अरविंद केजरीवाल और उनसे उपकृत होने वाले लोग भले ही अरविंद केजरीवाल को एक कट्टर ईमानदार होने की बात कहते हैं, लेकिन इसके अलावा एक बड़ा तबका ऐसे लोगों का भी है, जो अरविंद केजरीवाल को एक बड़ा धोखेबाज और घोटालेबाज मानता है। अरविंद केजरीवाल को एक बड़ा धोखेबाज और घोटालेबाज मानने वाले लोग इसे लेकर वहां से उदाहरण देना शुरू करते हैं जहां से अरविंद केजरीवाल ने राजनीति शुरू की। इनका मानना है की सबसे पहले तो इन्होंने अन्ना हजारे को धोखा दिया। उनके कार्यक्रमों में बार-बार यह कहा कि देश की जायज मांगों को मनवाने के लिए राजनीति में आना कोई जरूरी नहीं है। फिर भी राजनीति में आ गए। राजनीति में आकर उन्होंने कहा कि अगर जनता उन्हें जीतती है तो वह आम लोगों के बीच में रहेंगे महलों में नहीं और किसी प्रकार का कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं लेंगे। लेकिन इन्होंने जनता को तब धोखा दिया जब यह इन पर भरोसा कर जनता नहीं जिताया तो वह ऐसे ही आलीशान महल में चले गए और भारी भरकम सुरक्षा व्यवस्था भी ले ली। इसके बाद इन्होंने इस आम आदमी पार्टी की स्थापना में मुख्य भूमिका निभाने वाले अपने सहयोगी योगेंद्र यादव प्रशांत भूषण और कुमार विश्वास को धोखा देकर पार्टी से चलता कर दिया। फिर मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए बड़ा शराब घोटाला कर दिया जिसमें वह जेल भी गए हैं। अब लगता है कि इस कड़ी में कभी उनके काफी घनिष्ठ रहे राघव चड्ढा को भी धोखा फरेबी से पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने का मन बना चुके हैं। हालांकि फिलहाल अरविंद केजरीवाल ने अभी राघव चड्ढा की सिर्फ नकेल ही कसी है और उन्हें राज्यसभा में डेप्युटी लीडर के पद से हटाया है, ताकि झक मार कर राघव चड्ढा इनकी धूर्तता और घोटाले बाजी का सहयोगी बना रहे।
योगेंद्र यादव,प्रशांत भूषण और कुमार विश्वास की तरह राघव चढ़ा भी आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। आम आदमी पार्टी से निकाले जाने के बावजूद योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण ने अरविंद केजरीवाल को इसे लेकर कोई कड़ा शब्द नहीं कहा। कुमार विश्वास ने भले ही अपने कार्यक्रमों में चुटिले शब्दों से केजरीवाल के इस आचरण पर च्यूंटी जरूर काटी, लेकिन सीधे तौर पर कभी कुछ नहीं कहा। इसे अलग राघव चड्ढा ने इस मामले में अरविंद केजरीवाल का नाम लिए बिना उन्हें यह कहते हुए चुनौती दे डाली कि जिन लोगों ने संसद में जनता की बात उठाने को लेकर मेरा मुंह बंद किया है,वह यह जानने के कि मैं वह दरिया हूं,जो बड़ा सैलाब ला सकता हूं।
राघव चंद्रा के इस चुनौती का अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी पर क्या प्रभाव पड़ेगा या तो आने वाले समय में ही पता चलेगा लेकिन फिलहाल तो अरविंद केजरीवाल ने उन्हें राज्यसभा में उप नेता पद से हटाकर अपना शातिराना भरा चाल चल दिया है।
आम आदमी पार्टी (AAP) ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया है, और उनकी जगह पार्टी MP अशोक मित्तल को लाया है। हालांकि पार्टी ने ऑफिशियली वजह नहीं बताई है, लेकिन इस कदम से AAP के अंदर के डायनामिक्स और लीडरशिप में बदलाव को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर के पद से हटाने का फैसला पार्टी के अंदर मतभेदों की खबरों के बीच हुआ है। AAP ने राज्यसभा सेक्रेटेरिएट को इस बदलाव के बारे में ऑफिशियली इन्फॉर्म किया है और यह भी रिक्वेस्ट की है कि चड्ढा को हाउस में बोलने का टाइम न दिया जाए।
आम आदमी पार्टी ने हालांकि राघव चड्ढा के मामले को लेकर कोई ऑफिशल स्टेटमेंट नहीं दिया है, लेकिन विभिन्न दृष्टांतों पर नजर डालने से यह लगता है
