसे पहले इस साल गर्मियों में लगभग 10,000 शोधकर्ताओं को इसमें शामिल किया जाएगा। इसके बाद धीरे-धीरे इस कार्यक्रम का विस्तार किया जाएगा और 2027 तक कुल 1 लाख शोधकर्ताओं को इसका लाभ मिलेगा।
इस कार्यक्रम के लिए आवेदन करने का प्रोसेस भी शुरू हो चुका है। बता दें कि इस प्रोग्राम का फायदा सिर्फ उन्हीं विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों को मिलेगा जिनकी शैक्षणिक और अनुसंधान क्षेत्र में मजबूत पहचान है।
आपको बता दें कि इस कार्यक्रम के तहत चयनित प्रतिभागियों को OpenAI के सबसे एडवांस AI मॉडल्स का मुफ्त इस्तेमाल करने का मौका मिलेगा। इनमें कंपनी की नई GPT-5.6 मॉडल फैमिली भी शामिल होगी।
इसके अलावा आवेदन करने वाले लोगों को ChatGPT, ChatGPT Work और Codex जैसे एडवांस टूल्स को इस्तेमाल करने का मौका मिलेगा। नॉर्मल यूजर्स की तुलना में उन्हें Higher Usage Limits और बड़े कॉन्टेक्स्ट विंडो जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी।
इन टूल्स की मदद से शोधकर्ता बड़े डेटा को चेक कर सकेंगे, प्रोग्रामिंग कोड तैयार कर पाएंगे, रिसर्च पेपर की समीक्षा कर सकेंगे और रिसर्च ग्रांट के लिए आवेदन तैयार करने जैसे कई मुश्किल काम तेजी से पूरे कर सकेंगे।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि OpenAI केवल नॉर्मल AI मॉडल ही उपलब्ध नहीं करा रहा है। कंपनी 75 से ज्यादा स्पेशल लाइफ साइंस टूल्स भी उपलब्ध कराएगी।इन टूल्स का इस्तेमाल Genetics, जीनोमिक्स, प्रोटीन मॉडलिंग, दवा की खोज (Drug Discovery) और जैविक अनुसंधान से जुड़े कई क्षेत्रों में किया जा सकेगा।
इतना ही नहीं, शोधकर्ता ChatGPT को वैज्ञानिक शोध-पत्रों, सार्वजनिक डेटाबेस, कंप्यूटेशनल नोटबुक और दूसरे रिसर्च प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जोड़ सकेंगे। इससे अलग-अलग सोर्सेज से जानकारी जुटाने और उसको चेक करने में काफी आसानी होगी।
OpenAI का मानना है कि विज्ञान की प्रगति सिर्फ उन संस्थानों तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए जिनके पास बड़ी मशीनें और ज्यादा बजट है। इसीलिए कंपनी चाहती है कि बेहतर रिसर्च करने के अवसर ज्यादा से ज्यादा वैज्ञानिकों तक पहुंचें।
विज्ञान, इंजीनियरिंग और गणित जैसे क्षेत्रों में AI का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में OpenAI की ये पहल शोधकर्ताओं के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। अगर वैज्ञानिक रोजमर्रा के दोहराए जाने वाले काम AI की मदद से तेजी से पूरा कर पाएंगे तो वे अपना ज्यादा समय नए एक्सपेरिमेंट, खोजों पर लगा सकेंगे। आने वाले वर्षों में ये कार्यक्रम वैश्विक वैज्ञानिक अनुसंधान की स्पीड को नई दिशा देने में जरूरी भूमिका निभा सकता है।