कि पार्टी के डिसिप्लिन और पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल के स्टैंड के साथ ढंग से एलाइनमेंट नहीं होने को लेकर राघव चढ़ा के विरुद्ध ऐसी कार्रवाई की गई होगी।
हाल के महीनों में, राघव चड्ढा पार्टी के खास मुद्दों से खुद को दूर करते दिखे। 2025 के दिल्ली चुनावों में AAP की हार के बाद, उनका पब्लिक फोकस बड़ी पॉलिसी से जुड़ी चिंताओं पर चला गया।और उन्होंने राज्यसभा में निम्नलिखित प्रमुख मुद्दे उठाए :
पेड पैटरनिटी लीव
एयरपोर्ट पर खाने की बढ़ती कीमतें
गिग वर्कर्स के अधिकार
बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम
मेंस्ट्रुअल हाइजीन और पब्लिक हेल्थ
इससे इतर राघव चड्ढा कई ऐसे कार्य कर रहे हैं जो केजरीवाल को नागवर गुजरता है। 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले, जब अरविंद केजरीवाल को शराब पॉलिसी केस के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था, तो राघव चड्ढा ने UK में आंख की सर्जरी से ठीक होने को अपनी देर से प्रतिक्रिया का कारण बताया था।
हाल ही में, 2026 में, जब एक कोर्ट ने AAP चीफ अरविंद केजरीवाल, पूर्व डिप्टी चीफ मिनिस्टर मनीष सिसोदिया और अन्य को दिल्ली एक्साइज पॉलिसी केस में बरी कर दिया, तो उन्होंने पब्लिकली कोई रिएक्शन नहीं दिया। सोशल मीडिया से उनकी गैरमौजूदगी और इस डेवलपमेंट के बाद पब्लिक स्टेटमेंट की कमी ने पार्टी के अंदर उनके रुख को लेकर अटकलों को और हवा दी।
असम चुनाव के लिए AAP के स्टार कैंपेनर की लिस्ट में राघव चड्ढा की गैरमौजूदगी ने उनके पार्टी छोड़ने की अफवाहों को और हवा दी।
इसके अलावा, पार्टी के सीनियर नेताओं से जुड़े हाई-प्रोफाइल डेवलपमेंट पर उनकी चुप्पी ने भी अटकलों को और हवा दी। यह भी देखा गया कि उन्होंने AAP के टॉप नेताओं से जुड़े हालिया कानूनी डेवलपमेंट पर पब्लिक में कोई कमेंट नहीं किया, जिससे पार्टी लीडरशिप के साथ उनके तालमेल पर सवाल उठे।
अशोक मित्तल, जिन्होंने अब राज्यसभा में डिप्टी लीडर का पद संभाला है, ने राघव चड्ढा से जुड़े किसी भी झगड़े की अफवाहों को खारिज कर दिया।
उन्होंने इस बदलाव को एक रूटीन ऑर्गेनाइजेशनल फैसला बताया, और कहा कि अलग-अलग सदस्यों को एक्सपीरियंस देने के लिए लीडरशिप रोल अक्सर रोटेट किए जाते हैं।
मित्तल ने इस बात पर जोर दिया कि पार्टी अपने नेताओं को एडमिनिस्ट्रेटिव और पॉलिटिकल एक्सपर्टीज बनाने के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियां लेने के लिए बढ़ावा देती है।
राघव चड्ढा AAP के शुरुआती दिनों से ही इसके साथ करीब से जुड़े रहे हैं। उन्होंने 2012 में दिल्ली लोकपाल आंदोलन के दौरान अरविंद केजरीवाल के साथ काम करते हुए अपना राजनीतिक सफ़र शुरू किया।इन सालों में, वे पार्टी में तेज़ी से आगे बढ़े:
नेशनल स्पोक्सपर्सन बने
पार्टी के सबसे कम उम्र के ट्रेज़रर रहे
2020 के दिल्ली असेंबली इलेक्शन में राजेंद्र नगर सीट जीती
दिल्ली जल बोर्ड के वाइस-चेयरमैन का पद संभाला
2022 में सबसे कम उम्र के राज्यसभा MP में से एक बने
डिप्टी लीडर पोस्ट से उनका हटाया जाना पार्टी के अंदर उनकी राजनीतिक दिशा में एक बड़ा बदलाव दिखाता है।
राघव चड्ढा को बदलने का फ़ैसला AAP के अंदरूनी स्ट्रक्चर और स्ट्रैटेजी में संभावित बदलावों को दिखाता है। जबकि पार्टी का कहना है कि यह एक रूटीन फेरबदल है, कई लोग इसे लीडरशिप की बदलती प्राथमिकताओं के संकेत के तौर पर देखते हैं। यह कदम गहरी दरार का संकेत देता है या सिर्फ़ एक स्ट्रैटेजिक एडजस्टमेंट, यह देखना बाकी है। फिलहाल, राघव चड्ढा पार्टी में एक अहम व्यक्ति बने हुए हैं, भले ही उनकी भूमिका में बदलाव हो रहा है।

